राजनीति

सबका सपना मनी-मनी, लेकिन कितना?

अब पैसे का कोई मतलब ही नहीं रहा। पैसा बढ़ना बस प्रतीकों के तौर पर इस्तेमाल करने लायक शब्द रह गया है। पैसे क्या रुपए का भी कोई मतलब नहीं रह गया है। खासकर तब जब इसी देश में कुछ लोग ऐसे भी हैं जो, हर मिनट चालीस लाख रुपए Read more…

By Harsh, ago
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क्या अखबारों में एक ब्लॉगर का कॉलम पूरे ब्लॉग जगत की तरक्की माना जा सकता है?

प्रिंट से टीवी- टीवी से इंटरनेट- इंटरनेट से फिर प्रिंट में। ब्लॉगिंग संसार में कुछ ऐसी ही धारा बह रही है। हिंदी ब्लॉग जगत के मंजे खिलाड़ी आजकल किसी न किसी पत्रिका-अखबार में ब्लॉग पर कुछ न कुछ लिख रहे हैं। कादंबिनी में बालेंदु शर्मा का ब्लॉग जगत की हलचल Read more…

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बाप-बेटे ने मिलकर बीजेपी की बैंड बजा दी

भारतीय राजनीति से ज्यादा अवसरवाद शायद ही कहीं और देखने को मिलेगा। अवसरवाद इतना कि लेफ्ट पार्टियां कांग्रेस को धमकाते-धमकाते यूपीए सरकार को महीने-महीने भर की मोहलत देती रहती हैं। और, अवसरवाद ऐसा भी कि कर्नाटक में सत्ता की वरमाला जब बीजेपी के येदुरप्पा के गले में डालने का मौका Read more…

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हम आदिवासी युग में लौट रहे हैं?

अंग्रेज जब हमें आजाद करके गए तो, पूरी दुनिया में उन्होंने भारत की छवि एक ऐसे देश की बनाई जो, बाबा-ओझा-जादू-टोना-नाग-नागिन का देश था। आजादी के बाद भारत ने तेज तरक्की की। दुनिया में भारत से निकले दिमाग का लोहा माना जाने लगा। अंग्रेजों को हम भारतीयों ने उनकी अंग्रेजी Read more…

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तारीख पर तारीख लेकिन, कब तक?

सभी टीवी चैनलों पर एक विज्ञापन आजकल खूब चल रहा है। किसी मामले में आरोपी (सजा सुनाए जाने तक अभियुक्त नहीं कह सकते) को पेश किया जाता है। और, सरकारी वकील के कुछ बोलने से पहले ही बचाव पक्ष का वकील खड़ा होकर कहता है कि गलती बैल की है। Read more…

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पतियों औकात में आ जाओ, पत्नियां पीट रही हैं!

पति पिट रहे हैं। सरे आम पिट रहे हैं। चौराहे पर पिट रहे हैं। शादी के मंडप में पिट रहे हैं। जयमाल के स्टेज पर पहुंचते-पहुंचते पिट रहे हैं। अपने ही बच्चे के सामने पिट रहे हैं। पत्नियां पीट रही हैं। पत्नियों के साथ वो साले भी पीट रहे हैं Read more…

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आस्था पर हमले के बिना भी तो बात बन सकती है

राम का अस्तित्व था या नहीं, इसे जानने का इन दिनों भारत में महाअभियान चल रहा है। राम को भगवान मानने वाले और उनके अस्तित्व को ही नकारने वाले, दोनों ही जल्दी से जल्दी राम के होने न होने का तर्क खोज रहे हैं। और, जिससे जितना कुछ बन पड़ Read more…

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ज्यादा सम्मान मिलने का खामियाजा है भारतीय टीम की बुरी हार

भारत कोच्चि वनडे ऑस्ट्रेलिया से 84 रनों से हार गया। धोनी के सारे धुरंधर फ्लॉप हो गए। नए-पुराने सारे खिलाड़ी फुस्स हो गए। आज धोनी को एक कप्तानी पारी खेलने की जरूरत थी। लेकिन, खुद धोनी भी वो नहीं कर पाए। हां, धोनी के धुरंधर मैदान पर गुस्से में इतने Read more…

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हम 100 मीटर की रेस में गोल्ड मेडल क्यों नहीं ला सकते ?

जब ओलंपिक खेलों में दुनिया के खिलाड़ियों को लंबी-लंबी, मजबूत टांगों पर गोल्ड मेडल की तरफ लपकते हुए देखता हूं तो, हमेशा लगता है कि हमारे खिलाड़ी इन खेलों में चैंपियन क्यों नहीं हो सकते। बार-बार दुनिया के तर्क-कुतर्क आते रहते हैं। एक बड़ा सुंदर कुतर्क है कि वहां के Read more…

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बेशर्मी की हदें टूट गईं मुलायम राज में

उत्तर प्रदेश में जिस्म बेचकर सिपाही की नौकरी मिली। ये सब उस समय हुआ जब मुलायम सिंह यादव उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री थे। पुलिस भर्ती घोटाले की जांच में अब तक का ये सबसे चौंकाने वाला और शर्मनाक तथ्य सामने आया है। मामले के जांच अधिकारी शैलजाकांत मिश्रा पत्रकारों को Read more…

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