अब सोचिए कि क्या होगा। ये कुछ समझने-मानने को तैयार ही नहीं हैं। वैसे ये मान ही लेते तो, इस हाल में थोड़े न पहुंचते। इतनी गंभीर बीमारी है और इनके शुभचिंतकों से लेकर आलोचक तक अलग-अलग तरीके से इन्हें आगाह कर रहे हैं। लेकिन, इनको क्यों फर्क पड़े आखिर पूरी तरह से स्वस्थ पार्टी को गंभीरमरीज जैसे हाल में पहुंचाने में इनके जैसे बड़े लोगों की पूरी टोली के सत्कर्मों का तो बड़ा योगदान रहा है।

ये हैं बीजेपी अध्यक्ष राजनाथ सिंह जो, ये मानने को तैयार ही नहीं हैं कि भारतीय जनता पार्टी को भारतीय जनता की पार्टी बने रहने के लिए बड़े इलाज की जरूरत है। पार्टी के पेस्ट कंट्रोल की जरूरत हम जैसे लोग तो बहुत पहले से कह रहे हैं। अब तो, ये बात खुद – कम से कम भारतीय जनता पार्टी के तो, सबसे बड़े समाजविज्ञानी- राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहनराव भागवत भी कह रहे हैं। पत्रकारों के सवाल पूछने पर भागवत जी ने कहा बीजेपी हमसे सलाह मांगेगी तो, हम देंगे। लेकिन, बिन मांगे सलाह दे ही दी कि भाजपा को बड़ी सर्जरी या कीमोथेरेपी तक की जरूरत है।

लेकिन, अभी करीब डेढ़-2 महीने तक और बीजेपी के ठेकेदार रहने वाले राजनाथ से जब पत्रकारों ने भागवत जी इस सलाह पर प्रतिक्रिया मांगी तो, उन्होंने कहा ये कौन कह रहा है कि बीजेपी का बुरा हाल है। अब पता नहीं राजनाथ सिंह अपने प्रदेश में चार लोगों से मिल बैठके बतियाते भी हैं या नहीं। क्योंकि, अगर जरा भी बतियाते रहते तो, उन्हें पता लग जाता कि उनकी पार्टी की बीमारी इतनी बड़ी हो गई है कि अब लोग पार्टी में रहने वाले लोगों को इस छूत से दूर रहने की सलाह देने लगे हैं। मैं अभी चार दिन पहले इलाहाबाद से लौटा हूं और कांग्रेस के लिए ये सुखद है कि लोग बीजेपी में पड़े अपने नजदीकियों को सलाह देने लगे हैं कि राहुल गांधी से कोई जुगाड़ खोजो ना। क्योंकि, ढंग की राजनीति करने वालों के लिए सपा-बसपा में तो पहले ही जगह नहीं बची है।


6 Comments

पी.सी.गोदियाल · October 28, 2009 at 5:48 am

सहमत हूँ , मैं भी यह मानकर चलता हूँ कि बीजेपी का बडा गरक यूँ तो उसके सभी जोकरों ने किया मगर पर्मुख रहे राजनाथ सिंह और आडवानी !

ज्ञानदत्त पाण्डेय| Gyandutt Pandey · October 28, 2009 at 11:37 am

बेचारे राजनाथ। भाजपा को अनाथ बनाने का लक्ष्य है उनका!

अजय कुमार झा · October 28, 2009 at 2:36 pm

हां तो बचा खुचा काम भी खतमे कर दें ..सारा टेंशन खत्म हो जाये जल्दी से ॥

Rakesh Singh - राकेश सिंह · October 28, 2009 at 5:55 pm

विनाश काले विपरीत बुद्धि, और ये भाजपा पे पूरी फिट बैठती है |

राजनाथ के रहते भाजपा का इलाग संभव नहीं लगता | राजनाथ तो बस अपनी गोटी सेट रखना चाहते हैं | मेरे हिसाब से मुरली मनोहर जोशी या औं जेटली या शुषमा स्वराज या कोई और उर्जावान नेता चाहिए | देखते हैं दिसम्बर मैं क्या होता है? पर दिसम्बर के पहले इन २-३ महीनों मैं पार्टी मैं और गिरावट आएगी |

Mrs. Asha Joglekar · October 30, 2009 at 2:49 pm

सही कह रहे हैं, उम्मीद करते हैं कि यहाँ भी नये आगे आयें चाहे पुरानों को धकियाते हुए ।

Comments are closed.