बतंगड़ ब्लॉग

भीड़ में कुचलकर सपनों का मर जाना

ये सपने देखने की कीमत, अपनी जान गंवाकर चुकाना है ये अपनी जमीन-लोग छोड़कर, सपने देखने वालों का मर जाना है ये बेहतर जिन्दगी की तलाश के सामने, अट्टहास कर मौत का खड़े हो जाना है ये बड़ा बनने की पहली कोशिश पर, बड़ी तगड़ी चोट का हो जाना है Read more…

By Harsh, ago
बतंगड़ ब्लॉग

नौकरी में भागते रहने का सुख !

मेरी पहली नौकरी प्रयाग महाकुम्भ में वेबदुनिया के साथ ये सलाह अनुभव से उपजी है और सभी के लिए है। लेकिन ख़ासकर पत्रकारों के लिए। ये सही है कि हम पत्रकार या तो दिल्ली, मुम्बई जैसी बड़ी जगह या फिर अपने राज्य की राजधानी या फिर अपने जिले के ही Read more…

By Harsh, ago
बतंगड़ ब्लॉग

समन्दर किनारे की ताजगी और गन्दगी

वर्सोवा में सफ़ाई का कमाल देखने चला गया। समन्दर किनारे तो अच्छा ही लगता है। लेकिन जो वर्सोवा बीच सफ़ाई की मिसाल बताया जा रहा है, उसकी ये तस्वीरें दिखीं। मन दुखी हो गया। पढ़ा था कि किसी एक व्यक्ति की कोशिश से वर्सोवा बीच गजब का साफ हो गया Read more…

By Harsh, ago
राजनीति

शीर्षक सूझ नहीं रहा!

#MumbaiGangRape की खबर आ गई थी। वो मुंबई जहां रात 2 बजे भी एक लड़की दस लड़कों के साथ घूमने जा सकती है। और, अकेले लड़के के साथ भी। और, बिना किसी लड़के के साथ भी। उस मुंबई में शाम 6 बजे एक वीरान पड़ी मिल में किसी पत्रकार बनने Read more…

By Harsh, ago
राजनीति

मीडिया का परिपक्व व्यवहार

बाल ठाकरे के निधन के बाद फेसबुक टिप्पणी की वजह से इन दोनों को पुलिस ने गिरफ्तार किया था  मुंबई के पालघर की दो बहादुर कन्याओं Shaheen Dhada और Rinu Shrinivasan ने वो कर दिखाया जो, न होता तो, बाल ठाकरे का असल चरित्र उनके मरने के साथ दफन हो Read more…

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राजनीति

बंबई, ब्लॉगर, बाजार, भाषण

कई महीनों बाद मुंबई जाने का अवसर हाथ आया था तो, ऐसा हो ही नहीं सकता था कि मैं इसे छोड़ देता। दरअसल, अनीताजी के मन में सेमिनार कराने की इच्छा ने मुझे ये अवसर प्रदान किया था। अनीताजी के ब्लॉग पर सेमिनार की चर्चा है। इसी सेमिनार के लिए Read more…

By Harsh, ago
राजनीति

हम हाथ मिला लिए हैं .. तुम मरो-कटो हमारी बला से

लीजिए साहब सब शांति से निपट गया। बड़ा बुरा हुआ। कोशिश तो पूरी हुई थी फिर भी न तो कोई मार पीट हुई, न दंगा। अब जब कुछ नहीं हो पाया तो, चलो भाई हाथ मिला लेते हैं। आखिर भरोसा जो मिल गया है कि शांतिपूर्वक सब काम हो जाएगा। Read more…

By Harsh, ago
राजनीति

मुंबई में जिंदगी की रफ्तार से तेज दौड़ रही है दहशत

मुंबई में जिंदगी की रफ्तार कुछ ऐसी है कि छोटे शहरों से आया आदमी तो यहां खो जाता है। उसे चक्कर सा आने लगता है। इस रफ्तार को समझकर इसके साथ तो बहुतेरे चल लेते हैं। लेकिन, इस रफ्तार को कोई मात दे देगा ये, मुश्किल ही नहीं नामुमकिन था। Read more…

By Harsh, ago
राजनीति

नपुंसक नेताओं के हाथ में कब तक रहेगा देश

खून खौल रहा है। इच्छा ये कि क्यों नहीं मैं भी किसी फोर्स में हुआ। और, क्यों नहीं ऐसा मौका मुझे भी मिला कि दो-चार आतंवादियों को मार गिराता। साथ में कुछ नपुंसक नेताओं को भी। हम टीवी वाले भले ही देश को न्यूज दिखाने के चक्कर में हर खबर Read more…

By Harsh, ago