GST बिल राज्यसभा में मंजूर हो गया। हालांकि, इसके
कानून में बनने में अभी लंबी प्रक्रिया है। लेकिन, इतना तो तय दिख रहा है GST के कानून बनने से देश की आर्थिक तरक्की की
रफ्तार सुधरेगी। देश दुनिया में आर्थिक तौर पर और ताकतवर होगा। ये इसका आर्थिक
पहलू हुआ। लेकिन, इसका एक राजनीतिक पहलू भी है। इस GST बिल के मंजूर होने से भाजपा और कांग्रेस के कुछ बड़े नेताओं का कद और बड़ा हो
गया है। साथ ही खुद प्रधानमंत्री भी स्वीकार्य हुए हैं। देखिए और कौन से नेता हैं
जिनकी प्रतिष्ठा GST बिल राज्यसभा में मंजूर होने से और बढ़ गई।

नरेंद्र मोदी- ढेर सारे आर्थिक सुधारों का इस सरकार ने एलान
किया। कारोबार में आसानी से लेकर बहुत सी उपलब्धियां प्रधानमंत्री के तौर पर
नरेंद्र मोदी के माथे सज सकती हैं। लेकिन, अभी तक यही माना जाता था कि नरेंद्र
मोदी अपनी जिद में विपक्ष को साथ लेकर नहीं चलना चाहते। GST के राज्यसभा से मंजूर होने के बाद नरेंद्र मोदी
पर ये आरोप हल्का होगा। साथ ही प्रधानमंत्री के तौर पर नरेंद्र मोदी की
स्वीकार्यता सभी दलों में बढ़ने का संकेत है। ये भी कह सकते हैं कि कांग्रेस ने
ढाई साल बाद आखिरकार नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री मान लिया है।
अरुण जेटली- ये सवाल बार-बार और मजबूती से उठने लगा था कि
आखिर क्या वजह है कि अरुण जेटली के रहते हुए भी GST बिल मंजूर नहीं हो पा रहा है। दबी जुबान से लोग ये चर्चा भी करने लगे थे कि
क्या अरुण जेटली चाहते ही नहीं हैं कि GST बिल मंजूर हो। वित्त मंत्री के तौर पर अरुण जेटली के माथे पर पर ये सबसे बड़ी
असफलता थी। GST बिल मंजूर होने के बाद अब अरुण जेटली को
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह तक बधाई मिली है। संकट
मोचक की छवि बरकरार है।
अनंत कुमार- लगातार 6 बार से बंगलुरू दक्षिण सीट से सांसद
चुनकर आ रहे अनंत कुमार की छवि बेहद विनम्र स्वभाव वाले नेता की है। लालकृष्ण
आडवाणी के नजदीक होने के वजह से लंबे समय तक नरेंद्र मोदी की नजदीकी हासिल नहीं कर
सके थे। रसायन एवं उर्वरक मंत्री होने के नाते मीडिया की नजरों से दूर रहे। ताजा बदलाव
में संसदीय कार्यमंत्री बन जाने से मोदी की गुडबुक में शामिल होने का अहसास पक्का
हुआ। GST बिल मंजूर कराने में विपक्षी दलों के सांसदों के
साथ अच्छे संबंधों का फायदा मिला। पार्टी, सरकार में स्थिति बेहतर होगी।
गुलाम नबी आजाद- कश्मीर से आने वाले गुलाम नबी आजाद कांग्रेस के
उन गिने-चुने नेताओं में से हैं, जो सदाबहार हैं। लेकिन, बहुत लो प्रोफाइल रहते
हैं। गांधी परिवार के नजदीकी हैं। राज्यसभा में विपक्ष के नेता हैं। GST बिल पर सरकार के साथ मध्यस्थता करने में
कांग्रेस की ओर से अगुवा नेता रहे। उत्तर प्रदेश का प्रभारी बनने  से पहले ही कांग्रेस में उनकी बढ़ती अहमियत का
संकेत मिला है। अब GST
बिल के राज्यसभा में पास
होने के बाद दूसरे मोर्चों पर भी आजाद की अहमियत बढ़ सकती है।
पी चिदंबरम- पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने राज्यसभा में
GST बिल मंजूर होने के पहले आम जनता तक ये संदेश
पहुंचाने की काफी हद तक सफल कोशिश की कि कांग्रेस GST के विरोध में कभी नहीं रही। चिदंबरम ने सफलतापूर्वक ये बताया कि कांग्रेस की
वजह से GST बिल में क्या-क्या जोड़ा-घटाया गया। तमिलनाडु
प्रदेश कांग्रेस कमेटी का अध्यक्ष बनने की कोशिश में राहुल गांधी के अड़ंगा लगाने
वाली खबरों के बीच GST
बिल पर चिदंबरम की
महत्वपूर्ण भूमिका से फिर से दिल्ली के पावर कॉरीडोर में वापसी हुई।
आनंद शर्मा- राज्यसभा में विपक्ष के उपनेता के तौर पर आनंद
शर्मा ने GST बिल पर कांग्रेस का पक्ष तो रखा ही, साथ ही
सरकार को कई बार उलझन में भी डाला। आनंद शर्मा का पूरा जोर इसी बात पर रहा कि
सरकार ये माने कि GST
बिल में कांग्रेस की
महत्वपूर्ण भूमिका रही है। और माना जा सकता है आनंद शर्मा काफी हद तक सफल रहे।
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