महात्मा गांधी के जीवन/व्यक्तित्व के इतने पहलू हैं कि, किसी एक पहलू को लेकर उनसे बेइन्तहा मोहब्बत कर लीजिए और हो सकता है, कुछ के आधार पर नफरत भी और कुछ के आधार धार्मिक, कुछ के आधार पर अधर्मी और जाने क्या-क्या … इसीलिए गांधी जी पर बात करते, उन्हें याद करते अतिवादी होने वाले हाथी की पूंछ या पैर पकड़े खड़े दिखते हैं। गांधी को पढ़िए, समझिए। नजरिया साफ करने की दवा साबित होगी। गांधी जी ने जब आश्रम गुजरात में बनाया तो, सवाल स्वाभाविक था कि, गुजराती होने की वजह से गुजरात में आश्रम तो, क्या गांधी जी की दृष्टि संकुचित थी। इसका जवाब उन्होंने खुद दिया है और यही हम सब अगर कर सकें कि, अपने आसपास के लिए कुछ करने/अपनी जमीन से जुड़ने का काम कर सकें तो, जाने कितनी मुश्किलें हल हों जाएं। गांधी जी हर तरह का जीवन जीने, सम्मानित/अपमानित होने के बाद स्वयं प्रेरणा/संघर्ष/सिद्धि से। इसीलिए गांधी जी का जीवन अपने आपमें जीवन व्यवहार की पूरी किताब है। एक ऐसी किताब जिसे पढ़कर कोई भी अपने जीवन में सुधार के रास्ते पर बढ़ सकता है। ठोकर खाने से बच सकता है। सिर्फ गांधी और गोडसे की बहस में पड़े लोगों को न गांधी को समझने/मानने की इच्छा है और न गोडसे को। ऐसे लोग सिर्फ एक दूसरे को निपटाने के लिए गांधी और गोडसे को याद करते हैं। इससे कुछ न होने वाला। गांधी जी को समझिए, जीवन सुधरेगा।


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