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सरकारी आंकड़ों से बेहतर रहेगी देश की तरक्की की रफ्तार

केंद्रीय सांख्यिकी संस्थान के आंकड़े आने के बाद फिर से इस बात पर चर्चा तेज हो गई है कि, क्या सरकार ने नोटबन्दी और जीएसटी का फैसला एक साथ लेकर बड़ी गलती कर दी है। केंद्रीय सांख्यिकी संस्थान के आंकड़े में 2017-18 के लिए जीडीपी ग्रोथ 6.5 प्रतिशत रहने का Read more…

By Harsh, ago
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भाजपा के लिए “शहरी पार्टी छवि” से मुक्त होना क्यों जरूरी है ?

असल विकास तब जब, किसान खेत में हंसता और बाजार दरवाजे पर इंतजार करता दिखे 4 लड़कों ने मिलकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के लिए उनके घर में बड़ी मुसीबत खड़ी कर दी थी। लेकिन, 4 शहरों ने मोदी-शाह की जमीन बचा Read more…

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22 साल के बदलाव को बदलने को तैयार नहीं हैं गुजराती

किसी राज्य में एक पार्टी की सरकार के खिलाफ एक कार्यकाल के बाद ही जिस तरह से सत्ता विरोधी रुझान हो जाता है, उसमें 22 साल से एक ही पार्टी की सरकार के खिलाफ माहौल आसानी से बनता दिख जाता है। गुजरात का चुनावी माहौल कुछ ऐसा ही है। और, Read more…

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शान्तनु भौमिक की हत्या की सीबीआई जांच क्यों नहीं चाहते माणिक सरकार ?

त्रिपुरा के नौजवान पत्रकार शान्तनु भौमिक की हत्या के 2 महीने बीत गए हैं। लेकिन, शान्तनु की हत्या के अपराधियों को अभी तक पकड़ा नहीं जा सका है। शान्तनु त्रिपुरा की जनजातीय पार्टी आईपीएफटी के प्रदर्शन की रिपोर्टिंग कर रहे थे। उस दौरान सीपीएम और आईपीएफटी के कार्यकर्ताओं के बीच Read more…

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पत्रकारों से दीपावली मंगल मिलन में मोदी का राहुल गांधी पर बड़ा हमला

इस बात की चर्चा जब भी होती है कि कांग्रेस इस तरह से देश से क्यों गायब होती गई, तो उसमें ढेर सारी वजहों के ऊपर एक सबसे बड़ी वजह कोई भी बता देगा कि कांग्रेस में आंतरिक लोकतंत्र नहीं है। कांग्रेस एक परिवार की पार्टी बन गई, यही कांग्रेस Read more…

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अर्थव्यवस्था क्या सचमुच इतने बुरे दौर में है?

यशवन्त सिन्हा ने कहाकि अर्थव्यवस्था बुरे दौर में है। जयन्त सिन्हा ने कहाकि अर्थव्यवस्था अच्छे दौर में है। खैर, अर्थव्यवस्था का अच्छा-बुरा होना बाप-बेटे की राय भर से तय नहीं होने वाला। लेकिन, यह सवाल बड़ा हो गया है। नोटबन्दी का फैसला सही है क्या? उसका परिणाम अर्थव्यवस्था के लिए Read more…

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कांग्रेस को नया नेता खोजने पर जोर देना चाहिए

कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के साथ निजी तौर पर मेरी बड़ी सहानुभूति है। और इस सहानुभूति की सबसे बड़ी वजह यह है कि निजी तौर पर राहुल गांधी मुझे भले आदमी नजर आते हैं। लेकिन, मुश्किल यह है कि राजनीतिक नेतृत्व के लिए सिर्फ भला आदमी होना पर्याप्त योग्यता नहीं Read more…

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पूरे नोट लौट आने का मतलब नोटबन्दी फेल होना नहीं है !

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के नोटों के आंकड़े ने नोटबन्दी के फैसले के खिलाफ पहले दिन से तर्कों की धार तेज कर रहे लोगों को और धारदार तर्क दे दिया है। एक पंक्ति में महीनों की नोटबन्दी की प्रक्रिया को देश और अर्थव्यवस्था के लिए नुकसानदेह बता दिया गया। उस Read more…

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हत्या में सम्मान की राजनीति की उस्ताद कांग्रेस

गौरी लंकेश को कर्नाटक सरकार ने पूरे राजकीय सम्मान के साथ अन्तिम विदाई दी। गौरी लंकेश को राजकीय सम्मान दिया गया और सलामी दी गई। इस तरह की विदाई आमतौर पर शहीद को दी जाती है। भारतीय इतिहास में किसी पत्रकार को हत्या के बाद इस तरह का सम्मान दिया Read more…

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‘कृष्णा’ के दौर में भी ‘कृष्ण’ बने रहना मामूली बात नहीं

रामनाथ कोविंद देश के 14वें राष्ट्रपति हो गए। आज ‘राम’नाथ की ही चर्चा का समय है। लेकिन, इस समय मैं ‘कृष्ण’ की बात कर रहा हूं। हालांकि, मैं कृष्ण भगवान की चर्चा मैं कतई नहीं करने जा रहा हूं कि कैसे कृष्ण इस्कॉन और अग्रेजों की संगत में पहुंचकर कृष्णा Read more…

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