घर-गांव में अकसर कुछ लोगों के लिए कहा जाता है कि ये तो हद कर देता है। जब देखो तब मांगता रहता है। घर में भी कुछ लोग होते हैं जो, किसी दूसरे को कुछ भी मिला तो, भले ही कुछ देर पहले उनको भी मिला हो, फिर मांगने लगते हैं। दरअसल ये एक पूरी की प्रजाति है जो, मानती है कि मांगे बिना कुछ मिल ही नहीं सकता। चाहे वो मांगना अपने लिए हो या फिर अपने हित में किसी और के लिए।


वैसे ऐसे भीख मांगने वाले समाज में बड़ी हेय दृष्टि से देखे जाते हैं। लेकिन, राजनीति में भिखमगते बड़ा ऊंचा स्थान पा गए हैं। इतना ऊंचा कि भारत रत्न मांगने लगे हैं। कमाल ये है कि भारत रत्न कोई भी अपने लिए नहीं मांग रहा है। अपने लिए क्यों नहीं मांग रहे हैं उसकी वजह अलग है। कुछ जिंदा लोगों के लिए मांग रहे हैं तो, कुछ को मुर्दों को भारत रत्न समर्पित कर उनका सच्चा उत्तराधिकारी होना साबित करना है। सब अपने हित के लि ही जिंदा या मुर्दा को भारत रत्न दिलाना चाहते हैं अभी तक एक बी निष्पक्ष प्रस्ताव भारत रत्न के लिए नहीं आया है।

इसकी शुरुआत की ताजा-ताजा भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार बने लाल कृष्ण आडवाणी ने। अटल बिहारी बाजपेयी ने आडवाणी का रास्ता साफ किया तो, आडवाणी ने इसका धन्यवाद देने का अनोखा तरीका खोजा। अटल बिहारी बाजपेयी के लिए भारत रत्न की मांग कर डाली। अटल बिहारी बाजपेयी निर्विवाद तौर पर देश के ऐसे नेताओं में हैं जिनका स्थान पार्टी से अलग भी बहुत ऊंचा है लेकिन, आडवाणी की ओर से ये प्रस्ताव आते ही कांग्रेस ने इसे राजनीतिक बढ़त लेने की कोशिश के तौर पर देखा और सिरे से खारिज कर दिया।

लेकिन, राजनीतिकों की यही खासियत होती है कि एक बार किसी भी तरह का मुद्दा हाथ लगे तो, उसे थोड़ा कम-थोड़ा ज्यादा के अंदाज में सभी दल आजमा लेना चाहते हैं। वोट बैंक जुटाने से लेकर भारत रत्न बटोरने तक ये फॉर्मूला चालू है। आडवाणी ने बाजपेयी के लिए मांगा तो, मायावती को लगा कि यही सही मौका है कांशीराम का कर्ज उतारने का। मायावती ने कांशीराम को भारत रत्न देने की मांग कर डाली। कांशीराम ने देश में दलितों के उत्थान के लिए जितना किया, मेरा मानना है कि उतना डॉक्टर भीमराव अंबेडकर भी चाहकर नहीं कर पाए थे। लेकिन, क्या मायावती कांशीराम के लिए भारत रत्न सिर्फ इसलिए नहीं मांग रही हैं कि किसी तरह से सवर्णों के ज्यादा नजदीक जाने के आरोपों को राजनीतिक तौर पर खारिज किया जा सके।

करुणानिधि की पार्टी डीएमके करुणानिधि के लिए भारत रत्न चाहती है। तो, अजीत सिंह को अपने पिता चरण सिंह अचानक बहुत महान लगने लगे। अजीत सिंह कह रहे हैं कि भारत रत्न तो, चरण सिंह ही होने चाहिए। अभी शायद हर प्रदेश से कई नामों का आना बाकी है। और, हालात जो दिख रहे हैं इसमें भारत रत्न के लिए भी लॉबी तैयार करनी पड़ेगी।

