ऐसे ही
आज मैंने कुछ स्टेटस अपडेट्स डाले। एक बार उसे एक साथ पढ़ा तो, मुझे लगा कि ये तो,
जाने-अनजाने भारतीय जनता पार्टी के ताजा हाल का विश्लेषण जैसा कुछ हो गया। ये
पांचों स्टेटस एक साथ चिपका रहा हूं। क्योंकि, आज कई संयोग एक साथ बने हैं संघ के सबसे बड़े सपोर्ट सिस्टम वाले राज्य उत्तर प्रदेश में कल्याण सिंह लौटे हैं। बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद पर पुराने नितिन गडकरी की ताजपोशी की रिपोर्ट आ रही है। और, फिर से संघ-बीजेपी पर हिंदू आतंकवाद का आरोप लगा है। व्यक्ति निर्माण ही मूल सवाल दिख रहा है।
 

1- गृहमंत्री
सुशील कुमार शिंदे आश्वस्त हैं कि तीसरी बार यूपीए की सरकार बन जाएगी। और, इस चुनाव में बीजेपी-संघ के शिविरों
से निकले आतंकवादी वोट नहीं डालेंगे और न ही उनके सगे-संबंधी-शुभचिंतक। और, वोट डालेंगे तो, भी इतने कम हो गए हैं कि सरकार यूपीए
की ही बनेगी। तो, शिंदे साहब इन आतंकवादियों के खिलाफ मुदकमे-जेल की कार्रवाई
यूपीए 2 में होगी या यूपीए 3 का इंतजार करें। #rss #bjp #terrorism

 2- राम जेठमलानी
के बेटे Mahesh Jethmalani नितिन गडकरी के खिलाफ BJP अध्यक्ष पद के लिए चुनाव लड़ना चाहते
हैं और वो, इतने भर से ही #tweeter पर नंबर 1 पर हैं। इस नब्ज को संघ, बीजेपी समझे तो, बेहतर। #rss #FB
#BJP

3- कल्याण सिंह BJP में वापस आ गए हैं। कार्यकर्ता
उत्साहित हैं। कल्याण भी पुराने जोश में भाषण देने की कोशिश कर रहे हैं। कह रहे
हैं हमने 60 लोकसभा जिता के दी हैं। अब तो, 50 की ही बात कर रहे हैं। पूरे प्रदेश के
दौरे की बात कह रहे हैं। चुनाव नहीं लड़ेंगे ये भी कह रहे हैं। जय श्रीराम का नारा
लगा रहे हैं। बजरंगबली को भी याद कर रहे हैं। लेकिन, खांसने लगते हैं। क्या पुराने दिन
लौटेंगे

4- एक जमाने में
कल्याण सिंह, उमा भारती की अनुशासनहीनता को संघ के खिलाफ समझाकर उन्हें
बाहर कर दिया गया। और, ये करने-कराने वाले ही बीजेपी के बड़े नेता हो गए। अब नितिन
गडकरी सिर्फ पुराने बीजेपी नेताओं कल्याण सिंह-उमा भारती की वापसी कराके राष्ट्रीय
स्वयंसेवक संघ के प्रिय हैं।

और अंत
में –

5- बीजेपी का काम
अच्छा। बड़े-बड़े नाम अच्छे। फिर भी BJP को मजबूत बनाने का असली काम उसके काम और बड़े-बड़े नाम से
ज्यादा शिंदे-दिग्विजय जैसों के बयान क्यों करने लगे हैं। #BJP #RSS
इस पर सोचेगा
क्या?

नहीं सोच रहे हैं तो, सोचिए कि जब सरकार के खिलाफ इतना गुस्सा लोगों में हो फिर भी आपकी बात पर भारत का लोकतंत्र भरोसा जताने को तैयार क्यों नहीं है?

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