दुनिया के भुक्खड़ देशों में भारत नेता बन गया है। ग्लोबल हंगर इंडेक्स (दुनिया के भुक्खड़ सूचकांक)
पर भारत की हालत इतनी पतली है कि नेपाल, पाकिस्तान भी हमको लंगड़ी मारकर आगे निकल गए हैं। 119 विकासशील देशों (भारत अभी भी विकासशील है) में भारत 96वें नंबर पर है।

भुक्खड़ देशों की सूची में पाकिस्तान हमसे 8 नंबर ऊपर 88वें नंबर पर है। जबकि, नेपाल 92वें पर है। बांग्लादेश के लोगों को भी भारत से ज्यादा खाने-पीने को मिल रहा है। म्यांमार और श्रीलंका जहां के आंतरिक हालात बेहद खराब हैं वो, भी हमसे बहुत आगे हैं। म्यांमार इसी लिस्ट में 68वें और श्रीलंका 69वें नंबर पर है।

इस खबर पर जब मेरी नजर पड़ी, उसी दिन मैं अपने चैनल पर फोर्ब्स मैगजीन की एक खबर उत्साह के साथ चलाकर घर लौटा था। फोर्ब्स मैगजीन की ताजा लिस्ट के मुताबिक, सबसे अमीर सिर्फ 3 भारतीयों की कुल संपत्ति चीन के 40 अमीरों की कुल संपत्ति से बहुत ज्यादा है। भारतीय मूल के 3 अमीर हैं एल एन मित्तल (इनको हम या दुनिया के लोग भारतीयों के साथ क्यों जोड़ते हैं पता नहीं), मुकेश अंबानी और उनके छोटे भाई अनिल अंबानी। इन तीनों की कुल संपत्ति मिलाकर करीब 160 अरब डॉलर है। जबकि, चीन के 40 अमीरों की कुल संपत्ति 120 अरब डॉलर ही है।

मैंने भी अतिउत्साह में उस खबर को अच्छे से चलाया और लिखा 12 चीनियों पर भारी 3 हिंदुस्तानी। लेकिन, जब मैंने भुक्खड़ भारत की ये पहचान मिलाई तो, चीनी ड्रैगन भारतीय हाथी को निगलता नजर आया। चीन ग्लोबल हंगर इंडेक्स में 47वें नंबर पर है। यानी उस लिहाज से अगर भारत में 10 हिंदुस्तानी भूखे सोते होंगे। तो, सिर्फ 1 चीनी ऐसा होगा जिसे खाना नहीं मिलता होगा।

इन आंकड़ों को देखकर ज्यादा चिंता इसलिए भी होती है क्योंकि, ये सर्वे ऐसे लोगों पर किया गया जो, एक डॉलर से भी कम पर पूरा दिन बिता देते हैं। चिदंबरम-मनमोहन की जोड़ी के हर दूसरे दिन देश की तरक्की के भाषण मेरा खून जलाने लगे हैं। भारत की इस भुक्खड़ पहचान ने मेरा सारा जोश ठंडा कर दिया है।


4 Comments

Anonymous · November 17, 2007 at 5:09 pm

यह जन कर तो हमे भी शर्मिंदगी महसूस होने लगी है।

पर्यानाद · November 17, 2007 at 10:19 pm

भुखमरी के कारण इस देश में होने वाली मौतों का कोई रेकार्ड नहीं मिलता क्‍यों कि सरकार कभी मानती ही नहीं है कि कोई भूख से मरा. भुखमरी की समस्‍या इस देश के तथाकथित विकास के मुंह पर करारा तमाचा है.

रजनीश मंगला · November 17, 2007 at 10:26 pm

मित्तल वाकई कितने भारतीय हैं, ये मैं भी जानना चाहता हूँ। एक और बात मेरी समझ में नहीं आती कि भारत की तुलना हर बात पर चीन के साथ क्यों की जाती है। मेरे हिसाब से चीन और भारत में लगभग कुछ भी common नहीं है। चीन हर बात में हम से कहीं आगे है।

Gyandutt Pandey · November 18, 2007 at 2:05 am

मुखमरी शर्मनाक है। पर उसके कारण अमीरी पर शर्म करने की जरूरत नहीं। अमीर अगर बाकी देश को गरीब बनाने पर तुले हों; तब वह निन्दनीय है। पर गरीब तो देश पिछले 60 साल की समाजवादी नीतियों के कारण अधिक बना है।

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