भारत में उद्योगों की रफ्तार बेहतर हो रही है। ताजा आईआईपी के आंकड़े यह बात साफ कर रहे हैं। ताजा उद्योगों के उत्पादन में तरक्की की रफ्तार पिछले 9 महीने में सबसे ज्यादा है। अगस्त महीने में उद्योगों में उत्पादन बढ़ने की रफ्तार 4.3 प्रतिशत रही है। त्योहारों के पहले की मांग का यह सीधा असर माना जा सकता है। इससे भी अच्छी बात यह है कि सितम्बर महीने के महंगाई के आंकड़े भी काबू में हैं। सितम्बर महीने में महंगाई दर 3.28 प्रतिशत पर स्थिर रही है। इससे माना जा सकता है कि अर्थव्यवस्था के अच्छे दिनों के संकेत मिल रहे हैं। लेकिन, इन आंकड़ों के आने के ठीक पहले अंतर्राष्ट्रीय मौद्रिक फंड, IMF, ने साफ कहा है कि भारतीय अर्थव्यवस्था की तरक्की की रफ्तार इस साल घटने जा रही है. पहले के अनुमान 7.2% से घटकर जीडीपी ग्रोथ 6.7% रहने की बात आईएमएफ कह रहा है. और, इस कमी की सबसे बड़ी वजह नोटबंदी और जीएसटी को बताया गया है. पहली नजर में इस आधार पर अब ये बात और मजबूती से साबित होती दिखती है कि नोटबंदी और जीएसटी ने भारतीय अर्थव्यवस्था का नुकसान किया है. मोदी सरकार ने जीएसटी लागू करने के बाद 3 महीने में जितने बदलाव किए, उससे भी ये निष्कर्ष आसानी से निकाला जा सकता है कि भारतीय अर्थव्यवस्था में कमजोरी देखने को मिल रही है. इसके लिए अर्थशास्त्र का जानकार होने की भी जरूरत नहीं है. नोटबंदी और जीएसटी से आई मुश्किलों के आधार पर आसानी से ये कहा जा सकता है कि अर्थव्यवस्था में कमजोरी है, इसी को देश-दुनिया के अर्थशास्त्री और एजेंसियां स्थापित भी कर रहे हैं. लेकिन, थोड़ा सा अर्थशास्त्र समझने की जरूरत इसके लिए जरूरी है कि आखिर अर्थव्यवस्था आगे कैसे जाती दिख रही है.
अर्थव्यवस्था का आगे का हाल समझने के लिए सबसे पहले ताजा आए कर वसूली के आंकड़े देख लेते हैं. सितंबर महीने में 3.86 लाख करोड़ रुपए की डायरेक्ट टैक्स वसूली हुई है. ये पिछले साल के इसी समय से 15.8% ज्यादा है. अप्रैल से सितंबर के दौरान कॉर्पोरेट पर्सलन इनकम टैक्स की बात करें, तो करीब 30.1% बढ़ा है। जबकि, कॉर्पोरेट एडवांस टैक्स 8% बढ़ा है। अब आईएमएफ के ताजा आंकड़ों को फिर से देखते हैं. आईएमएफ ने 2017 यानी वित्तीय वर्ष 2017-18 में 6.7% जीडीपी ग्रोथ का अनुमान लगाया है. अगले साल आईएमएफ ने भारत की तरक्की की रफ्तार 7.4% रहने का अनुमान लगाया है. इस साल और अगले साल के जीडीपी ग्रोथ अनुमान के पीछे आईएमएफ का कहना है कि नोटबंदी और जीएसटी की वजह से कमजोरी देखने को मिल रही है. साथ ही आईएमएफ का ये भी कहना है कि जीएसटी जैसे आधारभूत सुधारों की वजह से आगे अर्थव्यवस्था में तेजी देखने को मिलेगी. इन दो पंक्तियों से ही अर्थव्यवस्था का असल हाल काफी हद तक समझ में आ जाता है. सिर्फ आईएमएफ के कह देने से कि जीएसटी से आगे तरक्की बेहतर होगी, ये मान लेना ठीक नहीं होगा. इसके लिए अर्थव्यवस्था के उन संकेतों को देखना जरूरी है जिससे ये पता लगेगा कि अर्थव्यवस्था में बेहतरी का कुछ आधार मजबूत हो रहा है या नहीं. इसके लिए सबसे पहले नजर डाल लेते हैं ऑटो कम्पनियों के ताजा बिक्री आंकड़ों पर. जनवरी से अगस्त में यात्री कारों की बिक्री में बढ़त दुनिया में सबसे तेज रही है. भारत में पैसेंजर वेहिकल की बिक्री साल के 8 महीने में करीब 10 प्रतिशत बढ़कर 21 लाख से ज्यादा रही है. इस तेजी का मतलब इसलिए भी ज्यादा है क्योंकि, ये तेजी नोटबंदी और जीएसटी के बावजूद रही है. SIAM का अनुमान अगले साल भी यात्री कारों की बिक्री 7-9 प्रतिशत बढ़ने का अनुमान है.
