हमारी बिटिया हुई तो, थोड़ा सा एक जो समाज में बेटा होने की खुशी होती है उससे थोड़ी सी कम खुशी के साथ लोग मिलते दिखे। जमकर जो खुश भी थे वो, लक्ष्मी के आने की बधाई दे रहे थे और साथ ही ये भरोसा भी कि अरे पहली लड़की हो या लड़का कोई फर्क नहीं पड़ता। अच्छी बात ये कि हमारा पूरा परिवार और ज्यादातर मित्र, रिश्तेदार प्रसन्न थे। हां, बीच-बीच में कोई शुभचिंतक बोलता कि पैसा खर्चा करावै आइ ग। साथ ही कोई ये कहके बात बनाने की कोशिश करता कि लक्ष्मी आई तबै तो जाई। ज्यादातर लोग कह रहे थे कि पहली बिटिया शुभ होती है। साथ ही ये भी लड़की पिता पर जाए तो, और भाग्यवान होती है।

जिस दिन बिटिया हुई उसके दूसरे दिन हमारी बड़ी दीदी कर्नलगंज इंटर कॉलेज से देर से आईं। थकी सी आईं दीदी ने बताया बेटियों को बचाने के लिए रैली निकाली गई थी। दूसरे दिन के अखबारों में खबर थी बेटियों ने उठाई बेटियों को बचाने की आवाज हेडलाइन के साथ ये खबर और तस्वीर छपी थी। ये सब सुखद संकेत हैं। समाज किस तरह से बदल रहा है। बेटियां बोझ नहीं रहीं। हां, ज्यादातर लोग ये जरूर चाहते हैं कि एक बेटा भी हो जाए तो, बढ़िया। थोड़ा और वक्त गुजरेगा तो, शायद समाज का ये दबाव भी घट जाएगा।

हमारी बिटिया के लिए जो पहला कपड़ा तोहफे में आया। उसके डिब्बे पर बेटियों को बचाने की अपील के साथ मुस्कुराती बिटिया छपी थी। साथ में पोलियो ड्रॉप की दो बूंद से बच्चे को जिंदगी भर के लिए स्वस्थ रखने की नसीहत भी। पोलियो मुक्त भारत के निर्माण की नसीहत देने वाला डिब्बा अच्छा लगा।


14 Comments

MANOJ KUMAR · November 10, 2009 at 7:34 pm

बड़ी अच्छी सोच से भरी रचना। आपको बधाई बच्ची को आशीष।

राज भाटिय़ा · November 10, 2009 at 7:58 pm

बहुत सुंदर जी बिटिया होने की बहुत् बधाई, क्या बेटा क्या बेटी है तो दोनो ही घर की रोनक, आप ने बहुत सुंदर लिखा,बिटिया को बहुत बहुत प्यार ओर आशीष.

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi · November 10, 2009 at 9:06 pm

बेटी हुई तो समझिए आप के घर बहार आ गई है। बधाई!

अजित वडनेरकर · November 10, 2009 at 9:10 pm

बधाई।
लक्ष्मी, सरस्वती का वास हो आपके घर। पहली संतान पुत्री हुई यह शुभ है। अब इनके लल्ला से भैया भी आ जाएं जल्दी से। फिर बड़ा सा डण्डा। चाहें तो अभी लगा लें, जैसे हमने लगाया हुआ है। एक बबुआ के बाद।
जैजै

Udan Tashtari · November 11, 2009 at 12:29 am

बहुत बधाई!!!

उन्मुक्त · November 11, 2009 at 12:51 am

पिता बनने की बधाई।

प्रवीण त्रिवेदी ╬ PRAVEEN TRIVEDI · November 11, 2009 at 2:14 am

बेटी हमेशा पिता के लिए अलग और बिलकुल भावात्मक अनुभव साबित होती है , और इसे मै पूरे दावे से कह सकता हूँ!
पिता बनने की बधाई।बहुत बधाई!!!

बच्ची आपको खूब तंग करे ,परेशान करे ……इसके सिवाय कोई दुआ निकल नहीं पा रही है!

श्यामल सुमन · November 11, 2009 at 2:20 am

बहुत बहुत बधाई।

सादर
श्यामल सुमन
09955373288
http://www.manoramsuman.blogspot.com

संजय बेंगाणी · November 11, 2009 at 6:27 am

आप भी मानेगें बेटी पिता को ज्यादा प्यारी होती है.

सैयद | Syed · November 11, 2009 at 8:52 am

बहुत बहुत बधाई!

Mrs. Asha Joglekar · November 11, 2009 at 2:19 pm

बहुत बहुत बधाई बिटिया के आने पर । फोटो बहुत सुंदर हैं ।

ज्ञानदत्त पाण्डेय| Gyandutt Pandey · November 11, 2009 at 4:17 pm

अच्छा, सोमवार को सड़क के दोनो ओर स्कूली बच्चे चल रहे थे। आपकी बिटिया का ऐसा भव्य स्वागत!
बहुत बधाई मित्र!

चंदन कुमार झा · November 11, 2009 at 5:33 pm

बहुत बहुत बधाई ।

Rakesh Singh - राकेश सिंह · November 13, 2009 at 3:36 pm

हर्ष जी आने मैं थोडी देर हो गई | क्षमाप्रार्थी भी हूँ |

मेरी तरफ से हार्दिक शुभकामनाएं और बधाई | हम भी आरम्भ से ये चाहते थे की कम से कम एक लड़ती तो जरुर हो … पर इश्वर ने दोनों ही लड़के ही दिए … हम मियां – बीबी को थोडा धक्का सा लगा था जब ५-६ महीने के गर्भ से ही ये बता दिया गया था की ये लड़का है |

अपने अनुभव के आधार पे इतना जरुर कहूंगा की लड़की बिना घर मैं रौनक नहीं आती है | लड़की सच मैं लक्ष्मी ले कर आती है |…

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