एफएम ने लोगों के रेडियो सुनने का अंदाज बदल दिया है। तेज, हाजिर जवाब रेडियों जॉकी- फोन नंबरों पर जवाब देकर इनाम जीतते श्रोता। मेरे शहर इलाहाबाद में भी दो एफएम रेडियो शुरू हो गए हैं जो, शहर में युवाओं के मिजाज से मेल भी खूब खा रहा है। लेकिन, इन सबके बीच विविध भारती प्रसारण की बात ही कुछ निराली है। इलाहाबाद में मेरे मोहल्ले दारागंज में एक नया जेंट्स ब्यूटी पार्लर खुला है। छोटे भाई के साथ मैं आज जब दाढ़ी बनवाने पहुंचा तो, एसी की ठंडी हवा में मैंने मसाज करने को भी बोल दिया। और, दाढ़ी बनवाते-बनवाते विविध भारती का फोन टाइम कार्यक्रम शुरू हो चुका था। ये कार्यक्रम इतना दिलचस्प था कि मैं इसे आप सबसे बांट रहा हूं।

फोन की घंटी बजी और प्रस्तोता ने कार्यक्रम शुरू किया। फोन टाइम में आपका स्वागत है, मैं हूं अविनाश श्रीवास्तव।
जी, बताइए क्या नाम है आपका।
जी, गीतांजलि।
आप किस क्लास में पढ़ती हैं।
क्लास 8 में
हां, आपकी आवाज से लगा कि आप अभी बहुत छोटी हैं। क्या सुनेंगी आप
जी देशप्रेमी फिल्म का गीत लेकिन, पहले मेरी दोस्त का नाम मैं ले लूं
जी बिल्कुल
फिर अवाज आई देशप्रेमी फिल्म का गाना हमारे पास नहीं है। इसलिए हम आपको फना फिल्म का गीत सुनाते हैं। उम्मीद है आपको पसंद आएगा
देश रंगीला रंगीला …

फोन की घंटी के साथ दूसरे श्रोता लाइन पर थे।
जी बताइए कौन बोल रहे हैं।
राजेंद्र बोल रहा हूं
हां, राजेंद्रजी बताइए। क्या सुनना चाहते हैं
राजेंद्र ने गाना सुनने से पहले एक दूसरा सवाल पूछना चाहा
राजेंद्र ने पूछा- ये बताइए क्या अभी जो हमारी बात हो रही है वो, रिकॉर्ड हो रही है
जी, हां बिल्कुल रिकॉर्ड हो रही है
लेकिन, हम बहुत दिन से फोन लगा रहे थे, घंटी जाती है लेकिन, फोन ही नहीं उठता
नहीं, ऐसा नहीं है। आप फोन करेंगे तो, बिल्कुल उठेगा। देखिए ना आखिर हमारी-आपकी बात हो रही है ना।
नहीं लेकिन, हम दो साल से फोन लगा रहे हैं और आपका फोन नहीं उठता। इ समझिए कि दो साल से लगातार हम फोन लगा रहे हैं।
नहीं आप फोन लगाएंगे तो, बिल्कुल लगेगा हो सकता है फोन व्यस्त रहा हो जैसे देखिए अभी आपसे बात हो रही है तो, दूसरे का फोन कैसे मिल पाएगा। बताइए क्या सुनेंगे
तब तक श्रोता का उत्साह बढ़ चुका था। राजेंद्र ने कहा- अभी दो नए एफएम खुले हैं लेकिन, हमें विविध भारती के अलावा कोई सुनना पसंद नहीं है। हम दूसरे एफएम एकदम नहीं सुनते।
राजेंद्रजी ऐसी बात नहीं है सभी रेडियो अच्छे हैं। सबकी पसंद अलग-अलग हो सकती है।
नहीं सर, विविध भारती की बात ही अलग ही है।
अब तक राजेंद्र गाना नहीं बता पाए थे
अविनाश श्रीवास्तव ने फिर गाना सुनाने के बारे में पूछा तो, राजेंद्र ने कहा हम अपने दोस्तों का नाम ले लें
जी बिल्कुल
फिर राजेंद्र ने एक लाइन से अपनी कई दोस्तियां, रिश्तेदारियां निभाते हुए उन सबके नाम विविध भारती के फोनटाइम में सुना दिए
प्रस्तोता ने फिर टोंका तो, राजेंद्र ने ये गाना सुनाने की फरमाइश की
तू जो हंस हंस के सनम मुझसे बात करती है सारी दुनिया को यही बात बुरी लगती है

