बतंगड़ ब्लॉग

यह मीडिया का ट्रोल काल है !

राजनीति हमेशा से लठैतों के साथ होती रही है। बड़े अच्छे नेताओं के भी लठैत होते रहे हैं। लेकिन, मीडिया में लठैत युग आ जाएगा, इसकी कल्पना कम ही थी। क्षेत्रीय स्तर पर अखबारों के कुछ सम्पादकों के पास लठैत टाइप के पत्रकार होते रहे हैं। लेकिन, राष्ट्रीय मीडिया में Read more…

By Harsh, ago
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मोदी सरकार में मीडिया ऐसा बंटा क्यों है?

करीब 4 दशक के वामपंथ और कांग्रेस के बिना किसी लिखित समझौते के तय हुए सत्ता संस्कार ने देश में बुद्धिजीवी, लेखक, साहित्यकार, पत्रकार, कलाकार होने की शर्त तय कर दी। उसी का परिणाम है कि अब @narendramodi की सरकार आने के बाद अखलाक हो या दूसरा कोई मुद्दा मीडिया Read more…

By Harsh, ago
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एक दिन मैं भी पीएम के साथ तस्वीर लूंगा

टेलीग्राफ अखबार की ये सवाल-जवाब वाली शानदार तस्वीर वाली खबर नहीं देखी होती, तो इस विषय पर मैं शायद ही कुछ लिखता। लेकिन, इसके बाद मेरे मन में जो था। वो लिखना जरूरी लगा। प्रधानमंत्री के साथ तस्वीर होना किसी के लिए भी बड़ी खुशी की वजह हो सकती है। Read more…

By Harsh, ago
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बेवकूफ कौन- आम आदमी पार्टी या दिल्ली की जनता?

अरविंद केजरीवाल की एक के बाद एक क्रांतिकारी हरकतों के बाद कई लोग दिल्ली की जनता का मजाक उड़ाते दिख रहे हैं। क्योंकि, दिल्ली की जनता ने साल भर में ही दो बार अरविंद और उनकी आम आदमी पार्टी को सत्ता सौंपी। अब जरा सोचकर देखिए कि दिल्ली की जनता Read more…

By Harsh, ago
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तानाशाही विचारधारा के हैं अरविंद केजरीवाल!

अरविंद केजरीवाल मुझे बहुत लुभाते थे। गलत कह रहा हूं सच बात ये है कि अभी भी बहुत लुभाते हैं। बिना किसी बहस के अरविंद केजरीवाल का खुद में भरोसा गजब है। और ऐसा ही भरोसा हम  जैसे लोगों को भी अरविंद में दिखता है लेकिन, उससे भी ज्यादा भरोसा Read more…

By Harsh, ago
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ये मामला इतना सीधा नहीं है !

दुष्कर्म की घटना के अकेले चश्मदीद को जी न्यूज एडिटर ने अपने पत्रकारीय पुनर्जन्म के लिए इस्तेमाल किया है। ये बहस चल रही है। बहस ये भी कि ऐसे संवेदनशील मसले की भी पैकेजिंग बड़ी घटिया हुई है। हमें लगता है कि ये दोनों बातें काफी हद तक सही हो Read more…

By Harsh, ago
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… और अब चाहिए कोडिफाइड मीडिया

इलाहाबाद विश्वविद्यालय के सेन्टर ऑफ फोटो जर्नलिज्म एण्ड विजुअल कम्युनिकेशन, इंस्टीट्यूट ऑफ प्रोफेशनल स्टडीज की पत्रिका ‘बरगद’ का ताजा अंक मीडिया पर है। इस अंक में मीडिया का कोड ऑफ कंडक्ट होना चाहिए क्या। पत्रकारिता की नई प्रवृत्तियां बनाम अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, समाचारों में सनसनी और टीआरपी की होड़, विशेषीकृत Read more…

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