वित्त मंत्री अरुण जेटली के बजट 2018 की बुराई करने के लिए किसी के पास कुछ खास नहीं है। सवाल खड़े हो रहे हैं कि, दुनिया की सबसे बड़ी स्वास्थ्य बीमा योजना को अमल में कैसे लाया जाएगा। यह भी पूछा जा रहा है कि, किसान को लोगत का डेढ़ गुना कैसे मिल सकेगा। इसी तरह के सवालों के इर्द गिर्द बजट की आलोचना हो रही है। लेकिन, कहीं से भी बजट को लेकर कोई ऐसी आलोचना नहीं हुई है जिससे, बजट को खराब बताया जा सके। सबसे कमाल की बात यह है कि, जिस मध्यम वर्ग के मोदी सरकार में फलने फूलने की बात स्वाभाविक तौर से कही जाती है, उस मध्यम वर्ग की जबरदस्त अनदेखी इस बजट में हुई है। लेकिन, यह अनदेखी अनायास नहीं है। सीएनबीसी आवाज पर हुई बजट के बाद की चर्चा में मैंने उस वजह को समझाने की कोशिश की है, जिसकी वजह से नरेंद्र मोदी ने मध्यम वर्ग को पूरी तरह से अनदेखा करने का फैसला कर लिया है।


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