सितंबर महीने का ऑटोमोबाइल सेक्टर की बिक्री का आंकड़ा अर्थव्यवस्ता पर छाए धुंधलके को और साफ करता है. SIAM के ताजा आंकड़े बता रहे हैं कि सितंबर महीने में मोटरसाइकिंल की बिक्री 7% और यूटिलिटी वेहिकल की बिक्री 26.2% बढ़ी है. यात्री कारों की बिक्री सितंबर महीने में भी 11.3% ज्यादा हुई है. लेकिन, सबसे महत्वपूर्ण आंकड़े हैं कमर्शियल गाड़ियों की बिक्री के. सितंबर महीने में कमर्शियल वाहन 25.3% ज्यादा बिके हैं. इसका सीधा सा मतलब है कि कारोबार की संभावनाएं बेहतर हो रही हैं. बस, ट्रक की बिक्री का सीधा सा मतलब होता है कि देश में कारोबारी मौके बेहतर हो रहे हैं. और, सिर्फ बस-ट्रक ही नहीं, ट्रैक्टरों की अच्छी बिक्री के भी आंकड़े आए हैं. सितंबर महीने में 52% ज्यादा ट्रैक्टर बिके हैं. महिंद्रा एंड महिंद्रा ने 22% और एस्कॉर्ट्स ने 32% ज्यादा ट्रैक्टर बेचे हैं. कमर्शियल वाहनों और ट्रैक्टर की बिक्री साफ संकेत देती है कि कारोबारी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में बेहतरी होती दिख रही है. ग्रोथ स्टोरी यहां आकर रुक नहीं रही है. रेटिंग एजेंसी क्रिसिल का अनुमान है कि इस साल रिकॉर्ड 6.5 लाख ट्रैक्टर बिकेंगे. एफएमसीजी कंपनियां इस साल दीपावली पर 10-15% ग्रोथ का अनुमान लगा रही हैं.
बुधवार को शेयर बाजार में दीपावली से पहले ही दीपावली जैसा माहौल देखने को मिला. सेंसेक्स 32000 के पार चला गया. बुधवार की इस तेजी में 130 से ज्यादा स्टॉक ऐसे रहे, जो 52 हफ्ते के सबसे ऊंचे भाव पर बिके. लेकिन, एक दिन की तेजी के आधार पर शेयर बाजार और अर्थव्यवस्था के हाल को अच्छा कह देना ठीक नहीं होगा. इसलिए हम एक पैमाना ये भी तय कर सकते हैं कि इस साल IPO के जरिए शेयर बाजार कंपनियों ने निवेशकों से कितनी रकम जुटाई. इस पैमाना पर ये साल रिकॉर्ड बना रहा है. इस साल अब तक IPO के जरिए 52000 करोड़ रुपए की रकम कंपनियां जुटा चुकी हैं.
जीडीपी में सबसे अहम भूमिका निभाने वाले कोर सेक्टर की तरक्की का आंकड़ा भी अर्थव्यवस्था के सुखद भविष्य को ही आगे बढ़ाता है. अगस्त महीने में कोर सेक्टर की ग्रोथ पिछले साल से 4.9% ज्यादा रही है. कोयला उत्पादन 15.3% बढ़ा है. प्राकृतिक गैस का उत्पादन 4.2% ज्यादा हुआ है. रिफाइनरी प्रोडक्ट में 2.4% की तरक्की देखने को मिली है. स्टील उत्पादन 3% बढ़ा है. बिजली उत्पादन अगस्त महीने में 10.3% बढ़ा है. कच्चे तेल में 1.6%, फर्टिलाइजर 0.7% और सीमेंट उत्पादन 1.3% गिरा है. कुल मिलाकर कोर सेक्टर की तरक्की की रफ्तार अर्थव्यवस्था की बेहतरी के संकेत दे रही है.
और, अंत में सबसे महत्वपूर्ण पैमाना. स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की रिसर्च रिपोर्ट बता रही है कि भ्रष्टाचार घटने से तरक्की की संभावना बेहतर होती है। भारत के संदर्भ में ये रिपोर्ट बताती है कि ट्रांसपैरेंसी इंटरनेशनल के ग्लोबल करप्शन इंडेक्स में भारत 2011 से 2016 में 96 से 79वें स्थान पर आ गया। रिपोर्ट में कहा गया है कि भ्रष्टाचार घटने से विदेशी निवेश में बढ़त देखने को मिली है। पिछले 6 सालों में FDI 64% बढ़ा है। 2012 में भारत में FDI 21.9 बिलियन डॉलर था, जो 2017 तक 35.9 बिलियन डॉलर पर पहुंच गया है। दरअसल, नोटबंदी और जीएसटी का हौवा इतना बड़ा है कि अर्थव्यवस्था का बेहतर भविष्य ठीक से दिख नहीं रहा। लेकिन, आंकड़े बता रहे हैं कि अर्थव्यवस्था के अच्छे दिन आने वाले हैं।
(यह लेख QuintHIndi पर छपा है)


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