सोमनाथ से अयोध्या की रथयात्रा के दौरान आडवाणी के साथ अटल, गोविंदाचार्य और कल्याण सिंह

भ्रष्टाचार के खिलाफ लालकृष्ण आडवाणी की रथयात्रा को पीएम बनने का आखिरी दांव मान रहे हैं। काफी हद तक सही भी है। लेकिन, बड़ी सच्चाई ये है कि बीजेपी में आडवाणी के अलावा कोई ऐसा राष्ट्रीय नेता भी तो नहीं है जो, पूरे देश में एक समान दमदारी से रथयात्रा कर सकता हो। इस बार की रथयात्रा की भी असली परीक्षा उत्तर प्रदेश में ही होगी। वैसे, अच्छी खबर ये है कि उमा भारती लौट आईँ हैं और अपने पिता समान आडवाणी की रथयात्रा को सफल बनाने के साथ अपनी राजनीतिक जमीन सुधारने की भी बड़ी चुनौती उनके सामने होगी।

लेकिन, अब कई मुश्किले हैं। प्रमोद महाजन नहीं हैं। अटल बिहारी वाजपेयी नहीं जैसे ही हैं। गोविंदाचार्य होते हुए भी नहीं हैं। और, कल्याण सिंह हैं भी तो, उल्टे हैं। कौन चलेगा इस बार आडवाणी के साथ। राज्यों में मंच पर कौन से नेता होंगे जो, दहाड़ेंगे। आडवाणी के अलावा किसकी शक्ल देखकर बीजेपी कार्यकर्ता या आम जनता भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई में पूरे मन से जुटेगी। कई सवाल हैं। देखिए, इनके जवाब रथयात्रा के बाद कैसे आते हैं।

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