आधार को लेकर पहले सरकारें भी भ्रम में रहीं और अब भी समझ नहीं आ रहा है कि यह एक और पहचान पत्र की तरह काम करेगा या फिर भारत के हर नागरिक की आधार एक पक्की पहचान होगा। मेरा स्पष्ट मानना है कि अगर आधार को अनिवार्य नहीं किया गया, तो इसे बनाने का कोई मतलब नहीं है। जनता का पैसे की बर्बादी है।