लग ऐसे रहा है जैसे आजकल पूरा देश ताजा-ताजा बचत करना सीख रहा हो। नए काम की शुरुआत जैसा दिख रहा है। प्रधानमंत्री ने कहा, फिर प्रधानमंत्री से भी बड़ी सोनियाजी ने कहा, फिर सबसे बड़े आदर्श राहुलजी ने कहा। फिर इन लोगों ने करके दिखाना शुरू कर दिया। अब इकोनॉमी की चर्चा हो रही है। लोग इकोनॉमी में चलने लगे हैं। ये मनमोहन-मोंटेक वाली इकोनॉमी नहीं है। ये हवाई जहाज की इकोनॉमी वाली सीट है। इस पर सफर खबर बन रही है।

दिख कुछ ऐसे रहा है जैसे इस बचत क्रांति को देश की हरित क्रांति और दुग्ध क्रांति के बराबर ले जाकर खड़ा कर दिया जाएगा। या शायद उससे भी बड़ी क्रांति हो। शनिवार को वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने दिल्ली से कोलकाता इकोनॉमी क्लास में सफर किया। फिर सोनिया गांधी ने दिल्ली से मुंबई की यात्रा इकोनॉमी क्लास में की। ये अलग बात है कि सुरक्षा के मद्देनजर जो इंतजाम सोनियाजी के लिए जरूरी हैं उसकी वजह से खर्च कम तो हुआ नहीं। क्योंकि, अगर सोनियाजी बिजनेस क्लास में यात्रा करतीं तो, खर्च आता 62,000 रुपए और इकोनॉमी में आगे 5 कतारें बुक की गईं जिसका खर्च आया 55,000 रुपए यानी किराए में बचत हुई सिर्फ 7,000 रुपए की और हल्ला ऐसे हुआ जैसे पूरे देश में बचत आंदोलन की योजना का उद्घाटन हुआ हो। सुरक्षा के लिए जो 3 टाटा सफारी दिल्ली से मुंबई हवाई जहाज में लादकर ले जाई गई उसका खर्च आया 3 लाख रुपए। जिस फ्लाइट में सोनिया मैडम गईं हैं उसी में बिजनेस क्लास में 8 में से 4 सीटें खाली गईं- ये कौन सी बचत है।

सोनिया या किसी भी VVIP के सुरक्षा इंतजामों कोई कोताही नहीं होनी चाहिए। लेकिन, सवाल ये है कि ये संदेश देने की जरूरत क्यों पड़ रही है और किसे संदेश देने की जरूरत पड़ रही है। ये वो, देश है जहां आज भी छोटे-बड़े शहरों में सोने के गहने और बचाई गई रकम घर के किसी कोने में छिपाकर आड़े वक्त में काम आने के लिए रख दी जाती है। ये वो देश है जहां अभी भी 35 प्रतिशत से ज्यादा लोग बचत पर सबसे ज्यादा भरोसा करते हैं। फिर ये संदेश आम जनता को तो देना नहीं है। पिछले 5 साल इन्हीं सोनिया-मनमोहन की सरकार रही है और अगले 5 साल भी इन्हीं की सरकार रहने वाली है। फिर जो, करना है करिए ये नौटंकी क्यों कर रहे हैं।

एक्शन दिखाइए ना। मुझे पूरा खतरा इस बात का दिखता है कि ये सब कुछ दिनों का चोचला भर बनकर रह जाएगा। राहुल शताब्दी में दिल्ली से लुधियाना एक्जिक्यूटिव क्लास में सफर नहीं कर रहे हैं। शशि थरूर बंगाली स्वीट्स में खाना खाकर बिल देते दिख रहे हैं। क्या है ये सब सिर्फ नौटंकी। इससे कितने खर्च बचते होंगे। राहुल गांधी को अपने कुर्ते का कॉलर दिखाकर ये कहने की जरूरत क्यों पड़ रही है कि — सादा जीवन उच्च विचार जरूरी है। सादगी का संदेश इस तरह से देने की जरूरत क्यों आ पड़ी है।

