प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपनी शैली है और उस शैली में जाकर उनसे निपटने की कांग्रेस तैयारी नहीं कर पा रही है तो, अपने मुख्यमंत्रियों को प्रधानमंत्री के कार्यक्रम से दूर रखने की बात कर रही है। इससे क्या होगा। होगा ये कि हर कांग्रेसी शासन वाले राज्य में भी सिर्फ मोदी होंगे। तस्वीरों में कांग्रेसी मुख्यमंत्री नहीं होंगे। और क्या होगा। होगा ये कि जो कांग्रेस के कार्यकर्ता किसी तरह थोड़ा आगे बढ़कर क्रिया-प्रतिक्रिया वाले सिद्धांत के तहत बीजेपी कार्यकर्ताओं के खिलाफ तैयार होते, वो भी नहीं होंगे। और सबसे बड़ी बात लोकतांत्रिक परंपराओं को तोड़ने का काम हमेशा की तरह कांग्रेस कर रही होगी। बीजेपी को राज करना नहीं आता ये तो कहकर कांग्रेस ने लंबे समय तक राज कर लिया। बनी-बनाई बीजेपी सरकारें भी विपक्षी कांग्रेसी नेताओं से इस दहशत में पांच साल तक किसी तरह सरकार चलाती रहीं और पांच साल बाद कांग्रेसियों को सत्ता सौंप दी। लेकिन, अब ये होता नहीं दिख रहा है। देश के ढेर सारे राज्य हैं जहां पांच क्या 10-15 साल से भाजपाई सत्ता चला रहे हैं। और कांग्रेसियों से डर भी नहीं रहे हैं। अब उसी के आगे ये हो गया है कि सत्ता में रहते कांग्रेसी मुख्यमंत्री, भाजपाई प्रधानमंत्री के मंच पर जाने से डर रहे हैं। और प्रचारित भी कर रहे हैं कि जनता उनकी “हूटिंग” कर रही है। इसके लिए वो प्रधानमंत्री को दोषी ठहरा रहे हैं। भाजपाई मजा ले रहे हैं कि जनता के उत्साह का क्या किया जाए। कांग्रेस देश के डीएनए से इस तरह से गायब हो जाएगा। ये आशंका खाए-पिए-अघाए, कार्यकर्ता को सिर्फ कमाने की जुगाड़ सिखाने वाले कांग्रेसियों को थी ही नहीं। मोदी शैली वाली राजनीति से निपटना है तो, उसी शैली में बात कीजिए। और जैसे एक समय तय ये सत्य था कि भाजपाइयों को शासन करना नहीं आता। वैसे ही मोदी के सामने ये भी साबित हो रहा है कि कांग्रेसियों को शासन में रहते हुए शासक की तरह व्यवहार करना नहीं सूझ रहा। लोकतंत्र में जनता ही तय करती है कि शासक का व्यवहार कौन करेगा। मुख्यमंत्री रहते मोदी को देश की जनता ने प्रधानमंत्री सा रुतबा दिया। फिर प्रधानमंत्री भी बना दिया। और कांग्रेसी मुख्यमंत्री हैं कि अपने ही राज्य में, अपनी जनता के सामने मैदान छोड़कर भाग खड़े हुए हैं।

Related Posts

राजनीति

ममता की मुस्लिम राजनीति से मुसलमानों का कितना भला

ममता बनर्जी को पश्चिम बंगाल की जनता लगातार जनादेश दे रही है। लोकतंत्र में सबसे ज्यादा महत्व भी इसी बात का है। लेकिन, जनादेश पाने के बाद सत्ता चलाने वाले नेता का व्यवहार भी लोकतंत्र Read more…

राजनीति

बुद्धिजीवी कौन है?

केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद के बुद्धिजीवियों को भाजपा विरोधी बताने के बाद ये सवाल चर्चा में आ गया है कि क्या बुद्धिजीवी एक खास विचार के ही हैं। मेरी नजर में बुद्धिजीवी की बड़ी सीधी Read more…

राजनीति

स्वतंत्र पत्रकारों के लिए जगह कहां बची है?

केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने बुद्धिजीवियों पर ये आरोप लगाकर नई बहस छेड़ दी है कि बुद्धिजीवी बीजेपी के खिलाफ हैं। मेरा मानना है कि दरअसल लम्बे समय से पत्रकार और बुद्धिजीवी होने के खांचे Read more…