नई दिल्ली में मकर संक्रान्ति के मौके पर NCDEX Options की शुरुआत करते वित्तमंत्री

आर्थिक समीक्षा के बाद एक बात साफ हो गई है कि, सबसे ज्यादा काम करने की जरूरत खेती-किसान-गांव पर ही है। यह भी जाहिर तथ्य है कि, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आते ही सबसे बड़ा काम जो किया है वो है, किसानों की आमदनी दोगुना करने का लक्ष्य तय करना। हालांकि, इस लक्ष्य को हासिल करने में कितनी सफलता मिल सकी है, इस पर अभी बड़े प्रश्नचिन्ह हैं। लेकिन, लम्बे समय से छोटी कक्षा के निबन्ध से लेकर नेताओं के भाषण तक कृषि प्रधान देश भारत में पहली बार किसी प्रधानमंत्री ने किसानों की आमदनी बढ़ाने का लक्ष्य तय करने का साहस किया। सरकार किसानों को लेकर गम्भीर है, यह बात बजट में हर बार जाहिर भी होती रही है। 14 जनवरी को इसकी और पुष्टि हुई है। मकर संक्रांति के दिन एग्री कमोडिटी एक्सचेंज एनसीडीईएक्स ने देश में पहली बार ऑप्शंस की शुरुआत की। इसे शुरू करते हुए वित्त मंत्री अरुण जेटली ने स्पष्ट कहाकि, किसानों ने देश को देने में, देश के लोगों के लिए सबकुछ करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। लेकिन, किसानों को उनकी हिस्सेदारी नहीं मिल सकी है और, अगर किसानों को उनका हिस्सा नहीं मिल पाता है तो, देश की तरक्की की रफ्तार यानी जीडीपी ग्रोथ को सार्थक नहीं माना जा सकता। एनसीडीईएक्स पर ग्वारसीड में ऑप्शंस की शुरुआत हुई है। इसके जरिए किसान न्यूनतम प्रीमियम देकर अपना अधिकतम लाभ सुनिश्चित कर सकता है। इसे किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिहाज से ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है। ऐसे मौके पर वित्त मंत्री का यह कहना कि, किसानों को उनका हिस्सा नहीं मिलता है तो, जीडीपी ग्रोथ का कोई मतलब नहीं है, जाहिर करता है कि, आने वाला बजट पूरी तरह से किसानों पर केंद्रित होगा। देश के अलग-अलग हिस्सों से किसानों के आन्दोलित होने की खबरों के बीच सभी यह मान रहे हैं कि, आगामी बजट किसान केंद्रित होगा। लेकिन, किसान केंद्रित बजट होने का मतलब क्या होगा, यह मैं आपको समझाने की कोशिश करता हूं।

