बहस शुरू हुई थी इस बात पर कि कल्याण सिंह के शपथ ग्रहण में जय श्रीराम के नारे लगना क्या ठीक है। या फिर ये संविधान की मूल भावना के खिलाफ है। उस बहस में एक सज्जन ने कहाकि संविधान के खिलाफ कैसे हो सकता है। जब श्रीराम की तस्वीर संविधान की मूल प्रति के पन्ने पर है तो राज्यपाल के शपथ ग्रहण में जय श्रीराम का नारा कैसे गलत हो सकता है। फिर उन सज्जन के पास संविधान की मूल प्रति की कॉपी उपलब्ध होने की जानकारी मिली। तुरंत उनसे कहा गया कि वो कॉपी उपलब्ध कराएं। थोड़ी ही देर में संविधान की मूल प्रति की कॉपी आ गई। उसे देखते ही हम सभी ने उसकी तस्वीरें ले लीं। और उन तस्वीरों को साझा इसलिए कर रहा हूं कि भारतीय संविधान में धर्मनिरपेक्ष होने की बात का मतलब यही था कि सभी धर्मों का सम्मान होगा। सरकार किसी एक धर्म के लिए दूसरे धर्म, पंथ, संप्रदाय के खिलाफ विद्वेष की भावना से काम नहीं करेगी। ये धर्मनिरपेक्ष कब हिंदू आराध्यों के खिलाफ हो गया पता ही नहीं चला। संविधान के पन्ने पर श्रीराम हैं। संविधान के पन्ने पर श्रीकृष्ण हैं। संविधान के पन्ने पर महावीर, बुद्ध भी हैं। और भी बहुत कुछ है। संविधान को तैयार करने वाले सभी विद्वानों की सहमति के दस्तखत भी हैं। कुछ तस्वीरें जो मैंने उतारीं, उसे साझा कर रहा हूं। बहुत से लोग ये बात पहले से जानते होंगे। बहुत से लोग अब भी नहीं मानेंगे।