#MumbaiGangRape की खबर आ गई थी। वो मुंबई जहां रात 2 बजे भी एक
लड़की दस लड़कों के साथ घूमने जा सकती है। और, अकेले लड़के के साथ भी। और, बिना
किसी लड़के के साथ भी। उस मुंबई में शाम 6 बजे एक वीरान पड़ी मिल में किसी पत्रकार
बनने की शुरुआत करने वाली लड़की के साथ 5 लड़कों ने दुष्कर्म किया। उसके साथी भी
था जिसे बांध दिया गया था। मुंबई से आई इस खबर के दूसरे दिन राज ठाकरे के प्रेस
कांफ्रेंस करने की खबर आई। हमारे 4-5 बिहारी साथियों ने तुरंत अंदेशा जताया हो न
हो इसमें बिहारी ही होंगे। और, कमाल की बात ये कि उन बिहारी साथियों ने ये मान भी
लिया कि ऐसे करेंगे तो राज ठाकरे जैसों को मौका मिल ही जाएगा। डर की वजह भी थी। पिछली
बार जब 2007 की आखिरी रात को मुंबई के एक होटल के बाहर एक लड़की को निर्वस्त्र
करने की कोशिश हुई थी तो, राज ठाकरे ने सारा ठीकरा बिहारियों, यूपी से आए लोगों परडाल दिया था। हालांकि, वो आशंका इस बार सच साबित नहीं हुई। लेकिन, ये डर मीडिया
में बना हुआ है कि बलात्कार किसने किया या गलत काम किसने किया उसके आधार पर खबर
बढ़ाई जाएगी, पहचान बताई जाएगी। खैर धीरे-धीरे उस लड़की के साथ दुष्कर्म करने वाले
5 लड़कों की पहचान हो गई। मोहम्मद अब्दुल, कासिम बंगाली, सलीम और अशफाक, पांचवां
था विजय जाधव। एक न्यूजचैनल के ट्विटर अकाउंट पर इनके नाम आए लेकिन, थोड़ी देर बाद
गायब हो गए। किसी भी न्यूज चैनल ने उस दिन इन बलात्कारियों के नाम नहीं दिखाए।
शायद 4 मुसलमानों के बलात्कार में शामिल होने से सांप्रदायिक होने के खतरा था। 
यही
असल खतरा है। न्यूजरूम में बैठे स्वयंभू नैतिकता के ठेकेदारों ने ये तय कर लिया। अब
सवाल यही है कि नैतिकता पीड़ित का चेहरा नाम न बताने-दिखाने की बात कहती है या बेशर्म
बलात्कारियों की पहचान छिपाने की। क्योंकि, अगर मीडिया भी कोई कहां का है या किस
धर्म का है इस आधार पर नीच कृत्य करने वालों की पहचान छिपाएगा या बताएगा तो फिर
समाज सुधरने की बात हम कैसे सो. पाएंगे। हालांकि, इसके बाद अखबारों में सारे नाम
छपने के बाद कई चैनलों ने भी बलात्कारियों की पहचान सबको बताई। मुझे तो लगता है कि
पहचान छिपाने के पीछे भी सरकारी या सत्ता-सुविधा भोग रहे लोगों की जमात होती है जो
नहीं चाहती कि ऐसी घटनाएं लोगों को हमेशा याद रहें और जगाए रहें। 16 दिसंबर को
बलात्कार की शिकार लड़की की मृत्यु के बाद और उसके पिता की इजाजत के बाद भी हमारीसरकार ने उसकी जीवित रहने की कोशिश को ही मार दिया था। वो जिंदा रहती तो हर रोज हमें झकझोरती रहती। हर रोज हम इस खतरे से निपटने को सोचते रहते। वरना तो रोज की जिंदगी की जद्दोजहद में हम कहां ऐसी गंदी बातें याद रखते हैं जब तक हमारे साथ, बगल में या ऐसे ही मीडिया पर बड़ी खबर न बन जाए। 
दरअसल कहने को भारत
आधुनिक हो चुका है। लेकिन, सच्चाई यही है कि अभी भी हम आदिम काल में ही हैं।
बलात्कार को मानसिक विकृति कहने के बजाए हमारे नेताजी लोग पहनावे और टीवी पर दिखने
वाली अश्लीलता की वजह से बता रहे हैं। मुंबई की घटना के बाद अभी नरेश अग्रवाल,
लालू यादव जैसे लोग बोले। जबकि इन्हें शायद ही पता हो कि लड़की ने क्या पहना था।
और, वो कुछ भी पहने होती ऐसे कमीने क्यों रुकते। खैर ये शायद भारतीय नेताओं की
प्रवृत्ति है 16 दिसंबर को दिल्ली में हुई गैंगरेप की घटना के बाद देश के गृहमंत्रीसुशील कुमार शिंदे और दूसरे नेताओं की बयानबाजी भला किसे भूली होगी। जैसी मीडिया
में खबरें हैं कि उस लड़की ने हालत ठीक होते ही यही कहा कि किसी भी हालत में
दोषियों को छोड़ना नहीं है और उन्हें कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए। वैसे बहस अभी
भी इस बात पर जारी है कि फांसी होनी चाहिए या नहीं। कुछ खबरें बड़ी हो जाती हैं और
इस वजह से उसके बहाने समाज के गिरते स्तर पर संवेदनहीनता पर बात चर्चा हो जाती है।
गुवाहाटी की सड़कों पर नवंबर 2007 में भी ऐसी ही घटना हुई थी। बिंदास बंबई जैसे
देश के सारे शहर बनाने की ओर हम बढ़ते कि रात-दिन का भेद भुलाकर हम मस्त रह पाते।
हुआ उल्टा हम सरेशाम मुंबई की मस्ती का ही बलात्कार कर रहे हैं। देश तो पहले ही
बलात्कारी बना हुआ है।
(लिखना शुरू किया था
तो शीर्षक सूझा नहीं अब लग रहा है कि इसी आखिरी लाइन को शीर्षक बनाना चाहिए था)

5 Comments

प्रवीण पाण्डेय · August 24, 2013 at 12:51 pm

संवेदनहीनता की पराकाष्ठा है, अपनी नाकामियाँ छिपाने के बहाने ढूढ़ने लगते हैं लोग।

ajay yadav · August 24, 2013 at 4:12 pm

मानसिकता बदलने की जरूरत हैं |

काजल कुमार Kajal Kumar · August 24, 2013 at 5:24 pm

🙁

Lalit Chahar · August 25, 2013 at 1:49 am

सुन्दर प्रस्तुति! हिंदी ब्लॉगर्स चौपाल {चर्चामंच} की पहली चर्चा हिम्मत करने वालों की हार नहीं होती — हिंदी ब्लॉगर्स चौपाल चर्चा : अंक-001 में आपका सह्य दिल से स्वागत करता है। कृपया पधारें, आपके विचार मेरे लिए "अमोल" होंगें | आपके नकारत्मक व सकारत्मक विचारों का स्वागत किया जायेगा | सादर …. Lalit Chahar

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