राजनाथ सिंह ने अब साफ कह दिया है कि वो उत्तर
प्रदेश लौटना नहीं चाहते हैं। राजनाथ सिंह ने शुरू से ही अपना ये रुख साफ कर रखा
है। चुनाव के बीच में भी मुख्यमंत्री पद की दावेदारी के सवाल पर वो फीकी हंसी के
साथ यही जवाब देते रहे कि सब मुझे ही मिलना चाहिए क्या? पार्टी में बहुत से योग्य लोग हैं। लेकिन,
राजनाथ सिंह के नाम की चर्चा एक बार फिर से तब तेज हो गई जब, 14 मार्च को हेडलाइंस
टुडे के सम्पादक राहुल कंवल ने एक ट्वीटकर बताया कि राजनाथ सिंह को यूपी का मुख्यमंत्री
बनाने का प्रस्ताव मिला है और उन्होंने इस पर सोचने के लिए समय मांगा है। राहुल
कंवल ने इसी ट्वीट में केशव मौर्या और मनोज सिन्हा को भी दावेदार बताया। नरेंद्र
मोदी और अमित शाह वाली भारतीय जनता पार्टी में किसी भी तरह का कयास लगाना खुद को
बेवकूफ साबित करने से ज्यादा कुछ भी नहीं है। इसलिए उत्तर प्रदेश का अगला
मुख्यमंत्री कौन होने जा रहा है, इसका अनुमान लगाने की बेवकूफी मैं नहीं कर सकता।
लेकिन, एक विश्लेषण इस आधार पर करने की कोशिश कर रहा हूं कि जैसा खुद प्रधानमंत्री
नरेंद्र मोदी और अमित शाह कह रहे हैं कि नए वाले भारत में नई वाली बीजेपी बन रही
है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बाकायदा #IAmNewIndia अभियान चला रहे हैं। इसमें लोगों से इस नए वाले भारत के लिए शपथ लेने को कहा
जा रहा है। ये अब बहुत सलीके से स्थापित हो चुका तथ्य है कि ये नई वाली बीजेपी है।
जिसे नरेंद्र मोदी और अमित शाह ने तैयार किया है। इस आधार पर नया वाला उत्तर
प्रदेश भी तैयार हो गया है और प्रचंड बहुमत मिलने के बाद इस नए वाले उत्तर प्रदेश
में तैयार हुई नई वाली बीजेपी को चलाने के लिए मुख्यमंत्री के तौर पर नया वाला
नेता भी चाहिए।
इस सारे नए वाले आधार पर अगर देखा जाए तो, भारतीय
जनता पार्टी के राष्ट्रीय सचिव और अब मथुरा से शानदार जीत हासिल करने वाले
श्रीकांत शर्मा इस पैमाने पर सबसे फिट बैठते हैं। अगर मैं कह रहा हूं कि श्रीकांत
शर्मा नई वाली बीजेपी में बीजेपी के लिहाज से नए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बनने
के पैमाने पर सबसे फिट बैठते हैं, तो उसकी कई वजहें हैं। 1 जुलाई 1970 को पैदा हुए
श्रीकांत शर्मा अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के रास्ते भारतीय जनता पार्टी में आए
हैं। मथुरा से दिल्ली आए श्रीकांत ने अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद का मजबूत काम
खड़ा किया। और दिल्ली में ही पूरी तरह से बस गए। श्रीकांत को पहली बार बड़ी
जिम्मेदारी पार्टी भारतीय जनता पार्टी के मीडिया प्रभारी के तौर पर मिली। श्रीकांत
शर्मा के साथ एक और बड़ी शानदार उपलब्धि ये है कि वो तीन राष्ट्रीय अध्यक्षों के
मीडिया प्रभारी रहे हैं। नितिन गडकरी, राजनाथ सिंह और अमित शाह के कार्यकाल में
अभी तक मीडिया का प्रभार श्रीकांत के पास ही है। अमित शाह के महासचिव बनने के साथ
ही भारतीय जनता पार्टी के 9 अशोक रोड मुख्यालय में श्रीकांत का बढ़ता प्रभाव साफ
दिखने लगा था। अमित शाह ने राष्ट्रीय सचिव की जिम्मेदारी देकर उसे और प्रभावी बना
दिया। कमाल की बात ये कि मीडिया का प्रभार अभी भी श्रीकांत के ही पास है। 2014 के
लोकसभा चुनावों में मथुरा से श्रीकांत लोकसभा चुनाव लड़ना चाहते थे। लेकिन, रणनीतिक
तौर पर मथुरा से हेमामालिनी को चुनाव लड़ाया गया। लेकिन, इसके बावजूद श्रीकांत ही
मथुरा में बीजेपी नेता के तौर पर जाते रहे। मथुरा के जवाहरबाग में हुई जबर्दस्त
गोलीबारी के बाद हेमामालिनी जब फिल्म की शूटिंग में व्यस्त थीं, उस समय बीजेपी की
तरफ से श्रीकांत ने ही मोर्चा संभाला। 9 अशोक रोड पर मथुरा से आने वाला हर व्यक्ति
को खाना पूछा जाए, ये श्रीकांत ने सुनिश्चित कर रखा था। अमित शाह वाली बीजेपी में मीडिया
के लिए पार्टी को जानने का एकमात्र जरिया श्रीकांत शर्मा ही रहे। माना जाता है कि
श्रीकांत को उत्तर प्रदेश में बड़ी भूमिका देने के लिहाज से ही अमित शाह ने खुद
तैयार किया है। उसका असर भी दिखता है। श्रीकांत शर्मा को लम्बे समय से बीजेपी
दफ्तर में देखने वाले जानते हैं कि श्रीकांत ने किस तरह से मीडिया में बीजेपी की
छवि सुधारने के साथ एक मजबूत नेता की अपनी छवि भी बचाए रखी। मीडिया के बीच कई लोग
श्रीकांत को अमित शाह की प्रतिमूर्ति कहते हैं।

इलाहाबाद में बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह का रोड शो
हो या फिर बनारस में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का रोड शो। दोनों रोड शो में
श्रीकांत शर्मा की भूमिका कितनी अहम थी, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि
बनारस में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इलाहाबाद में अमित शाह की गाड़ी के आगे
चलने वाली खुली जीप में श्रीकांत शर्मा सवार थे। श्रीकांत शर्मा के लिए ये कहा
जाता है कि अमित शाह जो सोचते हैं, उसे मीडिया में सलीके से स्थापित करने का काम
वो कर देते हैं। और सबसे बड़ी बात कि मीडिया प्रभारी रहते श्रीकांत ने ऑफ कैम
ब्रीफिंग वाली परम्परा खत्म करा दी। मथुरा से श्रीकांत एक लाख से ज्यादा मतों से
जीते हैं। अमित शाह अच्छी तरह जानते हैं कि चुनाव नहीं जीते तो, राजनीति खत्म। इस
बात को समझते हुए श्रीकांत ने लोकसभा चुनावों के तुरंत बाद से ही अपनी विधानसभा तैयार
करना शुरू कर दिया था। इसलिए देश के सबसे बड़े सूबे में नई वाली बीजेपी के नए नेता
के तौर पर श्रीकांत शर्मा सबसे तगड़े दावेदार नजर आते हैं। अमित शाह का हर कहा-अनकहा
उत्तर प्रदेश में लागू करने के लिए सबसे बेहतर दांव नजर आता है। हालांकि, ये
नरेंद्र मोदी-अमित शाह वाली बीजेपी है, यहां कोई भी अनुमान लगाना खुद को बेवकूफ
साबित करना हो सकता है।