नरेंद्र
मोदी इस देश के ऐसे नेता साबित हो रहे हैं जो अपनी मूल अवधारणा के खिलाफ हर रोज
धारणा बनाते हैं। और खुद को इस तरह से स्वीकार्य बना चुके हैं कि दूसरे किसी के
मुंह से वही बात सुनने पर उनका समर्थक वर्ग जो बवाल मचा देता, उनके मुंह से वैसी
ही बात सुनकर पक्ष में बवाल मचा रहा होता है। ताजा मामला है जयराम के Temple पर Toilet की प्राथमिकता और नरेंद्र मोदी के शौचालय से पहले देवालय वाले बयान
का। अभी साल भर ही बीता है कि जब जयराम रमेश ने एक कार्यक्रम में ये कहा था कि इस
देश को मंदिरों की नहीं टॉयलेट्स की जरूरत है। संदर्भ महिलाओं के स्वास्थ्य
सुरक्षा का था। सही बयान था। संदर्भ भी सही था। लेकिन, बड़ा बवाल हो गया था।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और विश्व हिंदू परिषद ने तो जमकर लानत भेजी थी जयराम रमेश
को। बीजेपी भी पीछे नहीं थी। बड़े गंभीर स्वर में बीजेपी की ओर से कहा गया कि
धार्मिक भावना के साथ इसे जोड़ना गलत है। इससे भावनाएं आहत हुई हैं। इस बार ऐसा ही
मिलता जुलता बयान भारतीय जनता पार्टी के प्रधानमंत्री पद के लिए घोषित उम्मीदवार
नरेंद्र मोदी की तरफ से आया है। जाहिर है भारतीय जनता पार्टी तो ये साहस कर नहीं
सकती कि अपने घोषित प्रधानमंत्री पद के दावेदार के बयान पर उलट बयानबाजी करे।
लेकिन, संघ परिवार के दूसरे अहम सदस्य विश्व हिंदू परिषद को भला कौन रोक सकता है।
विश्व हिंदू परिषद के अंतर्राष्ट्रीय कार्याध्यक्ष प्रवीण तोगड़िया ने मोदी के
बयान को गलत बताया है। तोगड़िया ने कहा कि नरेंद्र मोदी का बयान भौचक्का कर देनेवाला और झटका देने वाला है। अब प्रवीण तोगड़िया नरेंद्र मोदी के घर के बाहर
प्रदर्शन करने का साहस तो नहीं जुटा सकते हैं। जो विश्व हिंदू परिषद ने तब जुटाया
था जब जयराम रमेश ने कहा था कि महिलाओं के लिए मंदिर की जगह टॉयलेट जरूरी है।
डॉक्टर
प्रवीण तोगड़िया वाली विश्व हिंदू परिषद का नरेंद्र मोदी से विरोध जगजाहिर है। और
बड़ी मुश्किल से अशोक सिंघल के तगड़े हस्तक्षेप के बाद प्रवीण तोगड़िया ने
प्रधानमंत्री पद के लिए नरेंद्र मोदी के खिलाफ विरोध का स्वर बंद किया था। दरअसल
तोगड़िया और मोदी का संघर्ष गुजरात से ही चल रहा है। जहां नरेंद्र मोदी ने
गवर्नेंस पर विश्व हिंदू परिषद की तय मान्यताओं की परवाह नहीं की। नरेंद्र मोदी अब
इसका उदाहरण भी देते हैं। नरेंद्र मोदी ने दिल्ली के एक कार्यक्रम में इस बात को
सीना ठोंककर बताया था कि अहमदाबाद नगर निगम चुनाव के ठीक पहले उनके सामने कितना
बड़ा धर्म संकट खड़ा हो गया था। वो धर्मसंकट था अहमदाबाद की सड़कों पर जहां तहां
रास्ता अवरुद्ध करते देवालयों का। इसमें सभी धर्मस्थान शामिल थे। जाहिर सबसे
ज्यादा हिंदू और मुस्लिम धर्म स्थान यानी मंदिर और मस्जिद। मोदी ने बताया कि निगम
के चुनाव स्थानीय मुद्दों, भावनाओं पर होते हैं इसलिए पूरी पार्टी और संघ परिवार
किसी भी कीमत पर धर्म स्थानों का अतिक्रमण हटाने के पक्ष में नहीं था। नरेंद्र
मोदी ने कहा कि उन्होंने फैसला लिया और सारे अवैध रूप से बने धर्म स्थानों को भी
दूसरे मकानों, दुकानों की तरह तोड़वाया और जनता ने उनके फैसले को समझा और
अप्रत्याशित रूप से भारतीय जनता पार्टी को अहमदाबाद नगर निगम में शानदार सफलता
मिली। डॉक्टर प्रवीण तोगड़िया वाली विश्व हिंदू परिषद ने तब भी मोदी का जमकर विरोध