2015-16 के बजट को पूरी तरह से खेत-किसान-गांव पर केंद्रित बजट कहा गया। और, इसके पीछे मजबूत वजहें थीं। वैसे, तो हर सरकार पर शहरों और शहरों में रहने वालों को दी जाने वाली सुविधाओं पर ज्यादा खर्च करने का दबाव रहता है। लेकिन, पहली बार किसी सरकार ने सीधे तौर पर गांवो में शहरों से ज्यादा सुविधा देने का एलान बजट में किया था। 2015-16 के बजट में शहरों में 2 करोड़ घर बनाने और गांवों में 4 करोड़ घर बनाने का एलान किया गया। इसी बजट में सबके लिए 24 घंटे बिजली, साफ पानी, शौचालय और सड़कों से जोड़ने का लक्ष्य भी तय किया गया। जाहिर है, इतना बड़ा लक्ष्य अगले साल तक नहीं पूरा किया जा सकता। इसीलिए 2020-22 तक के लिए यह लक्ष्य तय किए गए। 2015 में ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पटना में दीनदयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना की शुरुआत की थी। इस योजना के तहत अगले 1000 दिनों में सभी गांवों में तक बिजली पहुंचाने का लक्ष्य तय किया गया था। योजना की वेबसाइट के मुताबिक, देश के 5,97,464 गावों में से 5,96,168 गावों तक बिजली पहुंचा दी गई है। इसका मतलब हुआ कि, इन गावों तक कम से कम बिजली के खम्भे और तार पहुंच गए हैं। हर घर को बिजली देने की योजना पर सरकार अब काम कर रही है।
2015-16 के बजट में ही सभी गांवों को संचार सुविधा से जोड़ने के मह्त्वाकांक्षी लक्ष्य का भी एलान किया गया था। साथ ही सभी शहरों और गांवों में स्वास्थ्य सुविधा देने का भी लक्ष्य तय किया गया था। खेती के लिए सबसे जरूरी जमीन और पानी पर इसी बजट में जोर दिया गया था। खेती की जमीन का स्वास्थ्य परीक्षण और प्रधानमंत्री ग्राम सिंचाई योजना के तहत मोर क्रॉप पर ड्रॉपर यानी हर बूंद से उपज लेने का लक्ष्य तय किया गया। प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत सूक्ष्म सिंचाई योजना में 5300 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया था। ताजा आंकड़े बता रहे हैं कि, इस य़ोजना के तहत 18 लाख 39 हजार हेक्टेयर जमीन तक सिंचाई की सुविधा पहुंचाई गई। 2015-16 के ही बजट में नाबार्ड के तहत रूरल इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट फंड बनाया गया थथा। इस फंड के लिए 25000 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया था। किसी भी बच्चे के 5 किलोमीटर के दायरे में एक सीनियर सेकेंडरी स्कूल की भी बात इस बजट में की गई थी। जाहिर, शहरों में तो 5 किलोमीटर के दायरे में कई सीनियर सेकेंडरी स्कूल होते हैं, असली समस्या गांवों में हर 5 किलोमीटर के दायरे में ऐसे स्कूलों को खोलना है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत हर गांव तक पक्की सड़क पहुंचाने का लक्ष्य भी इसी बजट में तय किया गया था। इसी बजट में राष्ट्रीय कृषि बाजार योजना के लिए लक्ष्य और प्रावधान तय किया गया था। 2015-16 में खेती-किसान-गांव के लिए तय की गई योजनाएं लगभग अब पटरी पर आ गई हैं। अब इनके परिणाम दिखने और बताने का वक्त आ गया है।

किसानों की आमदनी दोगुना करने में सबसे महत्वपूर्ण राष्ट्रीय कृषि बाजार योजना का तंत्र अब लगभग पटरी पर आ गया है। देश की 470 मंडियों के आपस में जुड़ने के बाद इनके जरिए 11371 टन उपज की खरीद बिक्री की गई है। राष्ट्रीय कृषि बाजार योजना के तहत कुल कारोबार 31424 करोड़ रुपए का रहा है। हालांकि, इस तंत्र के दुरुपयोग की भी शिकायतें आ रही हैं। कई जगहों पर मंडी के कारोबारी किसान से उपज खरीदकर लाते हैं और इसमें एंट्री कर दे रहे हैं। इससे इस योजना के मूल मकसद को चोट पहुंचाई जा रही है। लेकिन, शुरुआती मुश्किलों में इसे माना जा सकता है। कल मिलाकर बजट 2015-16 में तय किए गए लक्ष्यों और खेत-किसान-गांव के लिए किए गए प्रावधान के आधार पर बनाई गई योजनाएं अब दिखने लगी हैं लेकिन, उनका सार्थक परिणाम दिखे और उसका अच्छा असर किसान कि जिन्दगी में बेहतरी करने में मददगार हो, ऐसे बजट की उम्मीद इस बार वित्त मंत्री अरुण जेटली से की जा रही है। बजटीय और बजट के बाहर भी सरकार की योजनाओं से प्रोत्साहित किसान ज्यादा उत्पादन कर रहा है। लेकिन, उसकी उपज की कीमत के साथ मुनाफा मिलना अभी भी दूर की कौड़ी है। अच्छी बात यह है कि, इस मुश्किल को वित्त मंत्री अरुअ जेटली और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अच्छे से समझ रहे हैं। इसीलिए मुझे उम्मीद है कि, ताजा बजट खेत-किसान-गांव पर केंद्रित होगा और बताएगा कि, कैसे किसानों को उनकी उपज की बेहतर कीमत मिल रही है और आगे बेहतर तरीके से मिलेगी।


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