दीपावली बीत गई। सबने लक्ष्मी पूजन किया। घर की लक्ष्मी की भी इज्जत बढ़ाई। और, घर में ढेर सारी लक्ष्मी आने के लिए तरह-तरह की पूजा की, दीप जलाया, मिठाइयां बांटी। वैसे भी अक्सर भारतीय संस्कृति-संस्कारों में लड़की को मातृशक्ति, देवी, घर की मालकिन कहकर उसे ज्यादा इज्जत देने की कोशिश दिखती रहती है। लेकिन, हर साल तरक्की करता भारत शायद इसका दिखावा ही करता है। दरअसल ज्यादा पढ़ा-लिखा भारत लड़कियों से ज्यादा ही भेदभाव कर रहा है।

वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के ताजा जेंडर गैप इंडेक्स में भारत सबसे नीचे के दस देशों में शामिल है। लड़कियों से भेदभाव के मामले में भारत की स्थिति और खराब हुई है। इस सर्वे में 128 देश शामिल हुए। इसमें भारत 115वें नंबर पर है। जबकि, पिछले साल भारत 98वें नंबर पर था। पिछले साल से इस साल में पढ़े-लिखे लोग तेजी से बढ़े। भारतीयों के घर सुविधाओं बढ़ीं और ज्यादा समृद्धि आई। लेकिन, आर्थिक, शैक्षिक, राजनीतिक और स्वास्थ्य के मामले में लड़कियों के साथ भेदभाव भी बढ़ता गया।

कुछ दिन पहले दिल्ली से एक सर्वे में ये साफ निकलकर आया था कि दक्षिण दिल्ली में सबसे ज्यादा कन्याएं गर्भ में ही मार दी जाती हैं। दक्षिण दिल्ली, सिर्फ दिल्ली का ही नहीं देश का वो इलाका है, जहां लोग ज्यादा पढ़े-लिखे हैं। ज्यादा तरक्की की है। किसी तरह की सुविधाओं की कमी नहीं है। इसके खतरे भी साफ नजर आने लगे हैं।

खैर वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के सर्वे के मुताबिक, लड़कियों को आर्थिक तरक्की यानी रोजगार के मौके देने के मामले में भारत 128 देशों में 122वें नंबर पर चला गया है। इस मामले में भारत से खराब स्थिति सिर्फ ऐसे देशों की है जिनका जिक्र करने का भी मतलब नहीं है। तरक्की के मामले में अक्सर BRIC देशों (ब्राजील, रूस, इंडिया और चीन) की तुलना होती है। लड़कियों को समान मौके देने के मामले में ये देश भारत से बहुत आगे हैं। ब्राजील इसमें 62वें, रूस 16वें और चीन 60वें नंबर पर है।

दीपावली पर लक्ष्मी की पूजा करने वालों को ये समझ में क्यों नहीं आता कि अगर असल लक्ष्मी (लड़कियों) के साथ इसी तरह भेदभाव होता रहा। तो, लक्ष्मी किस बहाने ऐसे लोगों के घर आ पाएंगी। भारतीय शास्त्र और संस्कृति में तो ये भी कहा जाता है कि लक्ष्मी (पत्नी) के साथ की गई पूजा का फल जल्दी और ज्यादा मिलता है। तो, लक्ष्मी को सम्मान (बराबर का दर्जा) तो देना सीखो।


2 Comments

Gyandutt Pandey · November 13, 2007 at 2:28 am

यह भारत का बहुत बड़ा अन्धेरा पक्ष है। और विकास में बहुत बड़ा रोड़ा भी!

मीनाक्षी · November 14, 2007 at 5:08 pm

अन्धेरा छाया चहुँ और , भाग्य पर न चलता ज़ोर ….अपने भारतीय समाज का यह चित्र सबसे अधिक बदरंग है…

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