सुप्रीमकोर्ट ने नोएडा में बन रही मायावती की मूर्तियों पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। सुप्रीमकोर्ट का कहना है कि वो तब तक इसमें दखल नहीं दे सकती जब तक ये साबित न हो जाए कि इसमें जनता के पैसे का गलत इस्तेमाल हो रहा है। अब मुझे समझ में नहीं आता कि जनता के पैसे से सैकड़ो हाथी और मूर्तियां बनवाना दुरुपयोग नहीं तो क्या जनता की भलाई है?

लगे हाथ इसे भी पढ़ लीजिए – पत्थर के सनम


6 Comments

महेन्द्र मिश्र · July 10, 2009 at 8:07 am

बहत सटीक बात की है आपने .

अंशुमाली रस्तोगी · July 10, 2009 at 8:57 am

निश्चित की जनता की भलाई के लिए है क्योंकि राजनीति में जनता नहीं मूर्तियां अहम होती हैं।

Pt.डी.के.शर्मा"वत्स" · July 10, 2009 at 1:09 pm

माया महाठगनी हम जानि……:)

डॉ. मनोज मिश्र · July 10, 2009 at 3:22 pm

अब यही सब तर्क सामने आयेंगे.

सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी · July 11, 2009 at 2:37 pm

अब हम क्या कहें, आपको अगर ऐसा नहीं लगता तो आपको यूपी आना चाहिए। आधी आबादी बहन जी की माया पर लट्टू है, गौरवान्वित है और नाच रही है। बाकी आधे ताली बजा रहे हैं।:)

मुझे मालूम है कि आप इलाहाबाद से हैं। अब कोई ये न पूछे कि इलाहाबाद कहाँ है।

Harsh · July 13, 2009 at 12:23 pm

achchi post lagi sahi likha hai aapne… vaise harsh ji mera manna hai vyakti ki pahchaan tyag samarpan kaam se hoti hai na ki balua patthar ki murti , haathi ki pratimaye lagane se .. yah janta ki gari kamayi ke paise ka khula durupayog hai………

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