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गुजरात में कांग्रेस विपक्ष की नेता न बन पाई

गुजरात विधानसभा चुनाव होने जा रहे हैं। राहुल गांधी कांग्रेस के लिए जोर शोर से प्रचार में जुटे हैं। हालांकि, शंकरसिंह वाघेला के पार्टी छोड़ने के बाद से असली मुश्किल यही हो गई है कि कांग्रेस के पास कोई नेता ही नहीं है और उससे भी दुखद यह है कि Read more…

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विकास को पागल करके कांग्रेस गुजरात जीतेगी ?

जिस गुजरात की पहचान ही विकास वाले राज्य के अगुवा के तौर पर होती है। वहां से विकास के पागल हो जाने की खबर आ रही है। कम से कम कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी लगातार यह गुजरात के लोगों को ही बता रहे हैं। इसका क्या गुजरात चुनाव पर क्या Read more…

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मोदी जी, भविष्य के लिए वर्तमान ठीक होना जरूरी है

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज के दिन आर्थिक मोर्चे पर सरकार की आलोचना करने वालों का यह कहकर जवाब दिया है कि वे अपना वर्तमान ठीक करने के लिए देश का भविष्य नहीं बिगाड़ सकते। मेरा मोदी जी से निजी निवेदन है कि लम्बे समय के फायदे की आर्थिक नीतियां Read more…

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यह मीडिया का ट्रोल काल है !

राजनीति हमेशा से लठैतों के साथ होती रही है। बड़े अच्छे नेताओं के भी लठैत होते रहे हैं। लेकिन, मीडिया में लठैत युग आ जाएगा, इसकी कल्पना कम ही थी। क्षेत्रीय स्तर पर अखबारों के कुछ सम्पादकों के पास लठैत टाइप के पत्रकार होते रहे हैं। लेकिन, राष्ट्रीय मीडिया में Read more…

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भीड़ में कुचलकर सपनों का मर जाना

ये सपने देखने की कीमत, अपनी जान गंवाकर चुकाना है ये अपनी जमीन-लोग छोड़कर, सपने देखने वालों का मर जाना है ये बेहतर जिन्दगी की तलाश के सामने, अट्टहास कर मौत का खड़े हो जाना है ये बड़ा बनने की पहली कोशिश पर, बड़ी तगड़ी चोट का हो जाना है Read more…

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राजनीति

ममता की मुस्लिम राजनीति से मुसलमानों का कितना भला

ममता बनर्जी को पश्चिम बंगाल की जनता लगातार जनादेश दे रही है। लोकतंत्र में सबसे ज्यादा महत्व भी इसी बात का है। लेकिन, जनादेश पाने के बाद सत्ता चलाने वाले नेता का व्यवहार भी लोकतंत्र में अत महत्वपूर्ण होता है। क्योंकि, वही आगे की जमीन तैयार करता है। ममता बनर्जी Read more…

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मृणाल पांडे की जमकर आलोचना क्यों जरूरी ?

जानी मानी लेखिका, हिन्दुस्तान अखबार की पूर्व प्रधान सम्पादक और प्रसार भारती की पूर्व चेयरमैन मृणाल पांडे ने ट्विटर पर ऐसा लिख दिया है जिसे, मृणाल पांडे के समर्थन में उतरे लोग आलोचना कह रहे हैं। लेकिन, दरअसल उनका लिखा हमारे समाज के बुद्धिजीवियों की गिरावट का बड़ा संकेत है। Read more…

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बच्चों का स्वामी विवेकानन्द से परिचय का समय

स्वामी विवेकानन्द पर शायद ही कोई विवाद कर सके, बावजूद इसके स्वामी जी के जीवन चरित्र के बारे में हिन्दुस्तान के बच्चों-बड़ों का खास ज्ञान नहीं है। सिवाय इसके कि उन्होंने शिकागो भाषण दिया था और भगवाधारी संन्यासी थे। शायद भगवाधारी संन्यासी होने की वजह से लम्बे समय तक सरकारों Read more…

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राजनीति

बुद्धिजीवी कौन है?

केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद के बुद्धिजीवियों को भाजपा विरोधी बताने के बाद ये सवाल चर्चा में आ गया है कि क्या बुद्धिजीवी एक खास विचार के ही हैं। मेरी नजर में बुद्धिजीवी की बड़ी सीधी सी परिभाषा है।

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स्वतंत्र पत्रकारों के लिए जगह कहां बची है?

केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने बुद्धिजीवियों पर ये आरोप लगाकर नई बहस छेड़ दी है कि बुद्धिजीवी बीजेपी के खिलाफ हैं। मेरा मानना है कि दरअसल लम्बे समय से पत्रकार और बुद्धिजीवी होने के खांचे में स्वतंत्र लोगों के लिए बहुत कम जगह छोड़ी गई, उसी का ये नतीजा है।

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