विस्फोटक संजय तिवारी से बात हो रही थी तो, उन्होंने कहाकि भोपाल चलेंगे क्या। हमने कहा बताइए, कुछ खास हो तो, जरूर चलेंगे। उन्होंने कहा- नए मीडिया पर कुछ चर्चा होनी है। मैंने कहा अच्छा है, जरूर चलेंगे। भोपाल शहर इतना पसंद आता है कि वहां से आया निमंत्रण लपकने में देर क्या करना। उसके अनिल सौमित्र का फोन आया। आभासी दुनिया में पहले से परिचित थे। सोचा चलो अच्छा है भौतिक परिचय/मिलन भी हो जाएगा। अनिल जी ने मेल पर सारा विवरण भेजा। शानदार चर्चा की चुनौती वाली मेल आई थी।
चर्चा के मुख्य विषय
न्यू मीडिया : समस्याएं, अवसर और चुनौतियांविज्ञान के लोकव्यापीकरण में न्यू मीडिया की भूमिकाइसके अंतर्गत निम्न बिन्दु हो सकते हैं, इसे एक मित्र ने सुझाया है- 1. क्या अब नया मीडिया ही मुख्यधारा है? मीडिया बनाम न्यू मीडिया, 2. न्यू मीडिया पहुच और प्रभाव, 3. राजीनति के झरोखे से वेब मीडिया. 4. जय किसान जय विज्ञान. 5. जय किसान, जय विज्ञान. 6. भाषाई शिष्टता बनाम वेब, 6. अंतर्राष्ट्रीय वेब जगत में हिन्दी., 7. ब्लॉग बनाम माइक्रो ब्लोगिंग साईट, 8. जनांदोलन और वेब, 9. मिस्र, लीबिया और भारत?, 10. वेब जगत का आर्थिक मॉडल., 11. सरकारी अंकुश : ज़रूरत या सनक, 12. स्व नियमन की ज़रूरत, 13. अभिव्यक्ति की आज़ादी, नेट के साथ, 14. कैसी हो वेब की आचार संहिता. 15. वेब : भूगोल अब इतिहास की वस्तु, 16. फॉण्ट की समस्या और यूनिकोड समाधान, 17. सर्न, गौड पार्टिकल और WWW, 18. वैज्ञानिक संचार ज़रूरतें, 19.संस्कृति और संवाद वाया वेब, 20. कोपीराईट का सवाल और न्यू मीडिया 21. इन्टरनेट गांव तक : खयाली पुलाव या सच्चाई, 22. राष्ट्रीय चुनौतियों में नेट की भूमिका, 23 आतंक के विरुद्ध लड़ाई में चुनौती या सहायक वेब? 24. क्या नेट दुधारी तलवार है? 25. राष्ट्रीय अखंडता और वेब सम्प्रेषण. 26. राज कि रहहि वेब बिनु जाने  27. साम्प्रदायिक सद्भाव में वेब : साधक या बाधक.
इस मेल के बाद उत्साह और बढ़ गया। लेकिन, उसी समय ये अंदेशा था कि एक दिन की चौपाल में इतने विषयों पर चर्चा कैसे हो पाएगी। फिर भी नए मीडिया पर चर्चा, भोपाल, अनिल सौमित्र और नए लोगों से मिलने की इच्छा ने ऐसा जोर मारा कि जाना तय कर लिया। शनिवार रात 9 बजे की भोपाल एक्सप्रेस से पक्का टिकट था। उसी ट्रेन से पुराने साथी भुवन भाष्कर (डीएनई, इकोनॉमिक टाइम्स) भी जाने वाले थे।
ये आगरा से लौटते समय की तस्वीर है
रात 9 की ट्रेन थी तो, मैंने सोचा चलो यमुना एक्सप्रेस वे पर सपरिवार आनंद ले लेते हैं। और, ताजमहल भी देख लेते हैं। सुबह साढ़े दस बजे दिल्ली में गाजीपुर वाले पेट्रोल पंप से टैंक फुल करा लिया। और, निकल पड़े। 11 बजे यमुना एक्सप्रेस वे पर प्रवेश और 12.30 पर आगरा नेशनल हाइवे पर। लगा ये शानदार है। 2 बजे तक भी ताज देखकर वापसी कर लेंगे तो, 5 बजे तक घर पहुंच जाएंगे।
आगरा नेशनल हाईवे से ताजमहल तक का जाम
लेकिन, यहीं गणित गड़बड़ा गया। तूफानी चाल वाले एक्सप्रेस वे से आती हजारों गाड़ियां आगरा नेशनल हाईवे पर पहुंचते ही कछुए की चाल में चलने लगीं। और, सिर्फ 14 किलोमीटर की ताज की दूरी तय करने में तीन घंटे से ज्यादा का समय लग गया। पीछे-पीछे भुवन भी आ रहे थे। आखिरकार भोपाल जाने की बलवती इच्छा लिए पत्नी को अगली बार ताज के अंदर ले जाने का वादा करके बाहर से कुछ तस्वीरें लीं और वापस गाड़ी मोड़ दी। फिर से ताज से यमुना एक्सप्रेस वे के मुहाने तक पहुंचने में वही पीड़ा झेली। शाम 6.20 पर यमुना एक्सप्रेस वे पर प्रवेश हुआ और बहुत कम संभावना रह गई थी कि भोपाल जाना हो पाएगा।
