सर्वोच्च न्यायालय के 4 न्यायाधीशों का देश के मुख्य न्यायाधीश के खिलफ मोर्चा खोलना सामान्य घटना नहीं है। जस्टिस चेलामेश्वर ने खुद भी इसे अभूतपूर्व बताया है। इसे देश को सचमुच गम्भीरता से लेने की जरूरत है। सचमुच गम्भीर सवाल खड़े हो गए हैं। क्योंकि, इतनी रहस्यमयी हमने तो आज तक नहीं देखा। जिसमें देश का 4 विद्वान न्यायाधीश प्रेस कांफ्रेंस करके मुख्य न्यायाधीश पर आरोप लगा रहे हों। कमाल की बात यह भी रही कि, पूरी प्रेस कांफ्रेंस तक किसी को समझ में नहीं आया कि, विद्वान कवि कहना क्या चाह रहे हैं। राजनीतिक प्रेस कांफ्रेंस जैसी न्यायाधीशों की प्रेस कांफ्रेंस लग रही थी। प्रशासनिक अनियमितता को लेकर इस तरह की प्रेस कांफ्रेंस का कतई मतलब न समझ आया। विपक्ष लगातार यह आरोप लगाता रहा है कि, मोदी सरकार में संस्थाओं की साख खत्म हो रही है। लेकिन, यहां तो सरकार ने नहीं, खुद 4 वरिष्ठतम न्यायाधीशों ने ही सर्वोच्च न्यायालय की साख खा ली है। दीपक मिश्रा सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश बने हैं, उनका लम्बा सफर रहा है। अगर, सचमुच मुख्य न्यायाधीश इस कदर गड़बड़ी कर रहे हैं कि, वरिष्ठतम न्यायाधीशों को लगा कि, अब न बोले तो आरोप लगेगा कि, आत्मा बिक गई है तो, ठीक से देश को बता ही देना चाहिए कि, क्या-क्या गड़बड़ियां दीपक मिश्रा कर रहे हैं। लेकिन, ऐसा कुछ नहीं दिखा। लोकतांत्रिक देश में 4 वरिष्ठतम न्यायाधीशों की लोकतंत्र को खतरे में डालने की यह कोशिश खतरनाक है। असहिष्णुता पार्ट-2 जैसा दिख रहा है।


Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *