नई दिल्ली स्थित प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में प्रेस कांफ्रेंस करते संघ के सह सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले

केरल में 12 महीने में 13 संघ कार्यकर्ताओं की हत्या हो चुकी है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने ये बात दिल्ली में मीडिया को बताई। शायद ये पहली बार है, कम से कम हाल के वर्षों में तो निश्चित तौर पर, कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने दिल्ली के प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में प्रेंस कांफ्रेंस की हो। लम्बे समय बाद मैंने प्रेस क्लब की किसी प्रेस कांफ्रेंस के लिए इतने पत्रकारों को जुटे देखा। पूरा हॉल खचाखच भरा था। हॉल के बाहर भी पत्रकारों की कतार थी। दत्ता जी ने बताया कि किस तरह से सीपीएम की सरकार आने के बाद संघ कार्यकर्ताओं की हत्याएं बढ़ गई हैं। हाल में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के बस्ती कार्यवाह एस एल राजेश की हत्या वामपन्थियों ने की है। उन्होंने कहाकि 1969 से ही सीपीएम वहां संघ कार्यकर्ताओं की हत्या कर रहा है। उन्होंने बताया कि जब आपातकाल के दौरान कई सीपीएम कार्यकर्ता संघ की ओर आ रहे थे, ऐसे लोगों की भी हत्याएं हुई हैं। होसबाले ने कहाकि, ये भ्रम फैलाया जा रहा है कि ये सीपीएम और संघ की लड़ाई है। ये पूरी तरह गलत है। सीपीएम के लोगों ने कांग्रेस और यहां तक कि नम्बूदरीपाद की सरकार से समर्थन वापस लेने वाले मुस्लिम लीग नेताओं की भी हत्या की है। उन्होंने कहाकि इन हत्याओं की उच्चस्तरीय न्यायिक जांच होनी चाहिए। क्योंकि, केरल की पुलिस भी मार्क्सवादी यूनियन की ही तरह व्यवहार करती है। और जो पुलिस अधिकारी निष्पक्ष जांच की कोशिश करता है, उसे भी दंडित किया जाता है।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने चौंकाने वाली बात बताई कई गांवों को सीपीएम ने पार्टी गांव की तरह चिन्हित किया है। उन गांवों में सीपीएम के अलावा कोई भी और किसी तरह की गतिविधि नहीं चला सकता। ये गांव कन्नूर में हैं। होसबाले ने कहाकि ऐसा तो अंग्रेजों के समय में भी नहीं था। केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन कन्नूर से ही हैं। और उन पर भी पुराना हत्या का मामला है। अब केरल से बाहर तिरुवनन्तपुरम में हत्या हुई है और पूरे राज्य में दहशत का माहौल बनाया जा रहा है। उन्होंने कहाकि एक और जो गम्भीर बात है कि इस्लामिक आतंकवाद के लिए सबसे ज्यादा भर्ती केरल से ही हो रही है और उसमें भी कन्नूर जिले से सबसे ज्यादा।
संघ के सह सरकार्यवाह होसबाले ने कहाकि केरल में सीपीएम सरकार के प्रश्रय में जिस तरह से संघ कार्यकर्ताओं की हत्या कर रही है, वो भयावह है। लोकतंत्र के लिए बेहद खतरनाक। दत्ता जी की प्रेस कांफ्रेंस में सबसे अच्छी बात मुझे ये लगी कि बार-बार पत्रकारों के पूछने पर भी उन्होंने कहाकि हम ये नहीं कह रहे कि केरल में राष्ट्रपति शासन लगे। लेकिन, केरल की जनता और देश की जनता ही ये कहने लगे, तो राष्ट्रपति महोदय को जरूर इस पर विचार करना चाहिए। उन्होंने कहाकि वामपन्थी बात ही नहीं करना चाहते। अपने विद्यार्थी परिषद के दिनों का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि किस तरह से केरल में सभी छात्र संगठनों को एक साथ लाने की कोशिश को वामपन्थी छात्र संगठनों ने विफल कर दिया था। एक दूसरा वाकया उन्होंने संघ के कार्यक्रम में वहां के वामपन्थी मेयर को मुख्य अतिथि बनाने का बताया। इसके बाद सीपीएम ने मेयर को पार्टी से ही निकाल दिया। दुनिया में खुद को सबसे खुले विचारों का घोषित नम्बरदार बताने वाले वामपन्थी बात वहीं तक करते दिखते हैं, जहां उनकी बात ही लागू होना तय हो। जिस तरह से सीपीएम केरल में हत्याएं कर रहा है, उससे लग रहा है कि केरल में भी वामपन्थ से जनता ऊब रही है।