बतंगड़ ब्लॉग

लाई की पैकिंग में छिपा है किसान की किस्मत बदलने का मंत्र

बार-बार ये पूछा जाता है कि आखिर किसान को उसकी उपज की सही कीमत कैसे मिल सकती है। देश के प्रधानमंत्री से लेकर छोटा सा किसान तक इसी का जवाब खोजने में पूरी ताकत लगा रहा है। यहां तक कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तो बाकायदा 5 साल में किसानों Read more…

By Harsh, ago
राजनीति

सबका ‘विकास’ दूसरे के हिस्से में से हो

#विकास कितना मुश्किल होता है। उसका उदाहरण हैं, ये दोनों सड़कें। दरअसल ये एक ही सड़क के दो हिस्से हैं। पक्की सड़क मेरे घर के सामने से आ रही है और जहाँ ये खड़ंजा बिछा दिख रहा है। हमारे गाँव के ही शुक्ला जी के खेत से गुज़रती है। पहले चकरोड Read more…

By Harsh, ago
राजनीति

भारत के शहर, भारत के गांवों के खिलाफ साजिश हैं?

ये बड़ी बहस का विषय हो गया है कि आखिर इस देश का विकास मॉडल क्या होना चाहिए। शहरी विकास मॉडल या गांवों का विकास मॉडल। इस बात की बहस में आमतौर पर शहरों में रहने वाले या कुछ गांवों में कुछ करके शहरी सुविधाओं का भरपूर उपयोग, उपभोग करने Read more…

By Harsh, ago
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नइकी दुलहिनिया!

नइकी, पहिले दिन ही आई तो, उसे पता था कि वो, सिर्फ दुबेजी का वंश चलाने के लिए लाई गई है। उस पर हर समय बड़कई के गुस्साने का भी डर था। देखने में बड़कई भी ठीक थी। लेकिन, बड़कई बड़ी थी तो, उमर का भी असर और सबसे बड़ी Read more…

By Harsh, ago
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सरसों का तेल कैसे बनता है ?

गांव में हमारे दरवाजे पर पीटी जा रही सरसों गांव खत्म होते जा रहे हैं। हैं भी तो, वो शहर होते जा रहे हैं। पहले गर्मी की छुट्टियों में हर बच्चा अपने गांव जाता था। और, करीब 2 महीने की शानदार छुट्टियां मनाने में पूरा गांव समझ लेता था। गांव Read more…

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खाबदान!

 बवाली के मेहरारू क तेरही भोज  आखिरकार नंबरदार के घर से केहू नाहीं आए। जबकि, लागत रहा कि एकाध घर छोड़के एह बार सब बवाली के दुआरे खाए अइहैं। मैनेजर साहब से बाबूजी मिलेन त कहेन कि ई जरूरी है कि पूरा गांव एक साथे रहै। कउनौ मतलब Read more…

By Harsh, ago
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ये है महंगाई संकट की असली वजह

क्या सचमुच खाद्यान्न की कमी से महंगाई बढ़ रही है। इस सवाल का जवाब मुझे तो नही में दिख रहा है। और, ये नहीं का जवाब पक्का हुआ है आज पिताजी से इलाहाबाद बात करने के बाद। पिताजी का फोन आया तो, उन्होंने बताया कि आज गांव गए थे। लेकिन, Read more…

By Harsh, ago
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टिप्पणियों ने 2 पोस्ट को 7 पोस्ट बना दिया

कई बार ब्लॉगरों में ये चर्चा होती है कि हम स्वांत: सुखाय के लिए लिखते हैं। कुछ लोग कहते रहे हैं कि हमें टिप्पणियों से भी खास लेना-देना नहीं हैं। लेकिन, मेरा मानना है कि टिप्पणी एक नई ऊर्जा देती हैं जो, ब्लॉगर को आगे लिखने में मदद करता है। Read more…

By Harsh, ago
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लखनऊ की सत्ता से गांवों में बदलती सामाजिक-आर्थिक हैसियत

(अबकी छुट्टियों में मैं अपने गांव होकर लौटा हूं। शहरों में रहकर बमुश्किल ही ये अंदाजा लग पाता है कि गांव कैसे जी रहे हैं। वहां रहने वाले ऐसे क्यों होते हैं। शहर वालों जैसे क्यों नहीं रह पाते हैं। दोनों कहां जाकर बंटते हैं। गांवों में खासकर यूपी के Read more…

By Harsh, ago
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गांवों में सिकुड़ती, सूखती जमीन का जिम्मेदार कौन

(अबकी छुट्टियों में मैं अपने गांव होकर लौटा हूं। शहरों में रहकर बमुश्किल ही ये अंदाजा लग पाता है कि गांव कैसे जी रहे हैं। वहां रहने वाले ऐसे क्यों होते हैं। शहर वालों जैसे क्यों नहीं रह पाते हैं। दोनों कहां जाकर बंटते हैं। गांवों में खासकर यूपी के Read more…

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