कई दशक से गुजरात की राजनीति की दशा दिशा तय करने की स्थिति में सबसे मजबूत पाटीदार ही रहे हैं। ये वही पाटीदार हैं, जिन्होंने 1980 में आरक्षण विरोधी आंदोलन चलाया था और आज आरक्षण पाने के लिए आंदोलन कर रहे हैं। लेकिन, इन सबसे पाटीदारों में जबरदस्त विभाजन हुआ है। जो, हर रोज पटेल नेताओं के कभी इस ओर, तो कभी उस ओर आने-जाने से समझ में भी आता है। और, इसकी वजह से गुजरात चुनाव की सबसे मजबूत कड़ी पाटीदार इस चुनाव की सबसे कमजोर कड़ी हो गए हैं।