राहुल
गांधी ने आज लोकसभा में गजब किया। गजब इसलिए कि वो आज ऐसा जागे कि सीधे लोकसभा में
अध्यक्ष के सामने की खाली जगह पर अपनी कुर्सी छोड़कर पहुंच गए। वो दुखी थे कि धर्म
परिवर्तन पर बहस नहीं कराई जा रही है। इतने गुस्से और दुख में आम आदमी क्या करेगा।
और आम आदमी क्या खास आदमी भी क्या करेगा। लोकतंत्र के चौथे खंभे की मदद लेगा।
राहुल गांधी ने भी ली। और लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन पर ढेर सारे आरोप लगा
दिए। आरोप राहुल सुमित्रा महाजन पर लगा रहे थे लेकिन, उनके आरोप के निशाने पर
नरेंद्र मोदी ही रहे।
राहुल
गांधी आज दुखी हैं। गुस्से में हैं। कह रहे हैं कि इस देश में किसी की सुनी नहीं
जा रही। सिर्फ एक आदमी की चल रही है। राहुल गांधी जब गुस्से में हैं, दुखी हैं तो मैं सुखी हूं, हंस रहा हूं। मजा आ रहा है कि लोकतंत्र को मजाक
बना देने वाले परिवार का राजकुमार ऐसे दुखी है। दरअसल उसके मन की नहीं हो रही है।
वरना तो वो प्रधानमंत्री के भी लिखे-पढ़े को फाड़ देता था। बेहूदा कह देता था। इस
प्रधानमंत्री के सामने सचमुच कुछ चल नहीं रहा है। अब तो ये नौटंकी बंद करो राहुल
गांधी। नरेंद्र मोदी तानाशाह होंगे तो देखा जाएगा। अभी तो एक परिवार की तानाशाही गई
है। जनता उसके जश्न में हैं। हम भी।