किया था। पार्टी के अंदर भी विरोध के स्वर उठे थे लेकिन, परिणाम आने के बाद विरोध
के स्वर गायब हो गए। यही मोदी की असल ताकत है। और ये ताकत इतनी बड़ी हो चुकी है कि
घोर हिंदुत्ववादी छवि के कारण मोदी के समर्थन में खड़ा रहने वाला मोदी समर्थक
देवालय से पहले शौचालय के मोदी के बयान पर भी मोदी का साथ नहीं छोड़ता और न ही
अहमदाबाद में अतिक्रमण कर रहे मंदिरों के ध्वस्त होने पर। नरेंद्र मोदी की यही
क्षमता उन्हें अपनी पार्टी में लालकृष्ण आडवाणी से बहुत बड़ा नेता बनाती है और
भारतीय राजनीति में भी दूसरे सभी नेताओं से बड़ा बना देती है।।
ऐसी
क्षमता कुछ हद तक इंदिरा गांधी में थी। जो कांग्रेस के तब के फैसलों को पलट देतीं
थी और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ देश की जनता भी उनके समर्थन में रहती थी।
शौचालय से पहले देवालय के नरेंद्र मोदी के बयान पर जयराम रमेश सामने आए और
उन्होंने कहाकि काश मोदी को बीस साल पहले ये बात समझ में आती जब कांशीराम ने यही
कहा था। जयराम रमेश यहीं मात खा जाते हैं। अयोध्या में राम मंदिर बनाने का बयान न
देकर मोदी भले ही कट्टर हिंदूवादी छवि से खुद को बचाएं लेकिन, वो धर्मनिरपेक्ष छवि
के लिए अयोध्या में शौचालय बनाने जैसा कांशीराम का बयान भी नहीं दे सकते। गोधरा की
प्रतिक्रिया में हुए गुजरात के दंगे हुए और उस वक्त नरेंद्र मोदी की सरकार पर उसे
सही से न संभालने के आरोप लगे। इसके अलावा नरेंद्र मोदी ने कोई भी ऐसा कृत्य नहीं
किया जिससे उन्हें विश्व हिंदू परिषद के डॉक्टर प्रणीण तोगड़िया या फिर बीजेपी के
ही दूसरे हिंदुत्व फायर ब्रांड छवि वाले नेता के आसपास ले जाकर खड़ा करे। लेकिन,
मोदी इस मामले में स्पष्ट हैं कि देश में वो हिंदुओं के मंदिर अगर अतिक्रमण की वजह
से तोड़वा सकते हैं तो संविधान का अतिक्रमण करने पर अल्पसंख्यकों (खासकर मुस्लिम पढ़ें) का भी तुष्टीकरण नहीं करेंगे। यही
स्पष्टता उनके समर्थकों को और मजबूत करती है। सिर्फ बीजेपी का कैडर वोट नहीं।
खांटी संघी वोटर जो बीजेपी से दूरी बनाकर सो रहा था वो भी और जो बस देश की तरक्की
होते देखना चाहता है वो भी- ये दोनों तरह के वोटर इस समय नरेंद्र मोदी के प्रबल
समर्थक बने हुए हैं। अच्छी-बुरी जैसी भी है सोशल मीडिया देश की असल तस्वीर पेश
करता है। पारंपरिक मीडिया की तरह संपादक की कैंची से काटी छांटी नहीं। सोशल मीडिया
पर नरेंद्र मोदी के शौचालय से पहले देवालय बयान पर एक समर्थक की सफाई पढ़ी।
नरेंद्र मोदी ने आखिर क्या गलत कहा है – मंदिर जाने से पहले साफ-सफाई तो जरूरी है।
मंदिर क्या बिना शौच-स्नान के जा सकते हैं। ये नरेंद्र मोदी का समर्थक वर्ग है जो
खांटी हिंदूवादी दिखता है, जो खांटी गवर्नेंस पसंद है, जो खांटी नौजवान है जिसे
अपने जेब में सलीक से रकम आने की चिंता है, जो खांटी कांग्रेस विरोधी है, जो खांटी
नेता चाहता है। ऐसा नेता जो कहता है वो करता है। ऐसा नेता जो करता है वो दिखता है।
ऐसा नेता जो दिखता है वही होता है। और देश को ऐसे नेता की सख्त जरूरत है क्योंकि,
लचर नेतृत्व से देश का नौजवान बुरी तरह नाराज है। इसीलिए वो नरेंद्र मोदी से किसी
ड्रामे, नौटंकी की भी उम्मीद नहीं करता। और इसीलिए ये आशंका भी नरेंद्र मोदी के
समर्थकों को डराती नहीं है कि मोदी आएगा तो तानाशाही आ जाएगी। वो जानता है कि
तानाशाही भी आएगी तो देश हित के लिए आएगी। देश के लोगों के हित के लिए आएगी।

