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पासपोर्ट दफ्तर और सुशासन

मिनिमम गवर्नमेंट और मैक्सिमम गवर्नेंस। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब प्रधानमंत्री बने, तो उन्होंने सबसे ज्यादा इसी बात पर जोर दिया था। वे इसी को विस्तार देते हुए हमेशा कहते हैं कि सरकार का काम कारोबार करना नहीं होता है। लेकिन, Read more…

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कांग्रेस प्रवक्ता, पत्रकारों पर आरोप लगाकर ही खुश हैं

सीएनबीसी आवाज पर गुजरात विधानसभा चुनाव के सन्दर्भ में हो रही चर्चा में पत्नकार नीरजा चौधरी,अभय दुबे और हर्षवर्धन त्रिपाठी कांग्रेस के ताकत न बन पाने पर लगभग एक जैसी ही राय रख रहे थे। लेकिन, कांग्रेसी प्रवक्ता प्रियंका चतुर्वेदी Read more…

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गुजरात में कांग्रेस विपक्ष की नेता न बन पाई

गुजरात विधानसभा चुनाव होने जा रहे हैं। राहुल गांधी कांग्रेस के लिए जोर शोर से प्रचार में जुटे हैं। हालांकि, शंकरसिंह वाघेला के पार्टी छोड़ने के बाद से असली मुश्किल यही हो गई है कि कांग्रेस के पास कोई नेता Read more…

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विकास को पागल करके कांग्रेस गुजरात जीतेगी ?

जिस गुजरात की पहचान ही विकास वाले राज्य के अगुवा के तौर पर होती है। वहां से विकास के पागल हो जाने की खबर आ रही है। कम से कम कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी लगातार यह गुजरात के लोगों को Read more…

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केरल से नहीं बना है देश का पहला दलित पुजारी

केरल में मंदिर के बोर्ड ने एक बड़ा फैसला लिया है। इस फैसले से मंदिर में 36 गैर ब्राह्मण पुजारी बन गए हैं। इनमें से 6 दलित है। इस फैसले का स्वागत किया जाना चाहिए, बिना किसी बहस के। त्रावणकोर Read more…

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मोदी जी, भविष्य के लिए वर्तमान ठीक होना जरूरी है

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज के दिन आर्थिक मोर्चे पर सरकार की आलोचना करने वालों का यह कहकर जवाब दिया है कि वे अपना वर्तमान ठीक करने के लिए देश का भविष्य नहीं बिगाड़ सकते। मेरा मोदी जी से निजी Read more…

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यह मीडिया का ट्रोल काल है !

राजनीति हमेशा से लठैतों के साथ होती रही है। बड़े अच्छे नेताओं के भी लठैत होते रहे हैं। लेकिन, मीडिया में लठैत युग आ जाएगा, इसकी कल्पना कम ही थी। क्षेत्रीय स्तर पर अखबारों के कुछ सम्पादकों के पास लठैत Read more…

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मुम्बईकरों की मजबूरी को जिन्दादिली बताने की घिनौनी सरकारी नीति

मुम्बई लोकल के एलफिन्सटन रोड रेलवे स्टेशन पर हुई भगदड़ में लोगों के मारे जाने के बाद मुम्बई की बुनियादी सुविधाओं पर चर्चा हो रही है। हो सकता है कि कल सुबह से मीडिया लेकर बुद्धिजीवी और यहां तक कि Read more…

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भीड़ में कुचलकर सपनों का मर जाना

ये सपने देखने की कीमत, अपनी जान गंवाकर चुकाना है ये अपनी जमीन-लोग छोड़कर, सपने देखने वालों का मर जाना है ये बेहतर जिन्दगी की तलाश के सामने, अट्टहास कर मौत का खड़े हो जाना है ये बड़ा बनने की Read more…

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अखबार में

अर्थव्यवस्था क्या सचमुच इतने बुरे दौर में है?

यशवन्त सिन्हा ने कहाकि अर्थव्यवस्था बुरे दौर में है। जयन्त सिन्हा ने कहाकि अर्थव्यवस्था अच्छे दौर में है। खैर, अर्थव्यवस्था का अच्छा-बुरा होना बाप-बेटे की राय भर से तय नहीं होने वाला। लेकिन, यह सवाल बड़ा हो गया है। नोटबन्दी Read more…

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