गाना खत्म होने के बाद तीसरे श्रोता लाइन पर थे संदीप सरोज
जी, संदीप क्या करते हैं आप जी, हाईस्कूल का एग्जाम खत्म हुआ है
अच्छा तो, आप खाली होकर फोन टाइम में फोन कर रहे हैं
जी
और, क्या कर रहे हैं कंप्यूटर कोर्स भी कर रहा हूं
संदीप, लगता है आपने रेडियो बहुत तेज कर रखा है
जी, अभी तक तेज सुन रहा था अब धीमा कर दिया है
आपके बगल में कौन हंस रहा है
जी, मेरी बहन है। बहुत दिन से फोन नहीं लग रहा था। मेरी बहन भी हमेशा विविध भारती सुनती है।
पीछे से लगातार संदीप की बहन के हंसने की आवाज आ रही थी
अविनाश ने फिर पूछा कौन सा गाना सुनेंगे
सदीप ने भी अपने जान-पहचान के सारे नाम गिनाए जिससे, उसकी अच्छी छनती रही होगी और एक और गाना पेश

एक छोटे से ब्रेक के बाद चौथा श्रोता हाजिर था
मैं फोन टाइम से अविनाश बोल रहा हूं, आप कौन
जी, मैं मिर्जापुर के गांव से सुजाता बोल रही हूं
जी, सुजाता बताइए क्या करती हैं आप
जी घर का काम करती हूं
पढ़ाई कितनी हुई है आप
हंसते-खिलखिलाते सुजाता ने बताया कि पढ़ी-लिखी नहीं है
फिर प्रस्तोता ने कहा- पढ़ाई क्यों नहीं की, पढ़ाई तो बहुत जरूरी है
सुजाता ने कहा- जी, पिताजी हमारे नहीं थे, मां ने पाला-पोसा, कम उमर में शादी भी हो गई
तो, फिर अब पढ़ाई कीजिए।
ठीक है हम अपने घर जाएंगे तो, अम्मा से कहेंगे
अपनी सास से भी तो कह सकती हैं
तब तक बीच में ही वो बोल पड़ी अच्छा हम सबका नाम ले लें
जी, जरूर
फिर सुजाता ने अपनी ननद, सास, चाचा सबका नाम ले लिया
फिर थोड़ा शरमाते-सकुचाते-हंसते बोली हम अपने पति का नाम बताएं
जी, बताइए
हमारे पति का नाम है- कंपोटर
प्रस्तोता भी उसको पढ़ाने के अपने अभियान पर अडिग था। फिर बोला तो, अपने पति से कहिए पढ़ाने के लिए। वैसे कौन सा गाना सुनना चाहती हैं
जी, हम कहेंगे। नगीना फिल्म का गाना सुनाएंगे
जी, कौन सा गाना सुनना चाहती हैं
वो, मैं तेरी दुश्मन वाला
गाना शुरू हो गया मैं तेरी दुश्मन.. दुश्मन तू मेरा .. मैं नागिन तू सपेरा

अब तक चार श्रोताओं का ही फोन शामिल हो पाया था
पांचवां फोन था काशीपुर के उदयभान का
उदयभान ने फोन किया और सीधे गाना बताया कहा- मुझे गाना सुना दीजिए, तुझको ही दुल्हन बनाऊंगा, वरना कुंआरा मर जाऊंगा
अविनाश ने पूछा- क्या करते हैं
जी, पढ़ रहा हूं
बताइए कौन सा गाना सुनेंगे
तब तक बीच में ही उदयभान का दोस्त गाने के बोल बताने लगा- तुझको ही दुल्हन बनाऊंगा, वरना कुंआरा मर जाऊंगा
अविनाश ने कहा- अभी पेश करता हूं लेकिन, गाना लाइब्रेरी में नहीं था। और, खेद व्यक्त करते हुए उसकी जगह बजने लगा- एक ऊंचा लंबा कद, दूजे सोणिये तू हद

गाना खत्म फिर बजी फोन की घंटी
जी, मैं अक्षय कुमार बोल रहा हूं
अक्षयजी बताइए कौन सा गाना सुनेंगे
जी, पहले मेरे भतीजे से बात कर लीजिए
अगले ही क्षण भतीजा फोनलाइन पर था। जी, मैं बृजेश कनौजिया बोल रहा हूं
लाडला फिल्म का गीत सुनाएंगे क्या
जी, जरूर वैसे आप क्या करते हैं
बृजेश- जी मैं मुंबई से हार्डवेयर का कोर्स करता हूं। अभी छुट्टियों पर घर आया हूं
लाडला फिल्म का गाना नहीं था अविनाश ने दूसरा गाना सुना दिया
और, सोमवार, बुधवार, शुक्रवार को 10.30 से 11 बजे तक चलने वाले फोन टाइम कार्यक्रम समाप्त हुआ।

