गुजरात के रण उत्सव के बारे में आपकी क्या राय है? मोटा-मोटा यही कि, देश के एक खूबसूरत भौगोलिक हिस्से को नरेंद्र मोदी ने शानदार ब्रांडिंग करके देश और दुनिया को बेचा है। हर साल नवम्बर से फरवरी तक चलने वाले इस उत्सव में शामिल होने के लिए देश-दुनिया से लोग आते हैं। इसी समझ के आधार पर हम भी सपरिवार रण उत्सव का आनन्द लेने गए। किसी ने बताया कि, रण उत्सव का असल आनन्द लेना है तो, धोरडो टेन्ट सिटी में रुकना चाहिए। मुझे पता चला कि, धोरडो टेन्ट सिटी के प्रबन्धन का पूरा काम उन्हीं लल्लू जी एंड सन्स के हाथ में है, जिनका नाम हम बचपन से जानते हैं। लल्लू जी एंड सन्स इलाहाबाद के बहुत पुराने टेन्ट कारोबारी हैं। अगर मैं यह कहूं कि, प्रयाग में संगम की रेती पर हर साल लगने वाला माघमेला बिना लल्लू जी एंड सन्स पूरा नहीं हो सकता तो, अतिशयोक्ति नहीं होगी। पुराने वाले लल्लू जी एंड सन्स माघमेला, कुम्भ मेला लगाते हैं। कितने भी लोग मेले में आ जाएं, उन्हें टेन्ट का इन्तजाम करते हैं। अब नए वाले लल्लू जी एंड सन्स यानी लल्लू जी की नई वाली पीढ़ी गुजरात के कच्छ में जाकर टेन्ट सिटी लगा रही है। और, इस टेन्ट सिटी की वजह से कच्छ के रण की तरफ आखिरी बसे गांव धोरडो के लोगों की जिन्दगी बदल गई है। इतनी बदली है कि, अगली बार रण उत्सव में जाने का संयोग बना तो, कम से कम एक दिन धोरडो गांव में बीतेगा। लेकिन, धोरडो गांव के लोगों की जिन्दगी कितनी बदली है, इसका एक अनुमान आपको इस 2 मिनट से भी कम केे वीडियो से मिल जाएगा। अताउल्ला टेन्ट सिटी से जुड़कर गाड़ी चलाते हैं। उन्होंने बताया कि धोरडो गांव में 250 घर मुसलमान हैं और सिर्फ एक घर हरिजन। वीडियो में रोशनी थोड़ी कम है लेकिन, आवाज एकदम साफ है। मोदी का रण उत्सव, धोरडो के मुसलमानों के लिए संजीवनी जैसा ही है।


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