दस साल पहले इलाहाबाद विश्वविद्यालय के छात्रावासों और डेलीगेसीज में लड़कों के कमरे में (शायद देश भर के छात्रावासों के कमरों में) एक साथ 3 पोस्टर नजर आते थे। ब्लैक एंड व्हाइट पोस्टर मधुबाला का, जिसमें मधुबाला के माथे से एक लट आंखों से थोड़ा बगल से होकर लटक रही होती थी। उससे सटकर एक कलर्ड पोस्टर होता था। काफी कुछ मधुबाला जैसी दिखने वाली माधुरी दीक्षित का। माधुरी दीक्षित का अंदाज भी काफी कुछ मधुबाला जैसा ही होता था। और, उसी से सटा नीली आंखों वाली विश्व सुंदरी ऐश्वर्या राय का। मधुबाला एक पीढ़ी पुरानी, माधुरी उस दौर की और ऐश्वर्या आने वाली पीढ़ी की सबसे खूबसूरत और सबसे ज्यादा लोगों की पसंद वाली हीरोइन की पहचान जैसी थीं।

नंबर एक अभिनेत्री माधुरी ने आज से 5 साल पहले जब संजय लीला भंसाली की देवदास में ऐश्वर्या के साथ काम किया तो, दोनों के एक साथ थिरकने वाले गाने पर पूरा देश थिरका था। साथ ही एक चर्चा ये भी चल पड़ी थी कि माधुरी दीक्षित की नंबर वन की विरासत को संभालने के लिए ऐश्वर्या पूरी तरह तैयार हैं। फिर माधुरी ने परिवार बसा लिया। पति के साथ न्यूयॉर्क में बस गईं। 5 सालों तक मीडिया, मायानगरी से किनारा सा कर लिया। दो प्यारे बच्चों की मां बन गईं और लगा कि माधुरी का दौर पूरी तरह खत्म हो गया। लेकिन, कमाल ये था कि इन 5 सालों में कई प्रतिभाशाली अभिनेत्रियों के आने के बावजूद एक भी अभिनेत्री ऐसी नहीं आई जिसे बिना किसी बहस के नंबर एक कहा जा सके।

और, माधुरी दीक्षित की 5 साल बाद बड़े परदे पर वापसी के साथ दो बातें हो गईं। एक तो ये कि देश की नंबर वन हीरोइन की सीट खाली नहीं है। माधुरी से ये ताज छीनने के लिए दूसरी अभिनेत्रियों को अभी बहुत दम लगाना पड़ेगा। दूसरी ये कि हॉलीवुड से मुकाबला करते बॉलीवुड में आने वाले दिनों में बिना गाने की सफल फिल्में बनाना अभी बहुत दूर की कौड़ी है। मनमोहिनी मुस्कान वाली माधुरी की ‘आजा नचले’ भारतीय फिल्म इतिहास की सबसे अच्छी म्यूजिकल ड्रामा फिल्म बन गई है।

मेरे नजरिए से ‘आजा नचले’ के बारे में मैं पहले साफ कर दूं कि ये फिल्म अभिनय के लिहाज से बहुत अच्छी नहीं है। ऐसा नहीं है कि अभिनय करने वाले कमजोर है। फिल्म की कहानी ही कुछ ऐसी है। हां, अच्छा हुआ कि माधुरी को नृत्य सिखाने वाले गुरुजी फिल्म में बहुत कम देर के लिए थे। वरना फिल्म की कलेक्शन बरबाद करने में उनका योगदान बढ़ जाता। गुरुजी के दुनिया से ऊपर उठने के बाद ही फिल्म चलनी (दर्शकों को अच्छी लगनी) शुरू हुई। इरफान जैसे अभिनेता के पास फिल्म में करने के लिए कुछ खास नहीं है। रणवीर-विनय ने अपनी भूमिका अच्छे से निभाई है। लेकिन, भेजा फ्राई से आगे निकलने के लिए किसी बहुत बेहतरीन स्क्रिप्ट की उन्हें सख्त दरकार होगी। कोंकणासेन ने भी अपने हिस्से का बेहतर काम किया है।

‘आजा नचले’ मैं उन लोगों को खास तौर पर देखने को कहूंगा जो, माधुरी, माधुरी की मुस्कान, माधुरी के नृत्य के चाहने वाले हैं। पूरी फिल्म माधुरी के आसपास ही घूमती है। माधुरी का हर अंदाज कुछ खास दिखता है। एकाध नजदीक के दृश्यों को छोड़ दें तो, ये समझ पाना मुश्किल होगा कि ये 2 बच्चों की 42 साल की माधुरी है। और, माधुरी थिरकना शुरू करती हैं तो, शायद किसी के लिए भी ये याद करना असंभव सा हो जाता होगा।

खैर, मैं फिर से लौटता हूं आज के इलाहाबाद विश्वविद्यालय के छात्रावासों और डेलीगेसीज में लड़कों के कमरे में। अलग-अलग कमरे में मधुबाला, माधुरी जमी हैं। लेकिन, ऐश्वर्या की फोटो हर दूसरे कमरे में बदल रही है। कहीं ऐश्वर्या की जगह प्रीती जिंटा हैं, कहीं करीना कपूर, कहीं सुष्मिता सेन, कहीं लारा दत्ता, कहीं, प्रियंका चोपड़ा, कहीं बिपाशा बसु, कहीं … । लिस्ट लंबी है। अभिनेताओं में अमिताभ बच्चन महानायक हो गए। इस बेरहम इंडस्ट्री में सबसे ज्यादा समय तक नंबर एक अभिनेता बने रह गए। अभी भी नए जमाने के अभिनेताओं की तुलना उन्हीं के बाद शुरू होती है। फिर भी, शाहरुख खान ने अब नंबर एक का खिताब लगभग छीन ही लिया है। अब सवाल ये है कि क्या अभिनेत्रियों में एक भी अभिनेत्री नहीं है जो, 5 साल खाली रहने के बाद भी नंबर एक अभिनेत्री का खिताब ले सके। आप भी ‘आजा नचले’ देखकर आइए। फिर बात करते हैं।


6 Comments

Lavanyam - Antarman · December 2, 2007 at 8:05 pm

माधुरी न्यू यार्क में नहीं रहतीं – उनके पति कोजी डाक्टर हैं उनकी जहाँ पर पोस्टिंग होती हैं वहाँ रहतीं हैं — कोलोराडो प्रांत के दंव्र श्र में, फ़िर फ्लोरिडा भी रहीं –
बाकी आपके आलेख में , आपका कहना सही है

Lavanyam - Antarman · December 2, 2007 at 8:06 pm

Colorado State ke Denver City mei & Florida — is what i meant —

Gyandutt Pandey · December 3, 2007 at 2:56 am

आप भी ‘आजा नचले’ देखकर आइए। फिर बात करते हैं।
——————-
चलो देखते हैं कि कब देख पाते हैं!

mahashakti · December 3, 2007 at 3:11 am

जो आपने छात्रावास के बारे में कहा है वह सत्‍य है, मैने भी अद्भुत छटा के दर्शन किये है। 🙂

काकेश · December 3, 2007 at 6:12 am

दो पोस्टर तो हमारे कमरे में भी थे. ऎश का नहीं था क्योकि तब तक वह सीन में नहीं आयी थी.

अनूप शुक्ल · December 9, 2007 at 4:17 am

बढ़िया है। देखते हैं सिनेमा। लेकिन हम तो बिना पोस्टर के ही निकल लिये इलाहाबाद से।

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