बराक ओबामा क शांति पुरस्कार मिला है। दुनिया क सबसे बड़ा पुरस्कार है ई। अरे वही वाले का एक हिस्सा है ई पुरस्कार जिसमें हम इत्ते भर से खुश हो जाते हैं कि का भवा अमेरिका में रहि के मिला तो, भारत म पढ़ाई तो किहे रहा। अब भई तब तो बनथ भाई हम सबके खुश होएके चाही।

ई उही वाले ओबामा तो हैं जो, be the change! का जुमला हर बार बोलथैं जरूर। कर केत्ता पावथैं पता नहीं। साल भर में का भवा भइया। भवा ना दुनिया भर में घूम-घूम के कहिन be the change! औ ई बड़ मनई हैं जब बोलेन हर बार दुनिया सुनिस। ऐसा गूंजा be the change! जैसे राखी का थप्पड़ अभिषेक क गाल प। चड्ढी पहिर नहात-धोवत तस्वीरो देखके लगा कि be the change! लेकिन, का सही म कुछ चेंज भवा। इरान म तो अहमदीनेजाद से पूछो– पाकिस्तान में आसिफ अली जरदारी, जनरल कियानी, यूसुफ रजा गिलानी– चीनौ म पूछ लेओ। हमरे वसुधैव कुटुंबकम वाले भारत क छोड़ कउनौ से पूछे लेओ- ए भइया कहां भवा ई be the change!

be the change! बस एत्तै भवा कि गांधी के साथ ओबामा के dream date क बात सुनके हम भारतीय अइसन भाव विभोर भए। कइउ दिन तक लहराए घूमत रहे। सबके लगा कि एसे बड़ी खबर का होई औ ओबामा के गांधी के साथ dream date वाली खबर के दिन सारा मीडिया अइसा कइ दीहिस कि उम्मीद बंध गई कि भवा तो change!

ओबामा के मेहरारू मिशेल के dress sense से लैके ओबामा के दुइनौ गदेलन (बेटियों) तक की बात औ व्हाइट हाउस म कूकुर क नई नस्ल तक जमके भवा be the change! दिसंबर 10 क जब ओबामा शांति क नोबल लेइहैं तो, देखो का कहथि। पता नहीं ई याद रही कि नहीं कि दलाई लामा से मिल तक नहीं सके भइया। चीन के डर म।

ए भाई हम तो बेचारे भारतीय हैं हमार तो समझ म आवथै कि हमार जमीन कब्जाए तक बैठे हैं ई हिंदी-चीनी भाई-भाई वाले चीनी। लेकिन, भई ओबामा तुम केसे डेराए रहे हो। बताओ न। अफगानिस्तान, पाकिस्तान से लैके दुनिया क कौने देश म तुम्हार be the change! वाला नारा काम कर रहा है। बताओ न सबसे बड़का वाला शांति पुरस्कार काहे मिला तुमका। सिर्फ बड़-बड़ बोलै के वजह से। सबसे बड़का देस का बड़का मनई बनै के वजह से। पता नहीं हम तो न समझ पाए रहे हैं आप समझे हों भइया तो, बताएओ जरूर। be the change


7 Comments

ज्ञानदत्त पाण्डेय| Gyandutt Pandey · October 9, 2009 at 2:33 pm

गांधीजी को नोबेल न मिलने से नोबेल की छीछालेदर थी। बर्कोबामा को मिलने से होगी!

बवाल · October 10, 2009 at 5:20 am

एकदम वाजिब कहा साहब। आपसे सहमत हैं हम भी।

दर्पण साह "दर्शन" · October 10, 2009 at 9:09 am

nobel ke liye oscar ke liye itna bawal….

…yahai bahart main kisi bahratiy ko koi puruskaar mil jaie to uski avhelna hoti hai…
..aamir khan to puruskaar lene aate bhi nahi, aur oscar main dum hila ke jaate hain….

sahi kaha aapne ki ye us vakiye ka hi agla bhaag sa lagta hai…
" का भवा अमेरिका में रहि के मिला तो, भारत म पढ़ाई तो किहे रहा।"

kabhi naipole ke liye khush ho lete hain, kabhi arcenol wale mittal ke liye, kabhi slumdog ke liye, kabhi mother teresa ke liye….
…kya wakai puruskaar milna hi kisi ke karya ke utkrist hone ki pari pati hai?
BE THE CHANGE !!

कार्तिकेय मिश्र (Kartikeya Mishra) · October 12, 2009 at 8:04 am

हम तो बहुते खुस हैं। सब झुठ्ठे ऐसेही बोलबचन फैलाय रहे हैं। ई सब हमरे बजरंग बली का परताप है।

सुनील पाण्‍डेय · October 12, 2009 at 9:53 am

हर्षबर्धन भइया आप बिल्‍कुलई ठीक बोला है, तोहरे लेख क एक एक लाइन से गुदगुदाय गई। बहुतई मजा आवा। कम से कम हमरे गांव की बोलिया आप परदेश में जाकर बोलत हैं, यह देखकर हमार करेजा हरियर होई गवा।

सुनील पाण्‍डेय
इलाहाबाद।
09953090154

justicefordalits · October 15, 2009 at 11:36 am

hamka to ek hi cheez laagat hai, obama babu ko ee puraskaar amrica ko badhiya dikhaan khaatir diya gawa hai.
amrica bhaiya aajkal to dubai hi jaa raha hai aur ee ka ubaaran khaatir obama kachu bhi kar sakat hai.
nobel kharid bhi sakat hai.

Mrs. Asha Joglekar · October 18, 2009 at 3:48 pm

नोबेल कमिटी ने जिसे सही समझा पुरस्कार दिया । अच्छी सोच भी तो जरूरी है अच्छे काम के लिये ।

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