केरल में कल एक और स्वयंसेवक की हत्या कर दी गई। खबरों के मुताबिक, स्वयंसेवक आनंद सीपीएम के छात्र संगठन की हत्या में नामजद था। उसे दिनदहाड़े कुछ लोगों ने मार दिया। 18 महीने में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के 14 स्वयंसेवक मारे जा चुके हैं। वहां वामपन्थी सरकार है। पिनाराई विजयन पर विचारधारा के आधार पर वामपन्थी संगठनों से जुड़े हत्यारों को प्रश्रय देने का आरोप लगता रहा है। यह आपसी संघर्ष का परिणाम है और संघ के लोग भी हत्या में शामिल हैं, ऐसा कहकर सीपीएम अपनी जिम्मेदारी से मुक्त हो जाती है। दुर्भाग्य यह है कि देश के किसी भी राज्य में इस तरह से निर्ममता से लगातार राजनीतिक हत्याएं होतीं, तो उस राज्य में जंगल राज राष्ट्रीय मीडिया और बुद्धिजीवी घोषित कर चुके होते। फिर, केरल में ऐसा क्या है कि वहां हो रही राजनीतिक हत्याएं इस नजरिए से देखी नहीं जातीं।


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