नोएडा
के सबसे बड़े बुनियादी ढाँचे का लोकार्पण करने भी @MYogiAdityanath नहीं आ रहे। हालाँकि, इसका लगभग काम @yadavakhilesh के ही शासनकाल में
पूरा हो चुका था। क़रीब आधा पुल लखनऊ से ही लोकार्पण करके अखिलेश ने खोल दिया था।
दरअसल कोई भी मुख्यमंत्री प्रदेश के सबसे चमकते शहर नोएडा आने से डरता है। डर उस
अन्धविश्वास का है कि जो यहाँ आया, उसकी सत्ता गई। ख़ैर, अपना घर-गाँव रहते मायावती नहीं आईं। फिर भी २०१२ में सत्ता से
बेदख़ली हो गई। २०१७ में लखनऊ रहकर नोएडा की सारी योजनाओं का लोकार्पण करते अखिलेश भी चले
गए। योगी आदित्यनाथ साधु हैं, फिर भी सत्ता जाने के मोह से उबर नहीं पा रहे हैं। ख़ैर, ये तो पहली बात हुई।
दूसरी जरूरी बात ये कि मुख्यमंत्री आदित्यनाथ ख़ुद तो आ नहीं रहे हैं। अच्छा होता
कि इस सड़क का ज़्यादातर काम जिस अखिलेश यादव के कार्यकाल में पूरा हुआ था, उन्हें भी बुला
लेते। हालाँकि, राजनीति
में ये कोई नहीं करता। हर सरकार आने के बाद पहले की सरकारों के पूरे किए काम को
लोकार्पण करके अपना बना लेती है। लेकिन, मुझे लगता है कि जिस तरह से सोशल मीडिया
के जरिए हर छोटी-बड़ी बात सबको पता हो जाती है, उसमें ये गुन्जाइश बहुत रह नहीं
जाती है कि किसने क्या किया और किसने क्या श्रेय ले लिया। 
आधी खुली नोएडा एलिवेटेड सड़क पर
छोटे दिल वालों की ही राजनीति बड़ी होती जा रही है। आज शाम ५ बजे उत्तर प्रदेश
के उद्योग मंत्री सतीश महीना इसे आम जनता के लिए खोल देंगे। कुछ समय बाद जनता को न
योगी याद रहेंगे, न ही अखिलेश यादव। लेकिन, अगर मुख्यमंत्री आदित्यनाथ पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश
यादव को भी लोकार्पण में आमन्त्रित कर लेते, तो इस बड़े दिल की
राजनीति को लोग हमेशा याद रखते। मैं पूरे यकीन के साथ कह सकता हूं कि मुख्यमंत्री
आदित्यनाथ ससम्मान पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को इस लोकार्पण में बुलाएं, तो
उनकी छवि बड़ी होगी, उनके समर्थक बढ़ेंगे। उत्तर प्रदेश की जनता की नजरों में भी
सम्मान ही बढ़ेगा। होना तो ये चाहिए था कि आदित्यनाथ और अखिलेश यादव मिलकर इसका
लोकार्पण करते। लेकिन, योगी अभी हाथ आई सत्ता जाने से डर रहे हैं, तो कम से कम
पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश के आने से जब भी अखिलेश के हाथ सत्ता आती, तो नोएडा को
लेकर लोगों का अन्धविश्वास भी खत्म होता।

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