लीजिए साहब सब शांति से निपट गया। बड़ा बुरा हुआ। कोशिश तो पूरी हुई थी फिर भी न तो कोई मार पीट हुई, न दंगा। अब जब कुछ नहीं हो पाया तो, चलो भाई हाथ मिला लेते हैं। आखिर भरोसा जो मिल गया है कि शांतिपूर्वक सब काम हो जाएगा।

ई भरोसा हो गया है कि अब उन्हें घर तो मिल जाएगा। उन्हीं लोगों के भरोसे पर वो शांत हो गए हैं। जिनसे वो, टीवी चैनल पर चिल्ला-चिल्लाकर पूछ रहे थे- क्या मैं आतंकवादी दिखता हूं? अरे मैं कोई सीरियल किलर थोड़े ना हूं, मैं तो सीरियल किसर हूं?

जवाब किसी ने दिया नहीं लेकिन, सच्चाई तो यही है कि तुम हरकत तो आतंकवादी जैसी ही कर रहे थे। परदे पर दूसरों की बीवी पर बुरी नजर रखते थे, घर तोड़ने की कोशिश करते थे। अब देश में तोड़फोड़ करने की कोशिश कर रहे हो। चिल्ला-चिल्लाकर जो बोल रहे थे कि क्या मैं आतंकवादी हूं, मुझे घर इसलिए नहीं मिल रहा है कि मैं मुसलमान हूं। ये क्या है आतंकवाद नहीं है। लगे हाथ इमरान हाशमी अपने माई बाप महेश भट्ट के साथ ये भी बताए जा रहे कि ऐसा नहीं है। मेरी पत्नी तो हिंदु है लेकिन, मैं तो सबके अधिकारों की बात कर रहा हूं। बस फिर क्या था- टीवी चैनलों पर देश की सेक्युलर जमात के इकलौते अगुवा दंपति जावेद अख्तर और शबाना आजमी की पुरानी बाइट और ग्राफिक्स प्लेट पर किसको कब मुंबई में मुसलमान होने की वजह से घर नहीं मिला। सब बैक टू बैक चलने लगा।

अब ई हाशमी और भट्ट भइया को कौन बताए कि आतंकवाद हमेशा AK 47 उठाकर गोली चलाने से ही तोड़े न आता है। जो, तुम कर रहे थे। वो, भी तो वही था। दो धर्मों के बीच कटुता फैलाने की पूरी कोशिश की। जब तुम्हारे लाख भड़काने पर भी कोई नहीं भड़का तो, तुमने हाथ मिला लिया। तर्क ये भी कि भई सब शांति से करना है तो, ये तो पहले भी कर सकते थे। औ अगर सही में तुमको सिर्फ मुसलमान होने की वजह से घर नहीं मिला तो, लड़ो। काहे चुप बैठ गए। इसीलिए कि अब तो तुमको कोई भाव भी नहीं दे रहा। सच्चाई तो यही है कि तुमने जो सवाल पूछे थे वो, करने की कोशिश तो पूरी की थी लेकिन, हाय जालिम जमाना तुम्हारे साथ खड़ा नहीं हुआ। और, सब गड़बड़ हो गया। अभी भी तुम्हारी गिनती सेक्युलर जमात के अगुवा लोगों के साथ नहीं हो पाएगी। चलो मौका मिले तो, फिर कोशिश करना। मामला बन गया तो, रील लाइफ से रियल लाइफ में भी हीरो बन जाना। न बन पाना तो, फिर हाथ मिला लेना। हिंदुस्तान में इस बात की आजादी तो सबको है कि थोड़ी कूबत हो तो, कुछ भी करके शांति से हाथ मिला लो …


11 Comments

Suresh Chiplunkar · August 11, 2009 at 6:27 am

उत्तम चाँटा रसीद किया है आपने… फ़िर भी ये दोनो गिरे हुए लोग "सेकुलर" ही माने जायेंगे…

अर्शिया अली · August 11, 2009 at 8:01 am

Dhaardaar Vyangya.
{ Treasurer-T & S }

अंशुमाली रस्तोगी · August 11, 2009 at 8:14 am

बहुत खूब। कसकर लिखा है।

cmpershad · August 11, 2009 at 5:36 pm

अज़हरुद्दिन ने भी तो यही राग अलापा था और अब सांसद बना बैठा है:(

वाणी गीत · August 12, 2009 at 2:56 am

बात तो विचार करने की है…!!

अजित वडनेरकर · August 12, 2009 at 4:52 am

बहुत सही जूते लगाए हैं।
हाशमी, भट्ट, शबाना, जावेद…सब को लानते भेजो…

Harinath · August 12, 2009 at 11:51 am

बढ़िया लिखा है.

Mrs. Asha Joglekar · August 13, 2009 at 8:00 pm

Aison ko sabak milna jarooree hai par……………kaise ?

hem pandey · August 14, 2009 at 9:40 am

खरी बात कहने के लिए साधुवाद.

Rakesh Singh - राकेश सिंह · August 14, 2009 at 4:04 pm

हर्षवर्धन जी करार थप्पड़ मारा है |

ये लोग बेशर्म हैं , कुछ दिनों बाद ही ये अपनी बेशर्मी फिर से दिखाने आ जायेंगे |

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