वैसे राजनीति सहित ज्यादातर क्षेत्रों में हाल यही है भिख मंगता समाज ही आगे निकल पाता है। मंगतई का सबसे बेशर्म फॉर्मूला जो, हमारी आपकी बातचीत में भी अकसर आता है, खूब इस्तेमाल हो रहा है। फॉर्मूला ये कि कोई भीख नहीं देगा तो, तुमड़ी थोड़ी न तोड़ देगा। कोई किसी काम के लिए, किसी पद के लिए कितना ही योग्य न हो, अगर वो मांग नहीं रहा है या उसक लिए कोई मांग नहीं रहा है तो, फिर समय से तो, कुछ मिलने से ही रहा। अब भारत रत्न देने का मापदंड तो तैयार हो नहीं सका है। सीधा सा फॉर्मूला एक लाइन का ये कि ऐसा व्यक्ति जिसने देश के लिए कुछ अप्रतिम किया हो। अप्रतिम करने के भी अपने-अपने कायदे हैं।

इतनी मारामारी में ये भी हो सकता है कि मॉल में मिलने वाली छूट की तरह भारत रत्न देने के लिए पहले आओ-पहले पाओ का फॉर्मूला काम में लाया जाए। इसलिए भैया लगे हाथ मैं भी भारत रत्न के लिए खुद को प्रस्तावित करता हूं। मेरे लिए कोई दूसरा अभी भीख मांगने को तैयार नहीं है। इसलिए मेरे नाम का प्रस्ताव मैं खुद कर रहा हूं। अलग-अलग पार्टियों, प्रदेशों, विचारधारा की तरह ब्लॉग समाज से अभी तक भारत रत्न के लिए मैं अकेला उम्मीदवार हूं। मैं खुश हूं कि अब तक की जिंदगी में पहली बार कुछ मांग रहा हूं वो, भी भी भारत रत्न। जय हो भिखमंगता समाज की, मगतई की अवधारणा की।


7 Comments

Sanjay · January 13, 2008 at 7:42 pm

इन नेताओं को भारत रत्‍न नहीं जूते लगाने चाहिए. देख कर कोफ्त होती है कि कितनी गिरी हुई मानसिकता है इनकी.

Anonymous · January 13, 2008 at 8:39 pm

हर्षवर्धन जी आपने अच्छी चोट की है, थोड़ा और गहरे उतरना चाहिए था। फिर भी बधाई। जेपी नारायण

Gyandutt Pandey · January 14, 2008 at 2:10 am

अपने पास क्लाउट तो नहीं है; भगवान से प्रार्थना ही कर सकते हैं कि आपको भारत रत्न सम्मान मिल जाये।

दिनेशराय द्विवेदी · January 14, 2008 at 2:24 am

भारत रत्न तो नही, पर नवरत्नों की सूची बन रही है। अडवानी का नाम सबसे ऊपर।

Sanjay Sharma · January 14, 2008 at 9:10 am

बामपंथी ने २०-२५ साल के मुख्यमंत्रित्व काल के लिए ज्योति बाबू को आगे बढाया है .लालू का समर्थन है .बंगाल रत्न भारत रत्न बनने की तैयारी मे है . मेरे ख्याल मे ज्योति वसु फिट और हिट है .अकेले बंगाल को तरीके से संभाला .सोनिया लालू के समर्थन से मेरी सोंच को दिशा मिलेगी . अटल जी को मरणोपरांत ही कुछ दिया जा सकता है वो भी जब प्रधान मंत्री आडवाणी होंगे .

harsh · January 14, 2008 at 8:37 pm

Tamam Rajnitigya Bharat Ratna ke liye sirf apne kheme ki hi wakalat kar rahe hain. Kisi ko apne alawa aur kuchh sujhta hi nahi. Jabki Bharat Ratna ke asli dawedar hamesha creative log hi hone chahiye, jaise wagyanik, sahityakar, khiladi, abhineta, patrakar wagairah-2. Aaj ke netao ko bharat ratna to kya kisi bhi tarah ke ratna ki mang nahi kani chahiye. Aise hi unhone apni thu-2 kara rakhi hai, bachi-khuchi ejjat bhi jati rahegi is bandarbant me.

आशीष महर्षि · January 18, 2008 at 6:43 am

अब समय आ गया है कि गली मोहल्‍ले से लेकर संसद के गलियारों तक में इन सफेद कौवों को दौड़ा दौड़ा कर मारा जाए

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