बतंगड़ ब्लॉग

मुम्बईकरों की मजबूरी को जिन्दादिली बताने की घिनौनी सरकारी नीति

मुम्बई लोकल के एलफिन्सटन रोड रेलवे स्टेशन पर हुई भगदड़ में लोगों के मारे जाने के बाद मुम्बई की बुनियादी सुविधाओं पर चर्चा हो रही है। हो सकता है कि कल सुबह से मीडिया लेकर बुद्धिजीवी और यहां तक कि सरकार में बैठे लोग भी बताने लगें कि मुम्बई के Read more…

By Harsh, ago
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भीड़ में कुचलकर सपनों का मर जाना

ये सपने देखने की कीमत, अपनी जान गंवाकर चुकाना है ये अपनी जमीन-लोग छोड़कर, सपने देखने वालों का मर जाना है ये बेहतर जिन्दगी की तलाश के सामने, अट्टहास कर मौत का खड़े हो जाना है ये बड़ा बनने की पहली कोशिश पर, बड़ी तगड़ी चोट का हो जाना है Read more…

By Harsh, ago
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नौकरी में भागते रहने का सुख !

मेरी पहली नौकरी प्रयाग महाकुम्भ में वेबदुनिया के साथ ये सलाह अनुभव से उपजी है और सभी के लिए है। लेकिन ख़ासकर पत्रकारों के लिए। ये सही है कि हम पत्रकार या तो दिल्ली, मुम्बई जैसी बड़ी जगह या फिर अपने राज्य की राजधानी या फिर अपने जिले के ही Read more…

By Harsh, ago
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मुम्बई की बारिश और पानी की कमी

टेलीविजन के जरिए मुम्बई को देखते लोगों को लग रहा होगा कि मुम्बई पूरा बारिश में भीगा/डूबा हुआ है। लेकिन, ऐसा है नहीं। बारिश हो रही है, लगभग रोज ही। लेकिन, ऐसी भी झमाझम वाली नहीं हो रही है। हां, इतनी बारिश जरूर हो रही है कि मुम्बई के लिए Read more…

By Harsh, ago
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समन्दर किनारे की ताजगी और गन्दगी

वर्सोवा में सफ़ाई का कमाल देखने चला गया। समन्दर किनारे तो अच्छा ही लगता है। लेकिन जो वर्सोवा बीच सफ़ाई की मिसाल बताया जा रहा है, उसकी ये तस्वीरें दिखीं। मन दुखी हो गया। पढ़ा था कि किसी एक व्यक्ति की कोशिश से वर्सोवा बीच गजब का साफ हो गया Read more…

By Harsh, ago