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भारत के लिए OBOR बेकार, EWHW पर ध्यान दो सरकार !

भारत सरकार के लिए ये फैसला लेना इतना आसान नहीं था। लेकिन, सरकार की इस बात के लिए तारीफ की जानी चाहिए कि भारत ने चीन की अतिमहत्वाकांक्षी OBOR योजना से खुद को पूरी तरह बाहर ही रखा है। कठिन फैसला इसलिए भी क्योंकि, भारत के 2 सम्वेदनशील पड़ोसी देशों Read more…

By Harsh, ago
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चीन की इस योजना का पाकिस्तान में जमकर विरोध

OBOR का सिर्फ भारत ने विरोध किया। और ये भारत के लिए ठीक नहीं है। भारत सहित दुनिया भर की मीडिया में जानकारों को पढ़कर पहली नजर में ऐसा ही लगता है। लेकिन, चीन की इस अतिमहत्वाकांक्षी परियोजना को लेकर उसमें शामिल हो रहे देशों की राय भी अच्छी नहीं Read more…

By Harsh, ago
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रुपये की इतनी औकात बढ़ाने वाले की औकात जान लीजिए !

28 जुलाई 2014 को दिल्ली विश्वविद्यालय के लॉ कॉलेज में हरीश साल्वे मुख्य अतिथि के तौर पर थे। कानून की पढ़ाई कर रहे बच्चों से उन्होंने एक बात कही कि “हमारी पीढ़ी के वकीलों ने इस पेशे की इज्जत मिट्टी में मिला दी है”। वकीलों की इज्जत मिट्टी में मिलाने Read more…

By Harsh, ago
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अनिल माधव दवे की अन्तिम इच्छा

अनिल माधव दवे जी से 2 बार मिलना हुआ। पहली बार भोपाल की मीडिया चौपाल में और दूसरी बार #IIMC में हुई मीडिया चौपाल में। उनसे मिलकर, बातचीत करके ही समझ में आ गया कि वो कितने सरल, सहज हैं, साथ ही पर्यावरण, पानी के लिए गजब के सम्वेदनशील। खुद प्रधानमंत्री ने Read more…

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अखबार में

AAP, AGP की तरह दिखने लगी है !

दिल्ली को देश की राजधानी होने से खास सहूलियत मिली हुई है। यहां सब खास होते हैं। कमला ये कि उस खास दिल्ली में आम आदमी की बात करके एक पार्टी सत्ता में पहुंच गई। सत्ता में यूं ही नहीं पहुंच गई, सत्ता में वो आम आदमी पार्टी नाम रखकर Read more…

By Harsh, ago
अखबार में

उद्यमियों से तय होगा नए भारत का भविष्य

बजट 2017 कई मायने में बड़ा अलग सा रहा है। वित्त मंत्री अरुण जेटली के पूरे बजट भाषण को देखने पर ज्यादातर समय ये नॉन इवेंट जैसा ही दिखता रहा। क्योंकि, पूरे बजट में कोई भी ऐसा एलान नहीं हुआ। जो किसी खास वर्ग को अलग से कुछ देने की Read more…

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लतियाना तो बनता है !

पूरा बॉलीवुड अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के लिए उठ खड़ा हुआ है। संजय लीला भंसाली को लतियाए जाने के बाद ये स्वतंत्रता बोध हुआ है। फ़िल्म, कहानी समाज में कोई भी सन्देश देने का सबसे प्रभावी माध्यम है। इसी में टीवी धारावाहिक भी जोड़िए। कब किसी फ़िल्म में हिन्दू समाज की Read more…

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