दरअसल, अभी भी देश के एक बहुत बड़े हिस्से के लिए रेडियो-टीवी पर सुनाई-दिखाई देना सबसे बड़ा रोमांच बना हुआ है। आधे घंटे के फोनटाइम में छे लोगों ने अपनी जिंदगी, पढ़ाई-लिखाई, परिवार, यार-दोस्तों या ये कहें जो, कुछ सुनने वाले को महत्व का लगता था, उसे रेडियो प्रस्तोता के साथ बंटा लिया। न तो, गाना सुनने वाले को बहुत जल्दी थी न, गाना सुनाने वाले को। लेकिन, मेरा टाइम खत्म हो रहा है क्योंकि, मेरा मसाज पूरा हो चुका है।
और, अगला कार्यक्रम पेश है लोकगीत
बोला चलै ससुराल लैके..
तब तक मैं पैसे देकर घर लौट गया।


10 Comments

अतुल · April 14, 2008 at 10:59 am

दिलचस्प है, इसमें दो राय नहीं

डॉ. राम चन्द्र मिश्र · April 14, 2008 at 12:58 pm

इलाहाबाद मे रहते हुये समय मिले तो सम्पर्क कीजियेगा।
धन्यवाद।

Gyandutt Pandey · April 14, 2008 at 1:55 pm

अरे, इस कार्यक्रम का तो दफ्तर से लौटते हुये मैं अक्सर बन्धुआ श्रोता हुआ करता हूँ। और बहुत विविधता मिलती है इसमें – शहरी/अंचली जीवन की।

mamta · April 14, 2008 at 1:58 pm

अरे वाह बड़ी बढ़िया लगी आपकी ये पोस्ट।
खूब दिलचस्प बिल्कुल रेडियो सुनने का मजा आया।

रवीन्द्र प्रभात · April 14, 2008 at 3:31 pm

सचमुच दिलचस्प है !

mahashakti · April 14, 2008 at 4:21 pm

आप जब चाहिऐ मिलना हो जायेगा। मैने आपका नम्‍बर नोट कर लिया है जल्‍द ही बात होगी।

आपके द्वारा प्रस्‍तुत कार्यक्रम बहुत अच्‍छा लगा।

डा०रूपेश श्रीवास्तव · April 14, 2008 at 6:40 pm

कितना मन लगाकर सुना रेडियो को हर्ष भइया अगर हमने भी सुना होता तो आज हम भी कुछ कह पाते इसके बारे में लेकिन कुल मिला कर जानदार-शानदार…….

Sanjay Sharma · April 15, 2008 at 5:46 am

बार बार फ़ोन न लग पाने की शिकायत :- बिल्कुल मस्त ! सही सोंच , पब्लिक रेडियो ,टीवी अखबार मे अपनी आवाज़ ,फोटो , लिखाई को दर्ज कराने को उत्सुक रहती है . रेडियो सुनाने के लिए धन्यवाद.

अजित वडनेरकर · April 15, 2008 at 10:22 pm

दिलचस्प पोस्ट

हर्षवर्धन · April 16, 2008 at 10:35 am

विविध भारती की विज्ञापन प्रसारण सेवा के इलाहाबाद केंद्र की रेडियोवार्ता आप लोगों को पसंद आई। शुक्रिया।

Comments are closed.

Related Posts

राजनीति

बुद्धिजीवी कौन है?

केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद के बुद्धिजीवियों को भाजपा विरोधी बताने के बाद ये सवाल चर्चा में आ गया है कि क्या बुद्धिजीवी एक खास विचार के ही हैं। मेरी नजर में बुद्धिजीवी की बड़ी सीधी Read more…

राजनीति

स्वतंत्र पत्रकारों के लिए जगह कहां बची है?

केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने बुद्धिजीवियों पर ये आरोप लगाकर नई बहस छेड़ दी है कि बुद्धिजीवी बीजेपी के खिलाफ हैं। मेरा मानना है कि दरअसल लम्बे समय से पत्रकार और बुद्धिजीवी होने के खांचे Read more…

अखबार में

हत्या में सम्मान की राजनीति की उस्ताद कांग्रेस

गौरी लंकेश को कर्नाटक सरकार ने पूरे राजकीय सम्मान के साथ अन्तिम विदाई दी। गौरी लंकेश को राजकीय सम्मान दिया गया और सलामी दी गई। इस तरह की विदाई आमतौर पर शहीद को दी जाती Read more…