12 Comments

संतोष त्रिवेदी · October 5, 2013 at 6:06 am

भाई,तानाशाही से डर तानाशाह के समर्थकों को क्यों लगेगा?
जो अब खुलकर डरते हैं,तब डर भी न पाएँगे ।

रविकर · October 5, 2013 at 12:47 pm

चित की शुचिता के लिए, नित्य कर्म निबटाय |
ध्यान मग्न हो जाइये, पड़े अनंत उपाय |

पड़े अनंत उपाय, किन्तु पहले शौचाला |
पढ़ देवा का अर्थ, हमेशा देनेवाला |

रविकर जीवन व्यस्त, करे कविता जनहित की |
आत्मोत्थान उपाय, करेगी शुचिता चित की |

रविकर · October 5, 2013 at 12:49 pm

आपकी उत्कृष्ट प्रस्तुति का लिंक लिंक-लिक्खाड़ पर है ।। त्वरित टिप्पणियों का ब्लॉग ॥

    Harsh · October 7, 2013 at 4:41 am

    शुक्रिया

ajay yadav · October 5, 2013 at 3:03 pm

समसामयिक |

Darshan jangra · October 5, 2013 at 3:10 pm

बहुत सुन्दर प्रस्तुति.. आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी पोस्ट हिंदी ब्लॉग समूह में सामिल की गयी और आप की इस प्रविष्टि की चर्चा कल – रविवार – 06/10/2013 को
वोट / पात्रता – हिंदी ब्लॉग समूह चर्चा-अंकः30 पर लिंक की गयी है , ताकि अधिक से अधिक लोग आपकी रचना पढ़ सकें . कृपया पधारें, सादर …. Darshan jangra

    Harsh · October 7, 2013 at 4:42 am

    शुक्रिया

Neeraj Kumar · October 6, 2013 at 7:12 am

बहुत सुन्दर आलेख .. आपकी इस रचना के लिंक की प्रविष्टी सोमवार (07.10.2013) को ब्लॉग प्रसारण पर की जाएगी, ताकि अधिक से अधिक लोग आपकी रचना पढ़ सकें . कृपया पधारें .

    Harsh · October 7, 2013 at 4:42 am

    शुक्रिया

मदन मोहन सक्सेना · October 8, 2013 at 5:37 am

प्रभाबशाली रचना। बधाई।
कभी यहाँ भी पधारें।
सादर मदन

http://saxenamadanmohan1969.blogspot.in/
http://saxenamadanmohan.blogspot.in/

Comments are closed.