यही वो बूथ है जहां मैंन अपना, पत्नी का सारा जरूरी दस्तावेज जमा किया था

वैसे ही दो दिन से कष्ट में हूं। जब से साफ हुआ कि मेरे प्रयास के बाद भी मेरा और पत्नी का नाम नोएडा की मतदाता सूची में शामिल नहीं हो सका। चुनाव आय़ोग ने बड़ी मेहनत की है। पिछले कुछ चुनावों में मतदान का प्रतिशत बढ़ा है तो उसमें बड़ी मेहनत चुनाव आयोग के जागरुकता अभियानों की है। चुनाव आयोग ने बड़े विज्ञापन देकर सबको मतदाता बनाने की शानदार कोशिश की है। इसीलिए मैंने भी इस बार नोएडा की मतदाता सूची में अपना और पत्नी का नाम जुड़वाने के लिए जरूरी दस्तावेज पर्थला खंजरपुर के इसी प्राथमिक विद्यालय में जाकर जमा कर दिया था। फॉर्म लेने वाले से ये भी पूछा कि आगे क्या करना है। उसने बताया कि आपके घर पर मतदाता पहचान पत्र पहुंच जाएगा। फिर होली आई और दूसरी वजहों से दोबारा पता नहीं कर पाया। फिर जब चुनाव आयोग की वेबसाइट पर दिए नंबर पर शिकायत की तो मेरे मोबाइल पर संदेश भी आ गया कि जल्द ही आपके घर पर वोटर आईकार्ड पहुंच जाएगा। लेकिन, जब दो दिन बाद फिर यानी 7 अप्रैल को उसी नंबर पर फोन करके तफ्तीश की तो पता चला कि मेरा तो फॉर्म ही नहीं पहुंचा है। बीएलओ यानी बूथ लेवल अधिकारी ने उस फॉर्म को आगे ही नहीं बढ़ाया। फिर ये पोस्ट पढ़ ली। शर्मिंदा हो रहा हूं कि क्यों और ज्यादा तफ्तीश नहीं की। लेकिन, सवाल ये है कि क्या संबंधित बूथ के अधिकारी और संबंधित लोगों पर लानत नहीं भेजी जानी चाहिए। उनके ऊपर दंडात्मक कार्रवाई नहीं होनी चाहिए। ये मामला सिर्फ मेरा या मेरी पत्नी का नहीं है देश में जाने कितने लोग उत्साह में फॉर्म 6 भरकर मतदान केंद्र पर गए होंगे और उनका फॉर्म जाने किस वजह से मतदाता सूची में शामिल नहीं हुआ होगा। क्या इसकी चिंता चुनाव आयोग नहीं करेगा। क्या चुनाव के बाद ऐसे मामलों पर कार्रवाई होगी।