जवाहरलाल
नेहरू विश्वविद्यालय के अध्यक्षों का काफी शोहरत मिलती रही है। मान लिया जाता है
कि बौद्धिक तौर पर वो काफी आगे होते हैं। लेकिन, इस अध्यक्ष ने पिछले सारे
अध्यक्षों की बौद्धिक सीमा से आजादी हासिल कर ली है। जवाहरलाल नेहरू छात्रसंघ
अध्यक्ष #KanhaiyaKumar ने तो वो कर दिखाया है जो, अब तक कोई न कर सका था। कन्हैया कुमार ने
देश के कुछ लोगों को आजादी-आजादी का नारा देकर ऐसा दिमागी कुंद कर दिया है कि वही
अब उन खास लोगों को हर तरह की आजादी दिलाने वाला मसीहा नजर आ रहा है। वो नौटंकी का
देश का सबसे बड़ा उस्ताद बन गया है। ताजा नौटंकी में उसे बताया कि उसे जेट एयरवेज
की फ्लाइट में साथी यात्री ने मारने की कोशिश की। अब कन्हैया को मारने की कोशिश और
वो भी गला दबाकर। इतना सुंदर सधी सुर्खियां बनीं। देखिए कन्हैया का गला दबाकर
मारने की कोशिश। कन्हैया मतलब आजादी हो रखा है। पैर से लेकर सिर के सहारे खड़े
होकर लोग कन्हैया की आजादी के साथ सुर मिला रहे हैं। इसलिए सीधे सुर्खी बन गई कि
आजादी का गला दबाकर मारने की कोशिश। अब ये भी कमाल ही है ना कि कन्हैया के बगल की
सीट पर एक भाजपाई को सीट मिली। मतलब कितनी बड़ी साजिश रही होगी। अब जाहिर है कि
इतनी बड़ी साजिश है, तो इसमें कोई छोटे-मोटे लोग तो होंगे नहीं। तो, इसको थोड़ा और
बढ़ा देते हैं। ये हुआ सरकार भी कन्हैया को मारने की साजिश में शामिल। अच्छा इतने
से भी आजादी नहीं मिल पा रही है। तो इसे और एक हाथ आगे बढ़ा लो या ऐसे समझो कि ये
आज के समय में सबसे मारू टाइप की लाइन है। कन्हैया को मारने की संघ की साजिश।
नागपुर के इशारे पर जेट एयरवेज में सवार हुआ था यात्री।

कन्हैया
कुमार ने ट्वीट किया। इसके बाद सोशल मीडिया पर और साथ ही साथ टीवी पर भी चल पड़ा
कि कन्हैया कुमार को गला दबाकर मारने की कोशिश की गई। जरा सा भी पड़ताल नहीं किया
गया कि आखिर कैसे ये संभव है कि घनघोर सुरक्षा वाली जगह पर कन्हैया को मारने की
साजिश की जाए। और अगर की गई है तो, कम से कम उस तथाकथित तौर पर कन्हैया का गला
दबाने वाले यात्री के बारे में भी पड़ताल कर लेते। पड़ताल हुई। लेकिन, तब तक तो
टीवी चैनलों के स्क्रीनशॉट के हवाले से कन्हैया और कन्हैया के बहाने देश में आजादी
का गला दबाने की साजिश सोशल मीडिया में वायरस की तरह फैल गई। आजादी चाहने वाले के
समर्थक सोशल मीडिया पर लिखने लगे कि ये रोजगार और शिक्षा जैसे मामलों पर बात न
करने देने की साजिश है। आजादी के तथाकथित समर्थक ये भी बता रहे हैं कि जनता को
हिंदू मुसलमान के दायरे से बाहर न निकलने देने की ये साजिश है। कमाल है। इस तरह की
बेवकूफ बनाने वाली साजिश इस देश में अद्भुत तरीके से हो रही है। लगभग समाप्त हो
चुके वामपंथी ये फैला रहे हैं कि कन्हैया अकेला पड़ रहा है। और तुरंत ही ये भी बता
रहे हैं कि देश कन्हैया को लेकर आंदोलित है। उसके साथ खड़े होने की जरूरत है। #StandWithJNU टाइप हैशटैग फिर
झाड़पोंछकर निकाल लिया गया है। अब बताइए भला इसमें इस हैशटैग की क्या उपयोगिता है। ऐसे अपील जारी हो रही है कि जैसे देश के भीतर आजादी
खतरे में है। अच्छा ये हुआ कि मीडिया ने ही थोड़ी देर से सही लेकिन, पड़ताल की। खबर
लिखने से पहले सभी पक्षों से बात की जो जरूरी शर्त थी वो पूरी हुई। इससे पता चला
कि कन्हैया अव्वल दर्जे का झूठा है। कोई हत्या की साजिश नहीं थी। कोई गला दबाने की
कोशिश नहीं हुई। पैर लगने से सहयात्री से झगड़ा हुआ। जेट एयरवेज ने दोनों को उतार
दिया। मुंबई-पुणे के हवाई जहाज में जिस सहयात्री पर कन्हैया का गला दबाने का आरोप
लगा है। वो टीसीएस का कर्मचारी है। तैंतीस साल के मानस ज्योति डेका ने बताया है कि
ये सिर्फ प्रचार पाने का तरीका है। अब ये भला कोई भी कैसे मान सकता है कि किसी
साजिश के तहत कन्हैया का गला दबाने के लिए एक सॉफ्टवेयर कंपनी के कर्मचारी को
तैयार किया जाएगा। उसे जहाज पर कन्हैया के बगल की सीट दिलाई जाएगी। और हवा में गला
दबाकर इसे और ज्यादा फिल्मी बनाने की पटकथा लिखी जाएगी। दरअसल मुश्किल ये भी है कि
वामपंथी ज्यादातर कलाकारी के चक्कर में फिल्मी ही हो जाते हैं। और इसका असर इस नए
वामपंथी नेता की हर हरकत से साफ झलक रहा है। इसीलिए ये जुझारू वामपंथी नेता ट्वीट
भी इसी अंदाज में करता है कि फिर से और इस बार एयरक्राफ्ट के अंदर एक आदमी ने मेरा
गला दबाने की कोशिश की। भला गला दबाकर मारने की चाहत रखने वाला इतना मौका देगा कि
वो ट्वीट कर सके। इस नौटंकी से आजादी की देश को बड़ी सख्त जरूरत है।