राजनीति

खेत खत्म, बाजार बमबम

रेडियो पर विज्ञापन सुनते दफ्तर आया जिसमें पत्नी चिंतित है कि खाने का पूरा ध्यान रखने के बाद भी पति चैतन्य नहीं रहता। सलाह मिलती है कि रोज के खाने से शरीर की सारी जरूरतें पूरी नहीं होतीं। प्रोटीन के लिए ये उत्पाद खाओ। और अगर ध्यान से दूसरे विज्ञापनों Read more…

By Harsh, ago
राजनीति

हम कैसा देश बनें

बड़ी भयानक ऊहापोह है। भारत इसी ऊहापोह में आजादी के बाद से ऐसा जूझ रहा है कि खुद का भी वजूद नहीं बचा रह पाया है। कुल मिलाकर ऐसे कहें कि एक बार हम जब गुलाम हुए तब से आज तक यानी सैकड़ों सालों से हम तय ही नहीं कर Read more…

By Harsh, ago
राजनीति

देश और शरीर में बड़ा फरक है

कश्मीर मसले को भारतीय लोकतांत्रिक तरीके से सुलझाना नामुमिकन है। भारतीय लोकतंत्र की इतनी मजबूरियां हैं कि वो, कोई फैसला नहीं ले सकता। इस लोकतंत्र के 60 साल सिर्फ सहमति बनाने की चिरकुटाई में बीत गए। वो, भी सहमति बनाने की कोशिश उनसे जो सहमत तो हो ही नहीं सकते। Read more…

By Harsh, ago
राजनीति

चीन में भी शहरों और गांवों के विकास में बड़ा फर्क है

भारत के लिए अक्सर ये कहा जाता है कि तरक्की के साथ सामाजिक विकास के मामले में भी चीन से सीखा जा सकता है। ये भी दावा किया जाता है कि वहां के कम्युनिस्ट शासन में सभी लोगों में बराबर बंटवारा है। अभी कुछ दिन पहले जब खबर आई थी Read more…

By Harsh, ago