माफ कीजिएगा मैं ये लिखना नहीं चाहता था। लेकिन, न्यूज एजेंसी PTI पर आई इस खबर के बाद मैं खुद को रोक नहीं पाया। अपनी बहनजी की ही सरकार में दलितों का सम्मान बच नहीं पा रहा है। कांग्रेस अध्यक्ष रीता बहुगुणा जोशी ने तो एक बयान देकर खुद का और पार्टी का काम फिट कर लिया। लेकिन, उस बयान का झटका (अंग्रेजी में Aftereffect) एक के बाद एक लगता ही जा रहा है।

अब सुनिए जरा यूपी के गृह सचिव महेश कुमार गुप्ता क्या कहा रहे हैं। मैं PTI पर आया उनका बयान वैसे का वैसा ही छाप रहा हूं- “Now, District Magistrates in presence of concerned SP and DIG will hand over cheques to Dalit rape victims”। यानी प्रदेश सरकार दलितों की इज्जत नहीं बचा पाएगी। इसीलिए दलितों के बलात्कार को वो एक सामान्य घटना मान रही है जो, होती रहेगी और इसीलिए इस पर कानून बना दिया कि अब पीड़ित दलितों को चेक जिलाधिकारी ही दे दिया करेंगे। यानी दलितों के साथ व्यवहार वैसा ही होता रहेगी जिसके खिलाफ लड़झगड़कर, मायावती के पीछे जय भीम-जय भारत का नारा लगाकर इन्होंने मायावती को राज्य का ‘मुख्तार’ बना दिया है। यानी इनकी पूज्य बहनजी इनके सम्मान बचाने का भरोसा नहीं दे सकतीं। लेकिन, बहनजी जगह-जगह पत्थर के हाथी जरूर लगवा रही हैं जिससे इन्हें लगे कि सत्ता में इनकी हिस्सेदारी बनी रहेगी।

अब ये भी जान लीजिए कि दलित लड़कियों-महिलाओं के बलात्कार की कीमत देने के तरीके में ये बदलाव इसलिए हुआ क्योंकि, कांग्रेस अध्यक्ष रीता जोशी ने ये कह दिया था कि जितनी रकम सरकार पीड़ित दलितों के जख्म पर मरहम लगाने के लिए दे रही है उससे ज्यादा राज्य के पुलिस प्रमुख के हेलीकॉप्टर से वहां पहुंचने पर खर्च हो जाता है। खबर के मुताबिक, एक जून से DGP राज्य में 18 जगहों पर पीड़ित दलितों को चेक देने जा चुके हैं।

अब अगर राज्य सरकार को जरा भी शर्म होती तो, ऐसे नियम बदलने और उसकी जानकारी के लिए गृह सचिव को न तैनात करती। अच्छा तो ये होता कि मायावती ये दिखा देतीं कि पहले तो किसी दलित क्या राज्य की किसी लड़की अस्मिता से कोई खिलवाड़ नहीं कर पाएगा। और, उस कानून के बारे में उनका गृह सचिव मीडिया को बताता जिसे सुनकर किसी बदमाश, लफंगे की हिम्मत न होती कि किसी की इज्जत की ओर आंख उठाकर भी देखता।


5 Comments

AlbelaKhatri.com · July 23, 2009 at 11:26 am

sharm?
kahan hai sharm?
maine toh dekhi nahin
kahin aapko dikhe toh ek photo kheench lena kambakht ka taki hum bhi dekh saken ki vo sharm hoti kaisee hai jo rajya sarkaar ko aa sake……….

aalekh umda hai
badhaai !

ओम आर्य · July 23, 2009 at 11:55 am

आलेख अच्छा है ……..पर यह क्या बात हुई…..इनको शर्म आती भी है या नही…..

डा.रूपेश श्रीवास्तव(Dr.Rupesh Shrivastava) · July 23, 2009 at 12:44 pm

हर्ष भइया!कई एक लोग तो ये जानने के उत्सुक होंके कि दिये जाने वाले चेक की राशि क्या होती है, सब के अपने अपने स्वार्थ हैं। वैसे क्या ये बड़ी उपलब्धि नहीं है कि माया बेबी के राज्य में सवर्णों की महिलाओं के साथ या तो बलात्कार होते नहीं है या उन्हें मूल्यांकित नहीं करा जाता????? स्त्री के स्त्रीत्व हरण के बीच में भी बाभन-चमार की लकीर से बंटवारा कमाल का वर्गीकरण है जो माया बेबी ही कर सकती हैं।

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi · July 23, 2009 at 2:06 pm

क्या हो गया है भारत का हाल सोच कर ही शर्म आने लगती है।

डॉ. मनोज मिश्र · July 23, 2009 at 4:51 pm

आप सही है मगर इन लोंगों को समझ कब आयेगी.

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