ये सपने देखने की कीमत,
अपनी जान गंवाकर चुकाना है

ये अपनी जमीन-लोग छोड़कर,
सपने देखने वालों का मर जाना है

ये बेहतर जिन्दगी की तलाश के सामने,
अट्टहास कर मौत का खड़े हो जाना है

ये बड़ा बनने की पहली कोशिश पर,
बड़ी तगड़ी चोट का हो जाना है

ये देश के सबसे चमकदार झूठ के पीछे छिपी,
घुप्प अंधेर सच्चाई का सामने आ जाना है

ये हमारे देश के भ्रष्टाचारी तंत्र का,
ईमानदारी को मुंह चिढ़ाना है

ये भारतीयों के जीवन को,
बस भीड़ समझ लेना है

ये भीड़ में कुचलकर,
सपनों का मर जाना है

ये सरकारों के निकम्मेपन का,
लाशों पर खड़े होकर जांच आयोग बैठाना है

ये सरकारों-बाबुओं की मोटी होती चमड़ी,
पानी होते खून, बिकती आत्मा की घिनौनी नुमाइश हो जाना है

ये मुम्बई के एलफिन्सटन रोड स्टेशन पर,
देश के हर सपने की सांस का रुक जाना है