मैं बार-बार कहता हूं, फिर से कह रहा हूं कि नरेंद्र मोदी किसी
को बख़्शने वाले नेता नहीं हैं। जब घरेलू मोर्चे पर विरोधियों को नहीं बख़्शा तो
देश के दुश्मन भला कैसे बच जाते। @thequint की
घुसकर मारने वाली ख़बर भी सही थी। लेकिन तब दूसरे मीडिया वाले इसे मानने को तैयार
नहीं थे। क्योंकि, इस देश में सीमा पर हो रही
घटनाओं की एक्सक्लूसिव खबर देने के लिए कुछ ही लोग तय थे।
एक अच्छी बात ये है कि भारतीय सेना का ये पूरा ऑपरेशन सिर्फ
और सिर्फ पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर के उन्हीं क्षेत्रों में किया गया, जहां
आतंकवादी अपना कैम्प चला रहे हैं। जाहिर है #PoK में आतंकवादी कैम्प से उन्हें भारत में घुसने का रास्ता
मिलता है। जो पाकिस्तानी सेना की मदद से मिलता है। इससे एक और बात साबित हो रही है
कि भारतीय सेना का खुफिया तंत्र बेहतर है। अजीत डोभाल की भी इसके लिए तारीफ की
जानी चाहिए। कहा जाता है कि रॉ एजेंट के तौर पर पाकिस्तान में डोभाल ने काफी कुछ
समझा-जाना है। सेना ने ये सब छिपकर नहीं किया है। सब बताकर किया है। पाकिस्तान की
सेना को भी। उसी का वो बयान याद दिलाया है, जिसमें पाकिस्तान ने कहा था कि वो अपनी
धरती का इस्तेमाल आतंकवाद के लिए नहीं होने देंगे। अगर पाकिस्तान की सरकार, सेना
अपना ही कहा पूरा करने में सक्षम नहीं है, तो कोई बात नहीं। भारत को इस काम को
अपने हाथ में लेना चाहिए। बाकायदा सेना ने ये बयान जारी किया है। और दुनिया के
दूसरे देशों को भी इस ऑपरेशन की पूरी जानकारी दी गई है। जो भी किया गया है, सब
ठोंक-बजाकर किया गया है।
इसी रणनीति को बरकरार रखा जाना चाहिए। प्रधानमंत्री जी Narendra modi पाकिस्तान से लड़ाई हो तो #PoK में
ही हो। अपना कम से कम नुकसान, उधर
ज्यादा से ज्यादा दबाव। वैसे भी अधिकांश #PoK आतंकवादियों
का ट्रेनिंग कैम्प ही तो है। भले ही
आतंकवादियों के सरगना कराची, लाहौर रहते हों। अब अगर आतंकवाद की लड़ाई में शामिल
होने आ रहे ये लड़ाके ऐसे मरेंगे, तो लाहौर, कराची में बैठे आतंकवादी आकाओं को
मुसलमानों को बरगलाने में भी मुश्किल होनी शुरू होगी।
जो खबरें आ रही हैं, उसी के आधार पर मान
लें कि 40 आतंकवादी मारे गए। इसका असर देखिए। सोचिए महीनों लगाकर आतंकवादी संगठनों ने इन
लड़कों को मरने के लिए तैयार किया होगा। महीनों की ट्रेनिंग दी गई होगी। महीनों से
ये भारतीय सीमा में घुसने की कोशिश कर रहे थे। मरने के लिए तो ये तय ही कर चुके
थे। सोच ये रही होगी कि ऐसी आतंकवादी घटना करेंगे कि सालों के लिए भारत को जख्म दे
सकें। वो मरना चाहते थे, वो हो गया। बाकी सब धरा का धरा रह गया।
एक
छोटी सी सलाह दे रहा हूं। इस समय बिजनेस चैनल मत देखिए कि बाजार गिर गया। अरे ये
तो रोज गिरता-चढ़ता है। भारतीय कंपनियां मजबूत हैं। ये भावनात्मक मौके होते हैं, जब दलाल स्ट्रीट के दलाल, दलाली खा लेते हैं। इसलिए मस्त रहिए। थोड़ा बहुत
बाजार मैं भी समझता हूं। भारतीय अर्थव्यवस्था, कंपनियों
पर इस तरह की लड़ाई से कोई असर नहीं पड़ने वाला। और थोड़ा बहुत पड़े भी तो इसकी
चिंता छोड़ दीजिए।

ये सेना की, प्रधानमंत्री Narendra
modi की और इस तरह के ऑपरेशन में
जुड़े हर किसी की तारीफ करने का वक्त है। लेकिन, इसका ये मतलब नहीं है कि दूसरों को गाली देना
शुरू कर दीजिए। देश एकजुट है। उसे एकजुट रहने दीजिए। अभी लड़ाई शुरू ही हुई है। 

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