खर्च जहां बचना चाहिए वहां कितना बचा। जब मंत्रिमंडल बना तो, इस बार लोगों को उम्मीद थी कि पिछली सरकार के दौरान कॉरपोरेट्स को कम सैलरी लेने,सादगी से रहने की सीख देने वाला प्रधानमंत्री महोदय मंत्रिमंडल छोटा रखेंगे। कम मंत्रालय रहेंगे तो, गैर जरूरी खर्चे भी बचेंगे। लेकिन, क्या हुआ वही ढाक के तीन पात। इस बार तो, ये बहाना भी नहीं था कि सरकार चलाने के लिए दूसरी पार्टियों का समर्थन जुटाने की मजबूरी थी। कुल मिलाकर ये एक फितूर है जो, कुछ दिनों में खत्म हो जाएगा। तब कोई नया शिगूफा आएगा। जय हो …


8 Comments

नीरज गोस्वामी · September 15, 2009 at 6:02 am

आज सुबह अखबार में समाचार पढ़ कर मन में बिलकुल वोही भाव आये तो आपने व्यक्त किये हैं…ये देश को मूर्ख बनाने की साजिश है…या तो आप अपनी सुरक्षा की परवाह किये बिना इकोनोमी क्लास में यात्रा करें या फिर ये दिखावा बंद करें…ये बचत नहीं भौंडी नौटंकी है…
नीरज

Sanjay Sharma · September 15, 2009 at 6:04 am

अर्थशास्त्र के पारंगत लोग सरकार में हैं और विपक्ष दिवंगत हो गया है.जनता दाल के बदले कढ़ी खा रही है बिना बेसन फेटे. इनके पदयात्रा भी पाखंड के पेट्रोल से परिचालित होता है .

s3Ca24Fnjdnv9QShB.afn2mdGE6A7JDi4oMo0UWdCdXkOPI- · September 15, 2009 at 6:12 am

सामान्य यात्रियों को इन इकानामी क्लासियों की नौटंकी से जो असुविधा हुई है वह भी शामिल कर लीजिये

amitabh tripathi · September 15, 2009 at 6:56 am

आज कांग्रेस के युवराज श्रीमान राहुल गान्धी जी ने शताब्दी ट्रेन से दिल्ली से लुधियाना तक यात्रा की। जिस प्रकार इस पूरे मामले को टीवी के द्वारा महिमामंडित किया जा रहा है उससे सोनिया और राहुल स्वयं को बहुत हल्का करते जा रहे हैं। महाराष्ट्र के विधानसभा चुनावों में मुम्बई पर हुए आतंकवादी आक्रमण और उसके करीब 9 माह बीत जाने पर भी पाकिस्तान के हाथों रोज अपमानित होने, बात बात में अपनी सुरक्षा के लिये अमरिका से गुहार लगाने की नाकामी और चीन की बढ्ती दादागीरी के समक्ष असहाय भारत की स्थिति के साथ मँहगाई से ध्यान हटाने की यह कवायद सबको समझ में आ रही है। ऐसा लगता है कि कांग्रेस देश चलाने से अधिक नाटक कम्पनी बना ले तो बेहतर होगा।

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ · September 15, 2009 at 9:14 am

बहुत सही जा रहा है देश।
-Zakir Ali ‘Rajnish’
{ Secretary-TSALIIM & SBAI }

Kajal Kumar · September 15, 2009 at 3:34 pm

नेता लोगों की किसी ठोर खैर नहीं
चित भी मेरी पट भी मेरी.

Rakesh Singh - राकेश सिंह · September 15, 2009 at 6:06 pm

आपसे १००% सहमत | मुझे तो ये पता ही नहीं था की "…..किराए में बचत हुई सिर्फ 7,000 रुपए की …… सुरक्षा के लिए जो 3 टाटा सफारी दिल्ली से मुंबई हवाई जहाज में लादकर ले जाई गई उसका खर्च आया 3 लाख रुपए। जिस फ्लाइट में सोनिया मैडम गईं हैं उसी में बिजनेस क्लास में 8 में से 4 सीटें खाली गईं- ये कौन सी बचत है।"

आपने तो बखिया उघेड़ दी है | बिलकुल सटीक लिखा है | त्रिपाठी जी लेखनी की धर को बनाये रखें | ऐसी धर तो इलेक्ट्रॉनिक या प्रिंट मीडिया मैं अब देखने को नहीं मिलती | ..

शरद कोकास · September 15, 2009 at 10:46 pm

यह हाथी के दाँत हैं….

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