फिर खतरा दिख रहा है फंसने का। कोई हम अपने फंसने की बात नहीं कर रहे हैं खतरा पूरे देश के फंसने का है। फंसने की वजह वही कश्मीर ही है जो, भारत-पाकिस्तान के बंटवारे के साथ से ही ऐसी फांस बन गया है जो, मुश्किल ही किए रहता है। लेकिन, इस बार फंसे तो, पहले से भी बुरा फंसेंगे।

पहली बार कश्मीर का मसला अपने पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू साहब संयुक्त राष्ट्र संघ में क्या ले गए। उसके बाद से तो, संयुक्त राष्ट्र संघ को तो अधिकार मिल ही गया। कोई भी ऐरा-गैरा नत्थू खैरा मुंह उठाकर भारत को पाकिस्तान के साथ शांति से कश्मीर समस्या का हल सुलझाने का अनमोल मशविरा दे डालता। और, अमेरिका ने तो मान लो इस मुद्दे से जितना फायदा उठाया- भारत-पाकिस्तान, दोनों से- वो, कोई कहने वाली बात ही नहीं है।

अच्छी बात ये है कि, अमेरिका हमसे इतना दूर है कि हमारा सीधे कोई युद्ध या फिर जमीन कब्जाने जैसा नुकसान नहीं कर सकता। और, अमेरिका, भारत के बढ़ते प्रभाव से वाकिफ है इसलिए वो, कभी ये भी नहीं कहता कि वो, भारत-पाकिस्तान के बीच कश्मीर मुद्दे पर मध्यस्थता करना चाहता है। हिलेरी भी इतना ही कहती हैं कि दोनों देशों के बीच अच्छे संबंध बनें इसमें हम मददगार बनें तो, बेहतर मध्यस्थता जैसी बात नहीं।

लेकिन, अब नए मध्यस्थता प्रस्ताव आ रहे हैं। भारतीय सीमा पर पहले से आग उगलता ड्रैगन कह रहा है कि वो, भारत-पाकिस्तान के बीच मध्यस्थता करने के लिए तैयार है। भई, आप कौन खामखां। लेकिन, चीन है कि मानता नहीं। ये वही चीन है जिसने पहले से ही हमारी जमीन कब्जाई रखी है। अरुणाचल प्रदेश को गूगल से लेकर हर नक्शे में अपना दिखाने की कोशिश करता रहता है। मन करता है तो, भारतीय सीमा में घुसकर खूनी रंग से चीन-चीन भी लिख जाता है। और, भारत सरकार ऐसा संभलकर चलती है चीन के नाम पर कि चीनी घुसपैठ की रिपोर्टिंग करने वाले बेचारे पत्रकारों के खिलाफ मामला दर्ज करा दिया। जबकि, चीन के एक रणनीतिक विद्वान की भारत को 30 टुकड़ों में करने की सलाह देने वाली साजिशी रिपोर्ट जगजाहिर हो चुकी है। सर्वे में ये साफ-साफ पता चल चुका है कि चीन के लोग भारत को सबसे बड़ा दुश्मन मानते हैं।

भारतीय सेना चीफ और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार ने कहा दिया कि चीन से कोई खतरा नहीं है। और, कोई चीनी घुसपैठ नहीं हुई है। सेना प्रमुख कहते हैं कि कुछ हुआ ही नहीं है। और, वेस्टर्न एयरफोर्स कमांडर एयर मार्शल N A K ब्राउनी कहते हैं कि चीन से सटी पहाड़ी सीमा पर भारत खास राडार लगा रहा है जिससे चीनी घुसपैठ को पकड़ा जा सके। लद्दाख में एयर डिफेंस क्षमता बढ़ाई जाने की भी बात एयर मार्शल कह रहे हैं। उन्होंने चीनी सीमा पर जबरदस्त पहरे की जरूरत बताई है।

चीन के दबाव का हाल ये है कि ऑस्ट्रेलिया जैसा देश भी अरुणाचल के एक प्रोजेक्ट पर एशियन डेवलपमेंट बैंक से लोन के खिलाफ खड़ा हो जाता है। ऑस्ट्रेलिया अरुणाचल को भारत का हिस्सा मानते हुए भी चीन के साथ अरुणाचल की सीमा को विवादित मानता है। बेबस हैं हम अपने से बहुत छोटे देश पाकिस्तान से भी डरे रहते हैं। अपने से ताकतवर चीन के आगे तो हमारी घिग्घी बंधी रहती है। क्या करें हम ..

ये वही चीन है जो, अपने देश में उईघर मुसलमानों के अधिकारों की मांग को सैनिक कार्रवाई से कुचल देता है। तिब्बत के धर्मगुरु दलाई लामा मारे-मारे इन्हीं की वजह से फिर रहे हैं। और, भारत में ये आ भर जाते हैं तो, दबाव के लिए चीन कुछ ऐसी उल्टी-पुल्टी हरकतें करता है कि भारतीय सरकार दबाव में तिब्बत पर सख्त रुख लेने से बचने लगती है। ये चीन तानाशाह है। अपने देश के भीतर और पड़ोसी देशों के साथ हर समस्या बंदूक के बल पर निपटाता है। और, भारत-पाकिस्तान के बीच शांति के लिए मध्यस्थता करना चाहता है। बड़ा खतरा है संभलकर चलने की जरूरत है।


3 Comments

Rakesh Singh - राकेश सिंह · September 29, 2009 at 6:39 pm

भाई भारत को १९६२ के चीन युद्ध के बाद से ही समहल जाना चाहिए था, लेकिन आज तक मुझे तो भारत सम्हाला हुआ नहीं लगता | देखिये भारत के सारे हितैसी देश (श्री लंका, बंगला देश, नेपाल …) एक एक कर चीन-पाकिस्तान के पाले मैं जा चुका है | क्या इसपे कभी congress govt. ने कोई मीटिंग बुलाई है? लेकिन अपने कलाम साहब को हटाने के लिए देश के सारे सेकुलर नेताओं ने कैसी गहन मंत्रणा की थी, सबको याद है |

आज के जिनते मंत्री या नेता सत्ता मैं हैं सबकी निष्ठा भारत वर्ष को छोड़ कर बस मैडम जी या राहुल बाबा मैं है | अब जब देश के सर्वश्रेस्ट नेता (MMS) ही ऐसे हैं तो देश जागेगा कैसे?

यदि चीन हमारे अरुनाचाल को ले भी लेता है तो किसी को कोई फर्क नहीं पढने वाला | हम भारतीय २-३ हफ्तों मैं ही इसे भुला कर फिर से मॉल-मुल्तिप्लेक्स-रियलिटीशो-cat walk मैं मशगुल हो जायेंगे !

ज्ञानदत्त पाण्डेय | Gyandutt Pandey · September 30, 2009 at 8:21 am

भारत का बड़ा हिस्सा माओवाद/नक्सलवाद/साम्यवाद के फन्दे में है। अत: आगे का समय कठिन तो है ही।

Mrs. Asha Joglekar · September 30, 2009 at 7:34 pm

Desh ke ander ke naksal wad ko kuch kar nahee sakte. Simi ko kuch kar nahee sakte. saree samasyaon ko daree ke neech khiska do ye hee neeti hai sarkar kee par hum hain hee is layak .

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