बतंगड़ ब्लॉग

भीड़ में कुचलकर सपनों का मर जाना

ये सपने देखने की कीमत, अपनी जान गंवाकर चुकाना है ये अपनी जमीन-लोग छोड़कर, सपने देखने वालों का मर जाना है ये बेहतर जिन्दगी की तलाश के सामने, अट्टहास कर मौत का खड़े हो जाना है ये बड़ा बनने की पहली कोशिश पर, बड़ी तगड़ी चोट का हो जाना है Read more…

By Harsh, ago