लेकिन, इच्छा बलवती थी तो, अपने जीवन की अधिकतम रफ्तार पर एक्सप्रेस वे पर अपनी कार चलाई। साथ ही ये भी तय किया कि दोबारा इतनी तेज गाड़ी कभी नहीं चलाउंगा। खैर, 8.25 पर वसुंधरा अपने घर पहुंचा। रास्ते में ही टैक्सी के लिए फोन कर दिया था। जल्दी से दो जोड़े कपड़े डाले और निकल लिया। टैक्सी वाले ने भी एक्सप्रेस वे वाली तूफानी चाल न सही लेकिन, 7 मिनट पहले निजामुद्दीन पहुंचा दिया और 8.57 पर मैं अपनी सीट पर था। अनिल जी को आगरा में आशंकित करने के बाद ट्रेन में बैठने के बाद पक्का कर दिया कि सुबह मुलाकात होती है।
भोपाल चौपाल में यहीं रहना हुआ
दिल्ली के सड़ियल मौसम से भोपाल की खुशनुमा सुबह में पहुंचकर मजा आ गया। अनिल जी स्टेशन पर हल्की फुहारों के साथ स्वागत के लिए तैयार थे। शहर से थोड़ा हटकर कार्यक्रम स्थल बेहद शानदार था। संजय बेंगाणी, सुरेश चिपलूणकर, रवि शंकर रतलामी, बीएस पाबला, संजीत त्रिपाठी (कुछ नाम छूट रहे हैं) जैसे पुराने ब्लॉगरों के साथ मिलकर लगा कि चौपाल बढ़िया ही रहेगी। अनिल पांडेय से भी लंबे अर्से के बाद मुलाकात हुई। अनुराग अन्वेषी दिल्ली से साथ आए थे लेकिन, उनका साथ मिला भोपाल पहुंचकर। बढ़िया व्यक्ति से संपर्क हुआ। और, 4 साल से ज्यादा समय मुंबई रहने के बाद भी दैनिक सामना के संपादक प्रेम शुक्ला का सिर्फ नाम ही सुनता रहा और विस्फोट पर उनका लिखना पढ़ता रहा। भोपाल चौपाल ने प्रेम जी के व्यक्तित्व से परिचय कराया, मस्त रहा।
सबसे बड़ी बात इस चौपाल की ये थी कि नए मीडिया के मूल तत्व तकनीक से वास्ता रखने वाले मध्य प्रदेश सरकार के विज्ञान और प्रोद्योगिक विभाग ने इसे प्रायोजित किया था। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रवक्ता रहे राम माधव ने शानदार शुरुआत की। एक बात जो, नए मीडिया के साथ जुड़े ज्यादातर लोग मानते हैं उसे उन्होंने भी पुष्ट किया। राम माधव जी ने कहा कि नया मीडिया, मीडिया का लोकतंत्रीकरण है और इसे किसी भी नियमावली में बांधना गलत होगा। चौपाल का पहला निष्कर्ष निकल चुका था। लेकिन, इसके बाद चौपाल की गाड़ी पटरी से उतर गई। अनिल जी की मेल में आए सारे विषय धरे के धरे रह गए। के जी सुरेश के लंबे भाषण के बाद सिर्फ हल्ला-गुल्ला रह गया। और, उसके बाद के सत्र में भी विषय पर सलीके से बात नहीं ही हो पाई। वेब जगत के आर्थिक मॉडल का कोई ठोस तरीका सूझे इस पर भी कोई मॉडल सामने नहीं आ पाया। जो, बातें चर्चा में आने से छूटीं उस पर अनिल सौमित्र जी से बात हुई है कि वो, उसे आगे बढ़ाएंगे। और, मुझे पूरा भरोसा है कि वो, निश्चित तौर पर एक बार फिर से चौपाल कराकर इस कमी को जरूर पूरा करेंगे। कम से कम विषय, सत्र और सत्र में कौन-कौन विषय रखेगा ये पहले से तय रहेगा। एक सत्र मंचासीन विद्वान अतिथियों के लिए रख सकते हैं। और, एक बात कि अनिल सौमित्र को वादा करना होगा कि इस चौपाल जैसा ही शानदार आतिथ्य होगा और, जगह भोपाल ही होगी।

6 Comments

प्रवीण पाण्डेय · August 20, 2012 at 7:33 am

नये मीडिया के नये प्रश्न..

अनुराग अन्वेषी · August 20, 2012 at 8:38 am

बढ़िया व्यक्ति बताने के लिए शुक्रिया हर्षवर्धन भाई 🙂

    BS Pabla · August 20, 2012 at 9:52 am

    हमसे तो कुछ पल की ही रही मुलाक़ात 🙁

BS Pabla · August 20, 2012 at 9:51 am

सही है, कई मुद्दों पर चर्चा तो रह ही गई
लेकिन आप सबसे मुलाक़ात सुखद रही

shikha varshney · September 3, 2012 at 2:05 pm

वहाँ होकर भी भेंट न हो सकी …कमाल है :).वैसे चर्चा रह गई पर कार्यक्रम बढ़िया था.

आशा जोगळेकर · September 25, 2012 at 12:19 am

यात्रा विवरण अच्छा है । चर्चा का विवरण होता तो और अच्छा होता पर जैसा कि आप कह रहे हैं सारे विषय धरे के धरे रह गये ।

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