बतंगड़ ब्लॉग

मुम्बईकरों की मजबूरी को जिन्दादिली बताने की घिनौनी सरकारी नीति

मुम्बई लोकल के एलफिन्सटन रोड रेलवे स्टेशन पर हुई भगदड़ में लोगों के मारे जाने के बाद मुम्बई की बुनियादी सुविधाओं पर चर्चा हो रही है। हो सकता है कि कल सुबह से मीडिया लेकर बुद्धिजीवी और यहां तक कि सरकार में बैठे लोग भी बताने लगें कि मुम्बई के Read more…

By Harsh, ago
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भीड़ में कुचलकर सपनों का मर जाना

ये सपने देखने की कीमत, अपनी जान गंवाकर चुकाना है ये अपनी जमीन-लोग छोड़कर, सपने देखने वालों का मर जाना है ये बेहतर जिन्दगी की तलाश के सामने, अट्टहास कर मौत का खड़े हो जाना है ये बड़ा बनने की पहली कोशिश पर, बड़ी तगड़ी चोट का हो जाना है Read more…

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अर्थव्यवस्था क्या सचमुच इतने बुरे दौर में है?

यशवन्त सिन्हा ने कहाकि अर्थव्यवस्था बुरे दौर में है। जयन्त सिन्हा ने कहाकि अर्थव्यवस्था अच्छे दौर में है। खैर, अर्थव्यवस्था का अच्छा-बुरा होना बाप-बेटे की राय भर से तय नहीं होने वाला। लेकिन, यह सवाल बड़ा हो गया है। नोटबन्दी का फैसला सही है क्या? उसका परिणाम अर्थव्यवस्था के लिए Read more…

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अखबार में

कांग्रेस को नया नेता खोजने पर जोर देना चाहिए

कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के साथ निजी तौर पर मेरी बड़ी सहानुभूति है। और इस सहानुभूति की सबसे बड़ी वजह यह है कि निजी तौर पर राहुल गांधी मुझे भले आदमी नजर आते हैं। लेकिन, मुश्किल यह है कि राजनीतिक नेतृत्व के लिए सिर्फ भला आदमी होना पर्याप्त योग्यता नहीं Read more…

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मृणाल पांडे की जमकर आलोचना क्यों जरूरी ?

जानी मानी लेखिका, हिन्दुस्तान अखबार की पूर्व प्रधान सम्पादक और प्रसार भारती की पूर्व चेयरमैन मृणाल पांडे ने ट्विटर पर ऐसा लिख दिया है जिसे, मृणाल पांडे के समर्थन में उतरे लोग आलोचना कह रहे हैं। लेकिन, दरअसल उनका लिखा हमारे समाज के बुद्धिजीवियों की गिरावट का बड़ा संकेत है। Read more…

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अच्छी हिन्दी न आने का अपराधबोध !

बच्चा अंग्रेजी माध्यम स्कूल में पढ़ता है या नहीं? अब यह सवाल नहीं रहा, एक सामान्य जानकारी भर रह गई है। हां, जिसका बच्चा अभी भी अंग्रेजी माध्यम स्कूल में नहीं पढ़ रहा है, ऐसे लोग अब समाज में अजीब सी दृष्टि से देखे जाते हैं। अंग्रेजी कितनी आती है, Read more…

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अखबार में

पूरे नोट लौट आने का मतलब नोटबन्दी फेल होना नहीं है !

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के नोटों के आंकड़े ने नोटबन्दी के फैसले के खिलाफ पहले दिन से तर्कों की धार तेज कर रहे लोगों को और धारदार तर्क दे दिया है। एक पंक्ति में महीनों की नोटबन्दी की प्रक्रिया को देश और अर्थव्यवस्था के लिए नुकसानदेह बता दिया गया। उस Read more…

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सन्देह का दायरा

JNUSU में जीत से वामपन्थियों का उत्साह हिलोरे ले रहा है। आसमान पर हैं वामपन्थी, इस समय। वामपन्थियों की राजनीति एक खास तरह की है। उस राजनीति में दूसरे पर सन्देह बढ़ाकर अपना भरोसा बढ़ाया जाता है। गौरी लंकेश की हत्या और अब जेएनयू में छात्रसंघ चुनाव जीतकर वामपन्थी फिर Read more…

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गौरी लंकेश की हत्या के बाद मीडिया की स्थिति पर ऑस्ट्रेलिया के एसबीएस रेडियो से बातचीत

बैंगलुरू में पत्रकार गौरी लंकेश की हत्या सिर्फ भारत के लिए ही नहीं, दुनिया के लिए चर्चा और चिन्ता का विषय बना है। लेकिन, इससे दुनिया में भारतीय पत्रकारों के वैचारिक विभाजन पर भी सवाल खड़ा हो रहा है। ऑस्ट्रेलिया के #SBSRadio से मेरी बातचीत

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हत्या में सम्मान की राजनीति की उस्ताद कांग्रेस

गौरी लंकेश को कर्नाटक सरकार ने पूरे राजकीय सम्मान के साथ अन्तिम विदाई दी। गौरी लंकेश को राजकीय सम्मान दिया गया और सलामी दी गई। इस तरह की विदाई आमतौर पर शहीद को दी जाती है। भारतीय इतिहास में किसी पत्रकार को हत्या के बाद इस तरह का सम्मान दिया Read more…

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